दोहा कतर से भारत लौटेंगे 500 लोग:एयरपोर्ट पर बोर्डिंग पास लेकर फ्लाइट में चढ़े, हरियाणा के 5 युवा शामिल

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रोहतक जिले के गांव मायना के सुरेंद्र उर्फ काला ने बताया कि दोहर कतर पर ईरान की तरफ से किए जा रहे हमले के बीच करीब 500 भारतीय अब वापस लौट रहे है। कतर एयरपोर्ट पर भारतीय पहुंच चुके है, जिन्हें बोर्डिंग पास मिल गया था। सभी फ्लाइट में बैठकर भारत आने के लिए तैयार है। सुरेंद्र उर्फ काला मायना ने बताया कि कतर में काम के लिए गए लोग वापस आने के लिए तैयार है। करीब 60 भारतीय ईरान इजराइल युद्ध में फंसे हुए थे, जो उनके साथ ही काम कर रहे थे। इनमें 5 लोग हरियाणा के रहने वाले है, जबकि करीब 500 भारतीय कतर में थे, जो फ्लाइट में बैठकर वापस आने के लिए उत्साहित नजर आ रहे हैं। 28 फरवरी को दिखाई दी थी मिसाइल सुरेंद्र उर्फ काला ने बताया कि 28 फरवरी को आसमान में मिसाइल देखने को मिली थी, जिसके बाद से भारतीय काफी डरे हुए थे। उसके बाद लगातार बमबारी की आवाज सुनाई दे रही थी। आसमान में मिसाइल का धुआं दिख रहा था। उनके होटल से करीब 40 किलोमीटर दूर ही मिसाइल गिराए जा रहे थे। रोहतक के सुरेंद्र सहित हरियाणा के ये लोग लौटे रोहतक के मायना गांव निवासी काला ने बताया कि उनके साथ हरियाणा के कई युवक भारत वापस लौट रहे है। इनमें अंबाला से पारस, कैथल से मंदीप, पानीपत से रवि, सोनीपत से अमित शामिल है। साथ ही अन्य भारतीय भी वापस आ रहे हैं। समुंद्र से बोट द्वारा भारतीयों को किया रेस्क्यू सुरेंद्र मायना ने बताया कि रात करीब 2 बजे जैसे ही ईरान ने अटैक किया, लोग काफी सहम गए। उनके साथ काम करने वाले करीब 60-70 भारतीयों को समुंद्र में से रेस्क्यू करने का काम शुरू किया गया। बोट के माध्यम से भारतीयों को समुंद्र से जमीन पर लाया गया। होली के दिन भी सुनाई दिए थे धमाके सुरेंद्र काला ने बताया कि होली के दिन भी सुबह जब उठे, तो फोन पर कतर सरकार की तरफ से अलर्ट का मैसेज आया हुआ था कि ईरान की तरफ से दोबारा हमला हुआ है। अलर्ट को देखकर वह बाहर निकले तो आसमान में मिसाइल देखने को मिली, जो उनके रहने वाले स्थान से करीब 40 किलोमीटर दूर गिरी। मिसाइल अटैक से घबराए हुए थे लोग सुरेंद्र काला ने बताया कि ईरान की तरफ से लगातार मिसाइल अटैक किया जा रहा है। जिसके कारण कतर में फंसे लोग डरे हुए है। भारतीय लोग अपने घरों में फोन करके सही सलामत होने की बात कर रहे थे, लेकिन अंदर से सभी लोग सहमे हुए थे, क्योंकि दिन रात धमाकों की आवाज सुनाई दे रही थी।