कानपुर के सात गांव इन दिनों ‘मिनी जामताड़ा’ के नाम से चर्चा में हैं। पुलिस ने करीब 3 महीने तक फील्ड एक्सरसाइज के बाद चारों ओर से गांवों को घेरकर 20 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। ये लोग दूसरे के नाम पर सिम कार्ड खरीदते, फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंक खाते खुलवाते। इन्हीं सिम और खातों के जरिए देश के अलग-अलग राज्यों के लोगों को जाल में फंसाकर साइबर ठगी करते थे। दैनिक भास्कर कानपुर शहर से घाटमपुर के रास्ते करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित साइबर ठगों के गांव रठिगांव, लक्ष्मणपुर, समाज नगर, लीलादास का पुरवा, बढ़ैल, पुलंदर, कैलाशपुर पहुंचा। यहां का हाल जाना। गिरफ्तारी के बाद से इन गांवों में सन्नाटा पसरा है। करीब 1700 से 2000 की आबादी वाले गांवों में सड़कें सूनी हैं, 80% युवा गायब हैं। किसी अनजान को देखते ही लोग घर के दरवाजे बंद कर लेते हैं। महिलाएं और बच्चे खिड़कियों से झांकते दिखे। पढ़िए ये रिपोर्ट… सबसे पहले ‘मिनी जामताड़ा’ गांवों के बारे में जानिए झारखंड का जामताड़ा साइबर ठगी को लेकर बदनाम है। उसी तर्ज पर अब कानपुर का छोटा सा इलाका साइबर ठगी के कारण चर्चित हो चुका है। ठगी के धंधे में रठिगांव, लक्ष्मणपुर, समाज नगर, लीलादास का पुरवा, बढ़ैल, पुलंदर व कैलाशपुर हैं। यह सभी गांव चार से पांच किमी के रेडियस में बसे हुए हैं। सभी गांव की आबादी 1700-2200 के करीब है। हम सबसे पहले रेउना इलाके के रठिगांव पहुंचे। यहां से पुलिस ने चार आरोपियों शैलेंद्र, रोमी, नीरज और ज्ञान प्रकाश को गिरफ्तार किया है। हम कुछ बच्चों से पूछते हुए शैलेंद्र व रोमी के घर पहुंचे। दरवाजा बंद था। एक ओर कुछ लोग बैठकी कर रहे थे। ज्यादातर बुजुर्ग और महिलाएं। हमको देख हर कोई वहां से निकल गया। युवा नजर नहीं आए। कुछ घरों के खिड़की-दरवाजे खुले, लेकिन कोई बात करने को तैयार नहीं था। इसी बीच हमारी मुलाकात रोमी, शैलेंद्र व मखौली निवासी शिवकांत के परिजनों से हुई। कुछ देर गुस्सा जाहिर करने के बाद तीनों कैमरे के सामने अपनी बात रखने को राजी हुए। जानिए जिन्हें गिरफ्तार किया गया…उनके परिजनों ने क्या कहा? रोमी की मां बोलीं- बेटा ठग नहीं, मिल में काम करता है रोमी की मां सियादेवी का कहना है कि उनका 15 साल का बेटा अहमदाबाद में कपड़ा मिल में नौकरी करता है। एक महीने पहले वह गेहूं काटने के लिए गांव आया था। मंगलवार (6 अप्रैल) को शौच के लिए गया था। तभी पुलिस ने उसे पकड़कर जेल भेज दिया। हमारा बेटा साइबर ठग नहीं है। ‘पुलिस से पूछते रहे नाती को कहां ले जा रहे हो’ इसी गांव के शैलेंद्र को भी पुलिस ने पकड़ा है। शैलेंद्र की नानी शांति का कहना है कि ‘हमारा नाती शैलेंद्र किसानी का काम करता है। वह शौच के लिए गया था। तभी पुलिस ने उसको पकड़ा है। मेरे घर में कुछ भी नहीं है। हम पुलिस से पूछते रहे कि हमारे नाती को कहां ले जा रहे हो, किसी ने कुछ नहीं बताया।’ ‘हार्वेस्टर पता करने गया था… पुलिस ने जेल भेज दिया’ रठिगांव से सात किमी दूर हमारी मुलाकात मखौली निवासी इंद्रजीत से हुई। इंद्रजीत का कहना है कि ‘भाई शिवकांत इलाहाबाद में लेबरी करता है। बीते सात दिन पहले वह छुट्टी लेकर आया था। हमारी चचेरी बहन कौशल्या रठिगांव में रहती हैं। इनके यहां गेहूं कटवाने के लिए वह दोस्त ज्ञान प्रकाश के साथ हार्वेस्टर पता करने गया था। पुलिस ज्ञान प्रकाश के साथ शिवकांत को भी पकड़कर ले गई।’ जानिए जहां बना रखा था ठगी का अड्डा खाना बनाने का इंतजाम, डिस्पोजल मिले रठिगांव के बाद हम उस स्थान पर पहुंचे जहां से साइबर ठग कॉल करके घटना को अंजाम देते थे। दूसरे शब्दों में कहें तो साइबर ठगों ने अपना वर्कप्लेस बनाया था। मौके पर थाना रेउना एसओ अनुज कुमार फोर्स के साथ छानबीन कर रहे थे। गिरफ्तारी वाले स्थान पर घने पेड़ थे। इसके अलावा तीन झोपड़ियां भी थीं। एक झोपड़ी के अंदर चूल्हा भी था। आसपास सैकड़ों की संख्या में डिस्पोजल प्लेट्स व गिलास पड़े थे। ये पुलिस की रडार पर आए सातों गांवों का केंद्र है। यह स्थान कानपुर देहात जिले की सीमा (मूसा नगर) से महज एक किलोमीटर दूर है। ‘50 से ज्यादा लड़के आते थे’ मौके पर मौजूद एक किसान ने बताया कि सालों से यहां पर सुबह के समय से लड़कों का आना-जाना शुरू हो जाता था। दिन भर वह यहीं पर रुकते थे और खाना वगैरह बनाते खाते थे। वह लोग लगातार फोन पर बात करते रहते थे। उनके हाथों में कुछ कागज होते थे, जिनमें नंबर लिखे होते थे। सुबह से शाम तक करीब 50 से ज्यादा लड़कों का रोजाना आना-जाना होता था। पुलिस की रेड के बाद समाचारों से पता चला कि ये लोग साइबर ठग थे। सड़क से निकलने वालों को नहीं लगती थी भनक साइबर ठगों ने अपना वर्क प्लेस ऐसे स्थान को बनाया जो कि घने पेड़ों के बीच है। सड़क से महज चंद कदमों की दूरी पर होने के बावजूद, यहां बैठे लोगों की सड़क से निकलने वालों को भनक नहीं लगती थी। जबकि यहां बैठे लोग बाहर नजर रख सकते थे। किसी के आने की आहट मिलते ही ये लोग गांव के रास्ते निकल जाते थे। स्थिति ज्यादा बिगड़ने पर वह महज मिनटों में कानपुर की सीमा पार करते हुए कानपुर देहात जिले की सीमा में चले जाते थे। ठगी करने वाले 100 से ज्यादा नंबर अभी भी सक्रिय पुलिस ने जिस क्षेत्र में छापेमारी करके 20 साइबर ठगों को अरेस्ट किया है। वहां अभी भी साइबर ठग एक्टिव हैं। पुलिस ने 10 अप्रैल को मौके पर अपने साइबर सिस्टम से चेक किया तो पता चला कि साइबर ठगों के 100 से ज्यादा नंबर अभी भी एक्टिव हैं। फिलहाल पुलिस अभी 17 फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है। ऐसे अपने जाल में फंसाते थे साइबर ठग पुलिस जांच में सामने आया है कि ठगी का यह गैंग बीते करीब पांच साल से सक्रिय है। बाग में चार से पांच लोगों की अलग-अलग टीमें बनाकर बैठते थे। फोन कर आवास योजना व अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ देने का लालच देते थे। किसी व्यक्ति के जाल में फंसते ही अपने से बड़ा अधिकारी बताकर कॉल टीम के सीनियर मेंबर को ट्रांसफर कर दी जाती थी। जांच में सामने आया है कि यह लोग रोजाना 100 के करीब लोगों को कॉल करते थे। सुबह से शाम तक ठगी गई रकम को टीम के सभी मेंबर आपस में बांट लेते थे। नौकरी तो सिर्फ दिखावे के लिए…काम ठगी इस गैंग के सदस्यों की खासियत यह है कि अधिकतर शहर से बाहर या गैर राज्यों में मिल आदि में नौकरी करते हैं। जब यह छुट्टी पर आते तो इस काम को अंजाम देते थे। जैसे ही ठगी की कुछ रकम हाथ लगती और पुलिस में शिकायत होती तत्काल वह वापस अपनी मिल आदि में नौकरी के लिए वापस लौट जाते थे। क्षेत्र में भी यही बताते थे कि हम बाहर नौकरी करते हैं। इससे किसी को उन पर शक भी नहीं होता था। अधिकतम पढ़ाई 10वीं पास गैंग में पकड़े गए सभी आरोपियों की क्वालीफिकेशन कुछ खास नहीं है। इनमें कुछ लोग 10वीं पास हैं। इसके अलावा अन्य आरोपियों ने महज 5वीं या 8वीं तक की पढ़ाई की है। कम समय में पैसा कमाने की लत इनको साइबर ठगी की ओर ले आई। ———
यह खबर भी पढ़ें…
कानपुर में 20 साइबर ठगों को दौड़ाकर पकड़ा:एक और ‘मिनी जामताड़ा’ का भंडाफोड़; 17 गाड़ियों से 70 पुलिसवाले पहुंचे यूपी में एक और ‘मिनी जामताड़ा’ का भंडाफोड़ हुआ है। कानपुर पुलिस 17 गाड़ियों के साथ फिल्मी स्टाइल में पहुंची। ड्रोन से रेकी करते हुए पूरे इलाके को चारों ओर से घेर लिया। फिर खेतों में बनीं झोपड़ियों में से 20 साइबर ठगों को अरेस्ट किया। इनसे ही ये लोग ठगी का धंधा चलाते थे। पुलिस के अनुसार, साइबर ठग देशभर में लोगों को कभी पुलिस अधिकारी बनकर तो कभी आवास योजना या बैंक लोन के नाम पर झांसा देते थे। पूरी खबर पढ़ें
कानपुर के साइबर ठगों ने जंगल में बनाया ऑफिस:छुट्टी में आते और क्राइम कर लौट जाते थे, ‘मिनी जामताड़ा’ की कहानी
