पंचायत चुनाव के लिए जिलों से फाइनल वोटर लिस्ट जारी:करीब 40 लाख वोटर्स बढ़े; हर वोटर को मिला 9 अंकों का खास पहचान नंबर

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राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर यूपी में जिला स्तर पर पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई है। तमाम दावों, आपत्तियों के निस्तारण और गहन सत्यापन के बाद इस फाइनल लिस्ट को तैयार किया गया है। इस बार आयोग ने एक बड़ा बदलाव करते हुए प्रत्येक पंचायत मतदाता को 9 अंकों का एक यूनिक पहचान नंबर जारी किया है। हालांकि, सूची जारी होते ही तकनीकी दिक्कतों के कारण कई जिलों में वोटर्स को इसे डाउनलोड करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 1.81 करोड़ नए नाम जुड़े, 1.41 करोड़ हटे राज्य निर्वाचन आयोग ने इससे पहले 18 दिसंबर, 2025 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की थी। इसके बाद चले संशोधन अभियान के बाद आए आंकड़े चौंकाने वाले हैं। फाइनल वोटर लिस्ट में करीब 1.81 करोड़ नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं। वहीं, करीब 1.41 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। कुल मिलाकर इस बार पंचायत चुनाव की वोटर लिस्ट में करीब 40.19 लाख मतदाताओं की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चुनाव अभी तय नहीं, अगले 6 महीने प्रधान ही संभालेंगे कुर्सी उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बीते 26 मई को खत्म हो चुका है। समय पर चुनाव न हो पाने के कारण सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए निवर्तमान प्रधानों को ही अगले छह महीनों तक प्रशासक के तौर पर जिम्मेदारी सौंप दी है। सरकार ने पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को लेकर एक पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया है। इस कमीशन को छह महीने के भीतर जिलावार आर्थिक और सामाजिक स्तर की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। हाईकोर्ट में फंसा पेंच: जुलाई में मांगी रिपोर्ट सरकार ने भले ही आयोग को छह महीने का वक्त दिया है, लेकिन जल्द पंचायत चुनाव कराने को लेकर दायर एक याचिका पर मामला अभी इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित है। हाईकोर्ट ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए ओबीसी कमीशन को जुलाई में ही अपनी रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। यूपी में फरवरी-मार्च में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। राजनीतिक दलों को डर है कि विधानसभा चुनाव के ठीक पहले पंचायत चुनाव कराने से उनके संगठन और चुनावी तैयारियों को भारी नुकसान हो सकता है। दरअसल, पंचायत चुनाव दलीय आधार पर नहीं लड़े जाते हैं, जिसके कारण स्थानीय स्तर पर वर्चस्व की जंग और गुटबाजी चरम पर होती है। कई बार एक ही पार्टी के दो मजबूत कार्यकर्ता आमने-सामने चुनाव मैदान में उतर जाते हैं। ऐसे में लोग पार्टी की मर्यादा भूल जाते हैं। इससे मुख्य चुनाव के समय पार्टी कैडर बिखरने का खतरा रहता है। प्रदेश में ग्राम पंचायत के साथ-साथ क्षेत्र पंचायत (बीडीसी) और जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव भी एक साथ कराए जाने हैं।