‘जमीन के लिए पति ने जान दी, जुर्माना नहीं देंगे’:वाराणसी में सुसाइड करने वाले वशिष्ठ नारायण की पत्नी बोलीं- सरकार चाहें तो हमें मार डाले

‘जमीन के लिए पति ने जान दी, जुर्माना नहीं देंगे’:वाराणसी में सुसाइड करने वाले वशिष्ठ नारायण की पत्नी बोलीं- सरकार चाहें तो हमें मार डाले

वाराणसी की राजातालाब तहसील में 22 अगस्त को वशिष्ठ नारायण गोंड (68) ने खुद को आग लगा ली थी। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। वह मिर्जा मुराद थाना के जोगापुर गांव के रहने वाले रामाधार के बेटे थे। रामाधार की पहले ही मौत हो चुकी है। वशिष्ठ नारायण दो भाइयों में सबसे छोटे थे। उनके गांव में जलजीवन मिशन के तहत पानी की टंकी बनी थी। उसके सामने ग्रामसभा की तीन बिस्वा परती जमीन थी। वहीं पर उन्होंने दो झोपड़ी डाली थी। एक में गुमटी रखकर टॉफी-बिस्कुट बेचते थे। वहां से उन्हें हटाने का आदेश जारी किया गया था। उनके ऊपर तहसील कोर्ट से 4 लाख 32 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था। जिसे उन्हें भरना था। इससे आहत होकर उन्होंने ये कदम उठाया था। वशिष्ठ के तीनों बेटे अनिल, श्याम सुन्दर और एक अन्य मजदूरी करके पेट पालते हैं। दुकान से मां अपना खर्च निकालती है। ऐसे में अब वशिष्ठ की मौत के बाद जुर्माने का बोझ और बेदखल होने का डर परिजनों को सता रहा है। ग्राम प्रधान चंद्रभान ने इस पूरे विवाद के बारे में बताया। ऐसे में दैनिक भास्कर ने वाराणसी के जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर जोगापुर गांव पहुंचकर वशिष्ठ की पत्नी और उनके बेटे से बात की और प्रकरण और आगे के रुख के बारे में जाने। पढ़िए रिपोर्ट… सबसे पहले वशिष्ठ नारायण के बेटे अनिल ने क्या कुछ कहा, उसके बारे में पढ़वाते हैं बेटा बोला- लोग केवल आ रहे हैं, मामले के हल की बात नहीं कोई कर रहा
जोगापुर से 300 मीटर दूर जल जीवन मिशन की टंकी और पंचायत का नया भवन बना है। इसकी जो सड़क मुख्य मार्ग तक आ रही है। उसी के कार्नर से सटी तीन बिस्सा जमीन पर एक झोपड़ी है। जिसके नीचे एक गुमटी भी है। जिसमें टॉफी-बिस्किट की दुकान है। यहीं वशिष्ठ नारायण दुकान चलाते थे। इसी मड़ई में उनके बेटे अनिल कुमार गौंड़ बैठे हुए मिले। हमने उन्हें परिचय दिया तो बोले- सब लोग तो बस आ रहे हैं। कोई मामले के हल की बात नहीं कर रहा है। साल 2012 से मुकदमा चल रहा है
अनिल ने बताया – पिता जी यहां 2006 से रह रहे थे। साल 2012 में उन्हें हटाया गया। मुकदमा हुआ और तभी से ही वो मुकदमा लड़ रहे थे। जून के महीने में उनके ऊपर जुर्माना लगाया गया। 4 लाख 32 हजार रुपए का; हम लोग भूमिहीन है और इसपर कब्जा था। हमारे लिए कोर्ट से बेदखली का कागज बनाया गया। जबकि यहां 50 बीघे से ज्यादा जमीन सरकार की है। इसी सब से तंग आकर उन्होंने तहसील में खुद को आग लगा ली। 3 बिस्वा जमीन की मांग थी
हमारे पिता ने 3 बिस्वा जमीन की मांग की थी पर मुकदमे में फैसला करते हुए उन्हें बेदखल किया गया। उन पर जुर्माना भी लगाया गया। हमारी सरकार से यही मांग हम भूमिहीन हैं। हमें यह जमीन दे दी जाए।
जब अनिल से जुर्माना भरने की बात पूछी गई तो वो नाराज हो गए। बोले- हमारे पिता जी का निधन हो गया। अभी सब लोग ये सोच रहे हैं कि जुर्माना कैसे भरेंगे। कोई हमारा हाल तक नहीं लेने आया है। अगर मैं अंतिम संस्कार में शामिल न हुआ होता तो एसडीएम साहब के पास पहुंचता और उनसे अपना हक मांगता। लाश भी नहीं लाने दिया घर
अनिल ने कहा – हम लोग पिता की मौत के बाद विनती करते रहे गए पर अधिकारियों ने लाश को घर नहीं लाने दिया। पोस्टमॉर्टम के बाद उनकी लाश को सीधे मणिकर्णिका घाट ले जाया गया। हमारी मां ने तो अंतिम समय पिता जी के दर्शन भी नहीं किए। अब जानिए वशिष्ठ की पत्नी गीता का क्या कहना है
वशिष्ठ नारायण गौंड़ की पत्नी गीता ने कहा- हमारे पति इतने दिन लड़े पर कोई हल नहीं निकला। हमारे ऊपर 4 लाख 32 हजार का जुर्माना भी लग गया। हमारे आदमी अपने से अपनी हत्या कर लिए। इतने दिन से वह तहसील जा रहे थे, कभी ऐसा नहीं हुआ। उस दिन ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने खुद को आग लगा ली। सबको मिले नोटिस, लगे जुर्माना
गीता ने कहा – पूरे गांव की जमीन का मुआयना होना चाहिए। आखिर किसकी-किसकी जमीन सरकारी है। सिर्फ हमारी जमीन पर ही क्यों सबकी नजर है। हमारा पति इतना परेशान हो गया कि उसने अपनी जान दे दी। हम चाहते हैं सबकी जांच हो। सबकी जमीन की नापी हो। सबपर जुर्माना लगे। हम लोग यहां 25 साल से रह रहे हैं। लेकिन ऐसा क्यों हुआ। अब नहीं भरेंगे जुर्माना
गीता से जब जुर्माने के लिए पूछा गया तो वो गुस्सा हो गई। बोलीं- हमारा राज ही उलट गया। हमारे पति हमें और बच्चों को भिखारी बनाकर चले गए। अब हम जुर्माना भी भरें। अब हम नहीं भरेंगे जुर्माना। हम लोगों को सरकार अब पूरे परिवार को भी मार डाले। हमारे आदमी को तो मार ही दिया है। आएं तहसीलदार जुर्माना लेने देंगे उन्हें जुर्माना। अब जानिए क्या इन्हें सरकारी सुविधाएं मिलती हैं, प्रधान ने क्या बताया और मृतक की पत्नी ने क्या कहा प्रधान कहते हैं अपनी प्रधानी में कुछ नहीं देंगे
गीता से जब पूछा गया कि क्या सरकारी सुविधाएं मिलती हैं तो उन्होंने बताया – वृद्धा पेंशन, अंत्योदय कार्ड, आयुष्मान कार्ड और पीएम किसान सम्मान निधि हमें मिलती है। लेकिन इंदिरा आवास और शौचालय हमें नहीं मिला है। प्रधान से जब हमने कहा तो उसने दो टूक कहा कि अपनी प्रधानी में हम तुम्हे कुछ नहीं देंगे। प्रधान बोले- सबकुछ दिया गया है
इस संबंध में जोगापुर के ग्राम प्रधान चंद्रभान ने बताया – तहसील से हमसे रिकार्ड मांगा गया था। जो हमने तहसील में जमा करवा दिया गया है। वशिष्ठ नारायण को सभी सरकारी सुविधाएं दी गई हैं। वृद्धा पेंशन, अंत्योदय कार्ड, आयुष्मान कार्ड और पीएम किसान सम्मान निधि के अलावा इंदिरा आवास योजना के तहत दो कमरों के आवास के साथ शौचालय भी दिया गया है। आवास और शौचालय गांव के नर उनके पैतृक निवास पर है। नहीं लगा था कोई बोर्ड, शौचालय भी नहीं
प्रधान के बताने पर हम गांव के अंदर पहुंचे तो वशिष्ठ का मकान मिला जिसपर उसका दूसरे नंबर का बेटा श्याम सुन्दर गाय का चारा लेकर जा रहा था। हमने पूछा तो उसने बताया- हां ये पिता जी का मकान है लेकिन की वर्ष पुराना है। कैसे बना है ये हमें नहीं पता है। वहीं मकान पर कहीं भी इंदिरा आवास का बोर्ड नहीं। जब शौचालय के बारे में पूछा तो श्याम ने बताया – बहुत पहले बना था और दो साल पहले से ही टूटकर खत्म हो चुका है। दोबारा नहीं मिला। पूछा गया तो उन्होंने कहा आवास पर नहीं लिखवाया होगा उन्होंने क्योंकि काफी पुराना है। ———————– ये खबर भी पढ़ें… वाराणसी में तहसील में आग लगाने वाले बुजुर्ग की मौत:जमीन का केस हार गया था, कमंडल में भरकर लाया था पेट्रोल
वाराणसी में जमीन का केस हारने के बाद खुद को आग लगाने वाले बुजुर्ग की शुक्रवार देर रात इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई है। बुजुर्ग का बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में इलाज चल रहा था। प्रशासन की ओर से मृतक के तीनों बेटों को सूचना दी गई है। वशिष्ठ नारायण गौड़ का शव पोस्टमॉर्टम हाउस शिवपुर भेजा गया है। पढ़ें पूरी खबर…

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