नीदरलैंड में काम के दौरान सोनीपत के युवक की मौत:कर्ज लेकर टूरिस्ट वीजा पर गया था विदेश; शव भारत लाने की लगाई गुहार

Spread the love

सोनीपत का एक युवक विदेश में काम के दौरान हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गया और कई दिनों तक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझने के बाद आखिरकार उसने दम तोड़ दिया। परिवार ने बेटे को कर्ज लेकर विदेश भेजा था। अब हालात ऐसे हैं कि उसका पार्थिव शरीर भी विदेश में ही फंसा हुआ है और परिवार आर्थिक तंगी के चलते उसे भारत नहीं ला पा रहा। परिजन लगातार सरकार और प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं कि उनके बेटे का शव वतन लाने में मदद की जाए, ताकि वे अंतिम बार उसका चेहरा देख सके और अपने हाथों से अंतिम संस्कार कर सके। दो साल पहले टूरिस्ट वीजा पर गया था विदेश सोनीपत के गांव मोई माजरी के रहने वाले कमल राणा ने बताया कि उसका 23 साल का बड़ा भाई सागर राणा 24 नवंबर 2024 को टूरिस्ट वीजा पर भारत से फ्रांस गया था। वहां वह पेरिस में रहकर अपने लिए बेहतर अवसर तलाश रहा था। परिवार को उम्मीद थी कि वह विदेश में कुछ कर दिखाएगा और घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा।
नीदरलैंड में लंबे समय तक नहीं मिला काम परिजनों के अनुसार, फ्रांस जाने के बाद सागर जनवरी 2026 में नीदरलैंड पहुंचा था। वहां करीब दो महीने तक उसे कोई काम नहीं मिला और वह लगातार रोजगार की तलाश में इधर-उधर भटकता रहा। काफी संघर्ष के बाद करीब 15 दिन पहले ही उसे एक व्यक्ति के घर पर पेड़ काटने का काम मिला था। वह पूरी मेहनत और लगन के साथ काम कर रहा था ताकि अपने परिवार की जिम्मेदारियों को निभा सके। बताया जा रहा है कि 20 और 21 मार्च को छुट्टी के दौरान एक स्थानीय घर मालिक ने सागर को पेड़ काटने का काम दिया। आरोप है कि इस दौरान उसे कोई भी सुरक्षा उपकरण नहीं दिए गए और न ही जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया। पेड़ गिरने से हुआ दर्दनाक हादसा पेड़ काटते समय अचानक पेड़ उसकी ओर गिरने लगा। उस समय सागर सीढ़ी पर खड़ा था। पेड़ गिरते वक्त सीढ़ी उसमें उलझ गई, जिससे वह संतुलन खो बैठा और पीछे की ओर जमीन पर गिर पड़ा। गिरने के दौरान उसके सिर में गंभीर चोट आई और नाक व कान से खून बहने लगा। चार दिन तक चलता रहा इलाज हादसे के तुरंत बाद उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां वह चार दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जूझता रहा, लेकिन 25 मार्च को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस खबर के बाद परिवार में मातम छा गया। आर्थिक तंगी ने विदेश जाने को किया मजबूर कमल राणा ने बताया कि उनके परिवार के हालात लंबे समय से ठीक नहीं थे। परिवार के पास केवल एक बीघा जमीन है और आय का कोई स्थायी साधन नहीं है। ऐसे में सागर ने विदेश जाकर मेहनत करने और परिवार का कर्ज उतारने के साथ-साथ अपना खुद का मकान बनाने का सपना देखा था। शिक्षा पूरी कर विदेश गया था सागर कमल राणा ने बताया कि उसके भाई सागर राणा ने अपनी 12वीं की पढ़ाई कसांडी गांव से पूरी की थी। वह भी 12वीं पास करके सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा है। गांव में अपना मकान जर्जर हालात में है और इसलिए वे गांव में अपने काका के मकान में किराए पर रह रहे हैं। सागर के पिता किराए की इक्को गाड़ी चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, जिससे घर का खर्च किसी तरह चलता है। कर्ज लेकर भेजा था विदेश परिजनों ने बताया कि सागर को विदेश भेजने के लिए परिवार ने करीब 20 से 25 लाख रुपए तक का कर्ज लिया था। उम्मीद थी कि सागर विदेश में कमाकर इस कर्ज को उतार देगा और परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बना देगा। कमल राणा ने बताया कि सागर रोजाना अपनी मां और परिवार के अन्य सदस्यों से बात करता था। लेकिन 20 मार्च को उसका फोन नहीं आया। परिवार ने उसे मैसेज भी किए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। शुरुआत में उन्होंने सोचा कि शायद उसका मोबाइल खराब हो गया होगा। मामा के फोन से मिली हादसे की जानकारी बाद में सागर के मामा के पास फोन आया, जिससे पता चला कि वह नीदरलैंड के एक अस्पताल में भर्ती है। यह खबर सुनते ही परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। 23 वर्षीय सागर अपने परिवार की गरीबी दूर करना चाहता था। वह कर्ज उतारकर नया मकान बनाने का सपना संजोए हुए था। माता-पिता को भी उम्मीद थी कि बेटा विदेश से कमाकर लौटेगा और घर की स्थिति सुधरेगी। लेकिन दुर्भाग्यवश, वह ना तो परिवार का कर्ज उतार सका और ना ही अपने सपनों को पूरा कर पाया। परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ सागर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए विदेश गया था, लेकिन उसकी असमय मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे इलाके में शोक का माहौल बना हुआ है। विदेश में फंसा पार्थिव शरीर, सरकार से मदद की गुहार वर्तमान में सागर का पार्थिव शरीर नीदरलैंड में ही है। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है, जिसके कारण वे खुद शव को भारत नहीं ला पा रहे हैं। परिजन लगातार सरकार और प्रशासन से मदद की अपील कर रहे हैं, ताकि सागर का अंतिम संस्कार उसके अपने देश और अपने लोगों के बीच हो सके और परिवार आखिरी बार अपने बेटे को देख सके।