हरियाणा कांग्रेस के लंबे समय से लंबित संगठन गठन को लेकर इस बार पार्टी नेतृत्व सख्त रुख अपनाने जा रहा है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष उदयभान के बाद संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की कवायद तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार अब किसी नेता की व्यक्तिगत सिफारिश के आधार पर नियुक्तियां नहीं होंगी। संगठन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण नामों पर अंतिम फैसला इंडियन नेशनल कांग्रेस (INC) का केंद्रीय नेतृत्व करेगा। प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह का इसको लेकर होम वर्क पूरा हो चुका है। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार इसकी 4 वजहें सामने आई हैं। केंद्रीय नेतृत्व प्रदेश के नेताओं के बीच चल रही गुटबाजी और जमीनी कार्यकर्ताओं को मौका मिलेगा। ब्लॉक कार्यकारिणी से होगी शुरुआत पार्टी सूत्रों का कहना है कि संगठन गठन की शुरुआत ब्लॉक कार्यकारिणियों से की जाएगी। इसके बाद जिला, प्रदेश और विभिन्न प्रकोष्ठों का गठन होगा। केंद्रीय नेतृत्व का फोकस उन कार्यकर्ताओं को आगे लाने पर है जो पिछले वर्षों में लगातार सक्रिय रहे हैं और चुनावी व संगठनात्मक गतिविधियों में योगदान देते रहे हैं। प्रदेश स्तर के संगठन में महासचिव, उपाध्यक्ष, सचिव बनाए जाएंगे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि कोषाध्यक्ष सहित अन्य नियुक्तियां भी की जाएंगी। लोकल नेताओं की सिफारिश क्यों नहीं चलेगी? 1. गुटबाजी बनी सबसे बड़ी वजह हरियाणा कांग्रेस कई वर्षों से आंतरिक गुटबाजी से जूझ रही है। अलग-अलग खेमों की खींचतान के कारण संगठन का गठन बार-बार टलता रहा। इस बार केंद्रीय नेतृत्व नहीं चाहता कि किसी एक गुट का दबदबा बने। इसलिए नामों की अंतिम मंजूरी दिल्ली से होगी ताकि संतुलन बनाया जा सके। 2. असली कार्यकर्ताओं की अनदेखी रोकने की कोशिश अक्सर शिकायत रही है कि केवल प्रभावशाली नेताओं के करीबी लोगों को पद मिल जाते हैं, जबकि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ता पीछे रह जाते हैं। नई प्रक्रिया का उद्देश्य ऐसे सक्रिय कार्यकर्ताओं को पहचानकर संगठन में शामिल करना है। 3. भाजपा के मजबूत संगठन से सीख भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने हरियाणा में बूथ से लेकर प्रदेश स्तर तक मजबूत संगठन खड़ा किया है। कांग्रेस अब उसी मॉडल से प्रेरणा लेते हुए नीचे से ऊपर तक सक्रिय और जवाबदेह ढांचा तैयार करना चाहती है। 4. सक्रिय और परिणाम देने वाले कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता सूत्रों के अनुसार, केवल उन्हीं नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जाएगी, जो नियमित रूप से पार्टी कार्यक्रमों में शामिल रहे हैं, सदस्यता अभियान में सक्रिय रहे हैं और क्षेत्र में पार्टी की मौजूदगी बनाए रखी है। ब्लॉक कार्यकारिणी होगी पहली प्राथमिकता कांग्रेस संगठन की असली ताकत ब्लॉक स्तर पर मानी जाती है। इसी वजह से सबसे पहले ब्लॉक अध्यक्षों और उनकी कार्यकारिणियों का गठन किया जाएगा। इससे गांव और कस्बों तक पार्टी ढांचे को फिर से सक्रिय करने में मदद मिलेगी। राव ने होमवर्क पूरा किया सूत्रों के मुताबिक संगठन गठन को लेकर प्रदेश स्तर पर व्यापक फीडबैक जुटाया जा चुका है। संभावित नामों, सामाजिक संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और कार्यकर्ताओं की सक्रियता का आकलन कर सूची दिल्ली भेजी जा रही है। अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व करेगा। कांग्रेस इस प्रक्रिया के जरिए स्पष्ट संदेश देना चाहती है कि अब संगठन में पद पाने के लिए केवल सिफारिश पर्याप्त नहीं होगी। पार्टी ऐसे कार्यकर्ताओं को आगे लाना चाहती है जो जमीनी स्तर पर मेहनत कर सकें और आगामी चुनावों में भाजपा को कड़ी चुनौती देने में सक्षम हों। बृजेंद्र की सदभाव यात्रा में मिल चुकी मंजूरी पार्टी नेताओं का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र को गुरुग्राम में हुई सदभाव यात्रा की रैली में राहुल गांधी ने परमीशन दे दी है। जिसके बाद वह अब संगठन को लेकर पूरी तरह से एक्टिव हो गए हैं। राव नरेंद्र सिंह इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि अभी हमारी प्रियॉरिटी निकाय चुनाव हैं। 13 को परिणाम आने के बाद पार्टी संगठन पर ही फोकस करने जा रही है। सबसे पहले ब्लॉक कार्यकारिणी और फिर प्रदेश स्तर की नियुक्तियां संगठन में की जाएंगी।
हरियाणा कांग्रेस के नए संगठन में नहीं चलेगी सिफारिश:दिल्ली से तय होंगे नाम; 4 वजहें आई सामने, जमीनी कार्यकर्ताओं को मिलेगा मौका
