सड़क मरम्मत को नहीं मिला फंड, सिटी बस खरीद की भी मंजूरी नहीं

सड़क मरम्मत को नहीं मिला फंड, सिटी बस खरीद की भी मंजूरी नहीं

राजधानी रांची की सड़कों और चौक-चौराहों के सौंदर्यीकरण की एक दर्जन योजनाओं पर काम चल रहा है। नगर विकास विभाग प्रमुख सड़कों को फोर लेन और सिक्स लेन बनाने में जुटा है। लेकिन नगर निगम की सड़कों की हालत काफी खस्ता है। लगातार हो रही बारिश से सड़कों की स्थिति ऐसी हो गई है कि दो पहिया वाहन से चलना मुश्किल हो गया है। क्योंकि, गड्ढे इतने हैं कि कहां दुर्घटना हो जाए, कोई नहीं जानता। दूसरी ओर पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। शहर में मात्र दो रूट पर 24 सिटी बसें चल रही हैं। इससे हजारों लोगों लिए ऑटो ही सफर का एक मात्र सहारा है। आम लोगों से जुड़ी इन योजनाओं पर नगर विकास विभाग कुंडली मारकर बैठा है। नगर निगम ने शहर की सड़कों की मरम्मत के लिए नगर विकास विभाग को पत्र लिख कर फंड देने की मांग की थी, लेकिन अभी तक फंड नहीं मिला। दूसरी ओर, शहर में 244 सिटी बसें चलाने के लिए एजेंसी का चयन करने से संबंधित टेंडर की फाइल भी विभाग को भेजी गई, पर अब तक उस पर तकनीकी स्वीकृति नहीं मिली। सिटी बस के टेंडर का वैल्यूएशन जल्द, रोड के लिए फंड भी जारी होगा निगम की सड़कों पर हर ओर गड्ढे, हाईकोर्ट का आदेश भी नाकाफी नगर निगम के आकलन के मुताबिक, शहर के 53 वार्ड में 150 किमी. से लंबी सड़कें पूरी तरह या आंशिक रूप से जर्जर हैं। सड़कों की खस्ता हालत पर हाईकोर्ट में अधिवक्ता शुभम कटारुका ने जनहित याचिका दाखिल की है। हाईकोर्ट ने निगम प्रशासक से जवाब मांगा था। निगम की आेर से अदालत को बताया गया कि सड़कों की मरम्मत का प्रस्ताव बनाकर नगर विकास विभाग को भेजा गया है, लेकिन फंड नहीं मिला है। क्यों ऐसी स्थिति… लालजी हिरजी रोड, विष्णु टॉकीज लेन, कार्ट सराय अपर बाजार से जेजे रोड, गाड़ीखाना-इरगू रोड होते हुए मधुकम रोड, गैलेक्सिया मॉल से मधुकम तालाब रोड आैर सांई विहार कॉलोनी रोड में अलकतरा की परत पूरी तरह गायब हो गई है। अपर बाजार के जेजे रोड पर ऐसे बड़े-बड़े गड्ढे। असर… तुपुदाना रूट में काफी यात्री मिलते हैं। इसलिए अधिक कमाई के चक्कर में अॉपरेटर ग्रामीण क्षेत्र में बसें चला रहे हैं। मेन रोड में यात्रियों की जरूरत के मुकाबले बसें काफी कम हैं। ऐसे में मेन रोड में अधिकतर लोग अपने वाहनों से ही सफर करते हैं। इस वजह से जाम की स्थिति बनी रहती है। कचहरी से कांटाटोली होते हुए नामकुम, हरमू से धुर्वा रूट में सिटी बसें नहीं हैं। इस वजह से शहर में अवैध अॉटो आैर टोटो की बाढ़ आ गई है। असर… जगह-जगह गड्ढे होने से जर्जर सड़क पर रोज दुर्घटना हो रही है। अपर बाजार से गाड़ीखाना आैर मधुकम रोड में दो पहिया वाहन सवार रोज गिर रहे हैं। इरगूटोली के सचिन कुमार ने बताया कि एक माह में छह-सात लोगों के हाथ-पैर टूट चुके हैं। क्यों ऐसी स्थिति… नगर निगम ने सिटी बसें चलाने के लिए एजेंसी चयन की प्रक्रिया 2022 में शुरू की थी। एजेंसी को नगर निगम प्रति किमी की दर से किराए का भुगतान करेगा। दो साल में दस बार टेंडर हुआ, लेकिन एक भी कंपनी आगे नहीं आई। छह माह पहले हुए टेंडर में दो कंपनियां आगे आईं। निगम ने टे​िक्नकल वैल्यूएशन कर प्रस्ताव नगर विकास विभाग को भेज दिया, लेकिन तीन माह से फाइल वहीं पड़ी हुई है। रांची में 15 वर्ष पहले 70 सिटी राइड बसें खरीदी गई थीं। इनमें से तीन बसें जल गईं। शेष बसें समय के साथ कंडम होती चली गईं। पिछले माह तक करीब 20 बसें चल रही थीं। लेकिन 15 वर्षों की मियाद समाप्त होने के बाद सभी बसों को खादगढ़ा बस स्टैंड के बाहर खड़ा कर दिया गया है। वर्ष 2016 में निगम ने 26 सिटी बसों की खरीदारी की थी। इनमें से अब 23 बसें मेन रोड आैर रातू रोड, तुपुदाना रूट पर चल रही हैं।

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