हिसार के बहूचर्चित रेलूराम पूनिया हत्याकांड मामले में उम्रकैद की सजा पाने वाली बेटी सोनिया ने अब खुद को असली पीड़ित बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में नई दलील दी है। 23 साल जेल में बंद रहने के बाद जमानत पर रिहा चल रही सोनिया ने हलफनामे में कहा कि वारदात के समय उसके शरीर में बी वही जहर था, जिससे बाकी परिवार की मौत हुई। सोनिया ने यह भी दावा किया कि उसे जानबूझकर इस केस में फंसाया गया, ताकि उसकी पैतृक संपत्ति पर कब्जा किया जा सके। जेल में लंबे समय से बंद सोनिया ने अपने सुधार का हवाला देते हुए बताया कि उसने ब्यूटी पार्लर और सिलाई-कढ़ाई जैसे कोर्स किए हैं। इतना ही नहीं, वह जेल के अंदर रेडियो जॉकी भी बन चुकी हैं। उसे 2021 में तिनका-तिनका बंदिनी अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। बता दें कि रेलूराम पूनिया फैमिली हत्याकांड को हरियाणा के सबसे क्रूर मामलों में गिना जाता है। 23 अगस्त 2001 की रात हिसार के लितानी गांव स्थित फार्महाउस में एक साथ 8 लोगों की हत्या की गई थी। पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया, उनकी पत्नी, बेटा, बहू, पोता, पोती और एक अन्य बच्चे को लोहे की रॉड से मारा गया था। देश भर में केवल दो महिलाओं को अवॉर्ड
बता दें कि 2021 में तिनका-तिनका प्रिजन रिसर्च सेल की स्थापना हुई। इसका उद्घाटन तब के जेल महानिदेशक के सेल्वराज (आईपीएस) ने किया था। हरियाणा की जेलों से जिन दो महिलाओं को इस सेल से जोड़ा गया, उनमें सोनिया भी थी। उसी साल दिसंबर में जेल में सोनिया को उसके योगदान के लिए तिनका तिनका बंदिनी अवार्ड दिया गया। यह 2021 में भारत भर से केवल दो महिलाओं को दिया गया था। सोनिया द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे की 4 बड़ी बातें… अब सिलसिलेवार पढ़िए क्या है पूरा मामला… सोनिया ने कहा था- ये मुझे प्रॉपर्टी नहीं देना चाहते थे पुलिस पूछताछ में सोनिया ने बताया था कि हां, मैंने ही आठों को मारा है। ये लोग मुझसे और मेरे पति से नफरत करते थे। मुझे प्रॉपर्टी नहीं देना चाहते थे। उस रात सभी को मारने के बाद मैं खुद को भी खत्म करना चाहती थी। काश! मर गई होती। उसने कहा था कि मां-पापा के बीच अक्सर लड़ाई होती थी। बात मारपीट तक पहुंच जाती थी। झगड़े की जड़ थी, जमीन-जायदाद, संपत्ति। पापा जब नशे में होते थे तो बोलते थे कि उनके भाई राम सिंह की पत्नी के साथ उनका अवैध संबंध है। चचेरी बहन रोजी भी मेरे पिता की बेटी है। मां के भी राम चंद्र दाहिया नाम के एक शख्स के साथ अवैध संबंध था। दाहिया की वजह से मां ने एक बार मुझ पर गोली भी चला दी थी, लेकिन मैं बच गई। सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत रेलूराम पूनिया हत्याकांड में दोषी बेटी सोनिया और उसके पति संजीव कुमार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 11 दिसंबर 2025 को अंतरिम जमानत दी थी। वे 2001 से जेल में थे और उनकी समय पूर्व रिहाई याचिका पर सरकार के फैसले के खिलाफ कोर्ट ने यह राहत दी थी। उन्हें करनाल जेल से 16 दिसंबर 2025 को रिहा किया गया। सुप्रीम कोर्ट में 7 अप्रैल 2026 को हुई सुनवाई के बाद फिलहाल हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, जिसमें सोनिया की समय-पूर्व रिहाई पर विचार करने को कहा गया था। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनने के बाद मामले को आगे की सुनवाई के लिए लंबित रखा। सोनिया को 2001 में अपने परिवार के सदस्यों की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। वह 23 साल से अधिक की वास्तविक सजा काट चुकी है। हरियाणा सरकार ने उसकी रिहाई की अर्जी यह कहकर खारिज कर दी थी कि उसे ‘आखरी सांस’ तक जेल में रहना चाहिए, जिसे हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया था। अब यह मामला देश की सबसे बड़ी अदालत में है।
रेलूराम हत्याकांडः 23 साल जेल में रहकर RJ बनी सोनिया:पूर्व MLA की बेटी का SC में हलफनामा, बोली-मैं हत्यारी नहीं, मुझे भी जहर दिया था
