बरेली में सेटेलाइट बस स्टैंड पर एक खुले नाले में गिरकर युवक की मौत हो गई। 30 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद युवक का शव निकाला जा सका। युवक मंगलवार रात साढ़े 9 बजे नाले में गिरा था। गुरुवार रात 3 बजे उसकी डेडबॉडी निकाली जा सकी। इस दौरान पूरा प्रशासनिक अमला मौके पर मौजूद रहा। मामला बारादरी थाना क्षेत्र का है। अब विस्तार से पढ़िए पूरा मामला
मंगलवार रात सबसे ज्यादा भीड़भाड़ वाले सेटेलाइट बस स्टैंड पर एक खुले नाले में अचानक एक युवक गिर गया। पास मौजूद लोगों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन वह डूब गया। घटना की सूचना मिलते ही नगर निगम के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य, एसीएम सिटी सौरभ दुबे, सीओ सिटी थर्ड पंकज श्रीवास्तव और बारादरी इंस्पेक्टर धनंजय पांडेय मौके पर पहुंचे और युवक की तलाश शुरू करवाई गई। कचरे और पानी के तेज बहाव ने रोका रास्ता
मंगलवार रात करीब 12 बजे रेस्क्यू शुरू किया गया। सबसे पहले जेसीबी से नाले के कचरे को हटाना शुरू हुआ। मंगलवार पूरी रात रेस्क्यू चला, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। करीब 15 फीट गहरे नाले में भारी मात्रा में कचरा और पानी का तेज बहाव होने की वजह से काफी दिक्कतें आईं। बुधवार को दिनभर NDRF, SDRF और नगर निगम के कर्मचारी जुटे रहे। अंत में बस स्टैंड के पास के सभी स्लैब हटाकर कचरा साफ किया गया, तब जाकर रात 3 बजे शव मिला। आधार कार्ड से हुई मृतक की शिनाख्त
युवक की पैंट की जेब से मिले आधार कार्ड से उसकी पहचान हो सकी। मृतक का नाम तौहीद (30) है, जो उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के मोहल्ला कटरा, शाहाबाद देहात का रहने वाला था। पुलिस आधार कार्ड के जरिए उसके परिजनों से संपर्क करने का प्रयास कर रही है। सिस्टम की अनदेखी का आरोप
माना जा रहा है कि तौहीद कहीं जाने के लिए बस अड्डे पर आया था। उसे बस पकड़नी थी, लेकिन इसी दौरान ये हादसा हो गया। नाले की सफाई और शव निकालने के लिए 80 मजदूर, 5 जेसीबी, 3 वाटर सक्शन पंप, 1 क्रेन, 4 ट्रैक्टर-ट्राली और 1 स्लैब काटने वाली पायलिंग मशीन लगाई गई। सुरक्षा और व्यवस्था के लिए 1 सीओ, 2 इंस्पेक्टर, 10 सब-इंस्पेक्टर, 20 सिपाही और 15 ट्रैफिक पुलिसकर्मियों सहित एक इंटरसेप्टर वाहन 30 घंटे तक लगातार डटा रहा। एक साल से खुला था नाला
इस नाले की सफाई मई 2025 में हुई थी, तब सफाई के दौरान स्लैब टूट गया था। इसके बाद जिम्मेदारों ने इसे दोबारा ढकना जरूरी नहीं समझा। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के मुताबिक, उन्होंने नगर निगम को कई पत्र लिखे, लेकिन अधिकारी कुंभकर्णी नींद सोते रहे। बस स्टैंड पर रोजाना करीब 50 हजार यात्री आते हैं और 500 बसें संचालित होती हैं, जिससे यह खुला नाला हमेशा खतरा बना रहता है। जिम्मेदार मानने को तैयार नहीं अपनी गलती
इतने बड़े हादसे और साफ तौर पर दिख रही लापरवाही के बावजूद अधिकारी इसे मानने को तैयार नहीं हैं। नगर निगम के पर्यावरण अभियंता राजीव कुमार राठी का कहना है कि यह सिर्फ एक दुर्घटना है और इसमें विभाग की कोई लापरवाही नहीं है। प्रशासन और नगर निगम से 5 सवाल ……………….
30 घंटे बाद नाले से निकाली गई युवक की लाश:पानी के तेज बहाव के कारण ऑपरेशन में आई दिक्कत, हरदोई से बरेली आया था
