बागेश्वर में क्यों मनाई जाती है पुरुषों की अलग होली? न लाला-न पीला, इनका रंग सबसे अलग, जानें सीक्रेट

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बैठकी होली की शुरुआत बसंत पंचमी से मानी जाती है. इस दिन से गांव और मोहल्ले के पुरुष एक स्थान पर एकत्र होकर होली गीत गाते हैं. हारमोनियम और तबले की संगत में गाए जाने वाले ये गीत कई-कई घंटों तक चलते हैं. किसी भी तरह का उग्र व्यवहार नहीं किया जाता, बल्कि पूरी होली अनुशासन और सामूहिकता के साथ मनाई जाती है. होली से कुछ दिन पहले चीर बंधन की परंपरा होती है. गांव के बीच एक पेड़ या खंभे पर रंगीन कपड़ों की चीर बांधी जाती है.