हरियाणा श्रम विभाग 1500 करोड़ वर्क स्लिप घोटाला:जांच कमेटी की बैठक आज, रिपोर्ट पर मंथन; 6 लाख में से 53 हजार मिली सही

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हरियाणा के श्रम विभाग में सामने आए कथित 1500 करोड़ रुपए के ‘वर्क स्लिप’ घोटाले को लेकर आज अहम दिन है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच के लिए गठित कमेटी की महत्त्वपूर्ण बैठक में प्रारंभिक रिपोर्ट पर मंथन होगा और जिम्मेदारी तय करने की दिशा में बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। जांच में सामने आए शुरुआती आंकड़े बेहद चौकाने वाले हैं। 13 जिलों में जांची गई 5 लाख 99 हजार से अधिक वर्क स्लिप में से केवल लगभग 53 हजार ही सही पाई गई, जबकि 90 प्रतिशत से ज्यादा फर्जी निकली। इसी तरह 2 लाख 21 हजार से अधिक पंजीकृत श्रमिकों में से महज 14 हजार के आसपास ही वास्तविक पाए गए। इन आंकड़ों ने पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कमेटी में दो आईएएस, एक आईपीएस घोटाले का खुलासा अनिल विज के निर्देश पर हुई जांच में हुआ, जिसके बाद नायब सिंह सैनी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय जांच कमेटी का गठन किया। कमेटी में आईएएस राजीव रतन और आईपीएस पंकज नैन को भी शामिल किया गया है, जिन्हें सभी 22 जिलों में जांच कर रिपोर्ट सौंपने का जिम्मा दिया गया। हर एंगल से कमेटी कर रही जांच मुख्यमंत्री की ओर से गठित जांच कमेटी पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और विभिन्न अधिकारियों तथा अन्य लोगों द्वारा की गई अनियमितताओं का कागजी अध्ययन किया जा रहा है। इसके अलावा कमेटी विभाग को सुधारात्मक या निवारक उपायों की भी सिफारिश करेगी, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटना न हो। यह समिति सभी तथ्यों की जांच कर एक माह में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। बताया गया कि विभागों की लगातार हो रही मीटिंगों के कारण कमेटी में शामिल अधिकारी इस जांच को लेकर समय नहीं दे पाए। अफसरों का कहना है कि पिछले महीने बजट सत्र चल रहा था जिसके कारण जांच कमेटी एक भी मीटिंग नहीं बुला पाई थी। डीसी से मांगी गई रिपोर्ट श्रम मंत्री अनिल विज के श्रम विभाग में वर्क स्लिप घोटाले का दायरा काफी बड़ा है। कई जिलों की इस घोटाले में संलिप्तता है। श्रम मंत्री द्वारा पहले चरण में प्रदेश के 13 जिलों में इसकी जांच कराई गई है। इसके बाद सी.एम. सैनी ने 9 और जिलों से भी रिपोर्ट मांगी है। ऐसे में कमेटी को पूरे प्रदेश से जांच शुरू करने से पहले इनपुट मंगवाना जरूरी है। कमेटी की ओर से जांच के लिए तैयार की गई रूपरेखा में सभी प्रभावित जिलों के डीसी से नई रिपोर्ट मांगी गई है। विज ने खुद किया घोटाले का खुलासा वर्क स्लिपों में गड़बड़ी सामने आने के बाद श्रम मंत्री अनिल विज ने खुद इस घोटाले का खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि शुरू में हिसार, कैथल, जींद, सिरसा, फरीदाबाद और भिवानी जिलों में जांच की गई, जहां बहुत सारी गड़बडिय़ां मिली। इसके बाद राज्य के सभी जिलों के डीसी को कहा गया कि वे जिला स्तर पर समितियां बनाए। इन समितियों में श्रम विभाग के अधिकारी और 3 अन्य अधिकारी शामिल थे। अब तक 13 जिलों की जांच पूरी ये समितियां अगस्त 2023 से मार्च 2025 के बीच जारी की गई ऑनलाइन वर्क स्लिप (काम करने का प्रमाण) की जांच कर रही हैं। यह जांच लगभग 4 महीने पहले शुरू हुई थी और अब तक 13 जिलों में 100 फीसदी जांच पूरी हो चुकी है। इन 13 जिलों में कुल 5 लाख 99 हजार 758 वर्क स्लिप जारी की गई थी, जिनमें से सिर्फ 53,249 ही सही पाई गईं। बाकी 5 लाख 46 हजार 509 वर्क स्लिप गलत निकली। सिर्फ 14,240 मजदूरों के नाम सही इसी तरह, कुल 2 लाख 21 हजार 517 मजदूरों के नाम दर्ज थे, लेकिन जांच के बाद सिर्फ 14,240 ही सही पाए गए, जबकि 1 लाख 93 हजार 756 मजदूरों के नाम फर्जी निकले। इसका मतलब है कि बहुत बड़ी संख्या में गलत वर्क स्लिप और फर्जी मजदूरों के नाम दर्ज किए गए थे। जांच में यह साफ हो गया है कि कई जगहों पर पूरे के पूरे गांव के लोगों ने फर्जी तरीके से रजिस्ट्रेशन करवाया और वर्क स्लिप बनवाई, ताकि जो लोग योजनाओं के हकदार नहीं हैं, वे भी सरकारी योजनाओं का फायदा उठा सके।