हरियाणा कांग्रेस विधायक दल की बैठक:क्रास वोटिंग वाले 5 विधायकों को न्योता नहीं; विधायक बोले- वोट रद्द करने वालों के नाम भी सार्वजनिक हों

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हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के पांच विधायकों के द्वारा क्रास वोटिंग के बाद मची उथल पथल को शांत करने के लिए आज नई दिल्ली में कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। हरियाणा भवन में होने वाली इस विधायक दल की बैठक की अध्यक्षता नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा करेंगे। इस बैठक में पार्टी प्रभारी बीके हरिप्रसाद और प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र भी पहुंचेंगे। इस बैठक की सबसे अहम बात यह है कि इसमें क्रास वोटिंग करने वाले पांचों विधायकों को नहीं बुलाया गया है। इस बैठक से पहले ही इन पांचों विधायकों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर विधायक दो गुटों में बंट गए हैं। एक गुट ये चाहता है कि पार्टी लाइन के खिलाफ क्रास वोटिंग करने वाले विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और दूसरा गुट ये चाहता है कि जिन चार विधायकों के वोट रद्द हुए उनके नाम भी सार्वजनिक किए जाएं। 3 विधायकों ने ही दिया जवाब, दो बागी हरियाणा कांग्रेस की अनुशासन कमेटी ने चुनाव में क्रॉस वोटिंग के आरोप में पांच विधायकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नरायणगढ़ से विधायक शैली चौधरी, साढ़ौरा से रेनू बाला और रतिया से जरनैल सिंह ने नोटिस का जवाब दे दिया है। तीनों ने ही पार्टी लाइन में रहते हुए कर्मवीर बौद्ध को वोट देने की बात कही है। तीनों विधायकों के जवाब से पार्टी संतुष्ट नजर नहीं आ रही है। वहीं, पुन्हाना से विधायक मोहम्मद इलियास और हथीन से विधायक मोहम्मद इसराइल ने कमेटी को जवाब न देकर एक तरह से कांग्रेस से बगावत के संकेत दिए हैं। इस्तीफे की चर्चा और उपचुनाव की आहट

नारायणगढ़ की विधायक शैली चौधरी और पुन्हाना के विधायक मोहम्मद इलियास के इस्तीफे की चर्चाएं तेज हैं। कहा जा रहा है कि ये दोनों विधायक अपनों के लिए ही सीटें छोड़ सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो इन सीटों पर उपचुनाव होंगे, जहां कांग्रेस अपने ही नए चेहरों पर दांव लगा सकती है। दूसरी तरफ भाजपा भी अपना दावा करेगी। चर्चा है कि मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में भाजपा भी अपना पैठ मजबूत करने की दिशा में दांव खेल सकती है।

अनुशासन कमेटी की रिपोर्ट में सख्त रुख अनुशासन कार्यवाही समिति ने अपनी रिपोर्ट 28 मार्च को दिल्ली हाईकमान को भेज दी है। इसमें कमेटी ने साफ कहा है कि दो विधायकों ने नोटिस का जवाब न देकर गंभीर अनुशासनहीनता की है। समिति ने सभी तथ्यों का हवाला देते हुए कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की है, जिससे संकेत मिलते हैं कि पार्टी सख्त कदम उठा सकती है।

निष्कासन के बाद क्या विकल्प अगर पांचों विधायकों को पार्टी से निकाला जाता है तो उनके सामने सीमित विकल्प रह जाएंगे। वे निर्दलीय के रूप में काम जारी रख सकते हैं या किसी अन्य दल में शामिल होने की राह चुन सकते हैं। हालांकि, दल-बदल कानून के चलते उन्हें विधानसभा सदस्यता पर भी खतरा हो सकता है। ऐसे में उनका अगला राजनीतिक कदम बेहद अहम माना जा रहा है।