यूपी में हर दिन करीब 25 लोग आत्महत्या कर रहे हैं। 2020 में जहां सुसाइड के कुल 4804 केस दर्ज हुए थे, 2024 में यह संख्या बढ़कर 9180 हो गई। यह जानकारी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की हालिया और पुरानी रिपोर्ट्स का आकलन करने पर सामने आई है। प्यार में नाकामी के बाद सुसाइड के मामले पिछले 5 साल में 4 गुना तक बढ़ गए हैं। प्रेम संबंधों की वजह से 2020 में सुसाइड के 283 केस सामने आए थे। 2024 में इस तरह के मामलों की संख्या 1120 हो गई है। पढ़िए खास रिपोर्ट… पारिवारिक समस्याएं सुसाइड की सबसे बड़ी वजह NCRB के आंकड़ों पर गौर करें, तो 2012 से 2016 के दौरान प्यार में नाकामी की वजह से कुल 923 लोगों ने जान दी थी। 2017 से 2021 में यह आंकड़ा बढ़कर 1754 हो गया। वहीं, 2022 से 2024 यानी सिर्फ 3 साल में ही यह संख्या 2746 तक पहुंच गई। साल 2024 में लव अफेयर्स की वजह से 1120 मौतें दर्ज की गईं, जो अब तक का सबसे बड़ा सालाना आंकड़ा है। वहीं, सुसाइड की सबसे बड़ी वजह पारिवारिक समस्याएं हैं। यूपी में 2020 से लेकर 2024 तक सबसे ज्यादा 33% यानी एक तिहाई लोगों ने पारिवारिक कारणों से सुसाइड किया। ये मामले हर साल बढ़ते जा रहे हैं। 2020 में सुसाइड के मामले 1952 थे। 2021 में यह संख्या बढ़कर 2235, जबकि 2022 में 3134 हो गई। 2023 में 3621 और 2024 में 3071 लोगों ने पारिवारिक कारणों से आत्महत्या की है। वीडियो रिकॉर्ड कर सुसाइड करने का ट्रेंड बढ़ा पिछले कुछ सालों में वीडियो रिकॉर्ड करने या लाइव स्ट्रीमिंग (सोशल मीडिया पर लाइव टेलीकास्ट) के दौरान आत्महत्या करने का ट्रेंड बन गया है। आत्महत्या से पहले मृतक अपनी समस्या कैमरे में रिकॉर्ड करता है। इसके बाद फंदे से लटककर या अन्य तरीके से जान दे देता है। ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो जाते हैं। 70% केस में लोग फंदे से लटके आंकड़े बताते हैं कि फंदे से लटकना आत्महत्या करने का सबसे प्रचलित तरीका बना हुआ है। 2020 में फंदे से लटकने के 2900 मामले थे, जो 2024 में 6371 पहुंच गए। 2024 में आत्महत्या के कुल 9180 मामलों में से 69.4% केस में फंदे से लटकना था। हालांकि, नींद की गोलियां खाकर जान देने का तरीका भी तेजी से बढ़ा है। 2020 से 2024 तक इस तरह के मामलों में 232% की बढ़ोतरी हुई है। बेरोजगारी और गरीबी से सुसाइड के मामलों भी बढ़ाई चिंता NCRB के आंकड़ों के मुताबिक, बेरोजगारी और गरीबी की वजह से होने वाली आत्महत्याओं में भी बढ़ोतरी देखी गई है। 2012 से 2016 के दौरान बेरोजगारी से 314 लोगों ने सुसाइड किया था। अगले 5 साल में यह संख्या 625 हो गई। 2022 से 2024 के दौरान यानी 3 साल में ही आंकड़ा 528 पहुंच चुका है। इसी तरह गरीबी से हुई मौतों का आंकड़ा भी 2012 से 2017 के दौरान 160 था। अगले 5 साल में ये 441 तक पहुंच गया। इसके बाद 2022 से 2024 यानी 3 सालों में ही आंकड़ा 444 के पार हो गया। अब जानिए एक्सपर्ट क्या कहते हैं… सीनियर कंसल्टेंट साइकियाट्रिस्ट डॉ. कृष्णा मिश्रा बताते हैं- प्रेम, लस्ट (वासना) और अट्रैक्शन (आकर्षण) तीन अलग चीजें हैं। लेकिन, अक्सर लोग इनके बीच का फर्क समझ नहीं पाते। कई बार इंसान लस्ट या अट्रैक्शन को ही प्रेम मानकर उस पर डिपेंड हो जाता है। इस हालत में जैसे ही दूसरी तरफ से रिजेक्शन आता है, इंसान उसे मैनेज नहीं कर पाता। आजकल की पेरेंटिंग भी रिजेक्शन मैनेज करना नहीं सिखा पाती। बच्चों को कभी किसी चीज के लिए मना नहीं किया जाता। ऐसे में जब उनकी फीलिंग को लेकर रिजेक्शन मिलता है, तो इसे बर्दाश्त नहीं कर पाते। क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट द्युतिमा शर्मा कहती हैं- जब लव अफेयर्स टूटते हैं, तो लोगों को वैसा ही दर्द होता है जैसा किसी की मौत होने पर होता है। हालांकि, मौत के मामले में लोग समझ जाते हैं कि चीजें उनके हाथ में नहीं थीं। लेकिन जब रिश्ते टूटते हैं, खासकर जब किसी ने धोखा दिया हो तो कई बार इस दुख से उबरना मुश्किल हो जाता है। ऐसी हालत में लोगों का अपने ऊपर विश्वास कम हो जाता है। कैसे पहचानें कोई सुसाइड करने की सोच रहा? सीनियर कंसल्टेंट साइकियाट्रिस्ट डॉ. कृष्णा मिश्रा बताते हैं- अगर कोई व्यक्ति पहले खुश रहता था और अचानक उसका व्यवहार बदल गया है, तो उस पर ध्यान देने की जरूरत है। ऐसा इंसान बातचीत और लोगों से मिलना कम कर देता है। अकेला रहता है और उसकी प्रोडक्टिविटी गिर जाती है। कभी-कभी वह मरने की बात भी करता है। अगर किसी के व्यवहार में ऐसे बदलाव दिखें, तो तुरंत किसी मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से बात करनी चाहिए। क्या है समाधान? इंटरनेट और सोशल मीडिया की वजह से आजकल प्यार और अट्रैक्टशन के बीच अंतर कम हुआ है। पहले आंखों का दायरा सीमित था, लेकिन अब पोस्ट पर आए लाइक-कमेंट को ही लोग प्यार समझने लगते हैं। इसीलिए यह समझना जरूरी है कि आपके अंदर की फीलिंग प्यार है, लस्ट है या आकर्षण? इसके लिए अपनी मेंटल हेल्थ पर काम करना होगा। दिमाग को शांत रखने वाले बिहेवियर को प्रैक्टिस में लाना होगा। इसमें पेरेंट्स की भी बड़ी जिम्मेदारी है कि बच्चे को घर से ही प्यार की सही समझ मिले। ———————– ये खबर भी पढे़ं… 2027 में कम हो सकते हैं सपा के मुस्लिम प्रत्याशी, अखिलेश केदारेश्वर मंदिर से छवि बदल रहे 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव अपनी छवि बदलने की कोशिश कर रहे हैं। आम धारणा है कि सपा मुस्लिम-यादव वोटर्स के इर्द-गिर्द अपनी राजनीति करती रही है। भाजपा इसे चुनाव में हमेशा हथियार बनाती रही है। पूरी खबर पढ़ें…
यूपी में रोज 25 लोग खत्म कर रहे जिंदगी:5 साल में 4 गुना बढ़े प्यार में सुसाइड के मामले, वीडियो बन रहे ‘डिजिटल सुसाइड नोट’
