हरियाणा के 28000 रसोइया सह-सहायकों को राहत:नहीं करने होंगे अन्य काम; सभी DEEO को लेटर जारी, साल में 2 बार होगी चिकित्सा जांच

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हरियाणा शिक्षा विभाग ने जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारियों (DEO) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि मध्याह्न भोजन योजना के अंतर्गत कार्यरत 28 हजार रसोइया सह-सहायकों को भोजन तैयार करने के अलावा किसी अन्य कार्य में न लगाया जाए। DEEO को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे रसोइया सह-सहायकों की साल में 2 बार चिकित्सा जांच सुनिश्चित करें। इसके अलावा, यह भी निर्देश जारी किए गए हैं कि यदि विद्यालय में छात्रों की कम संख्या के कारण किसी रसोइया सह-सहायक को हटाया जाता है और उसी गांव के किसी अन्य स्कूल में (उसी अवधि के दौरान) कोई पद रिक्त होता है, तो उन्हें उस पद पर समायोजित किया जा सकता है। अभी सफाई, घास कटाया जा रहा मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन की प्रमुख ललिता खन्ना ने कहा, “कर्मचारियों से केवल मिड-डे मील से संबंधित काम ही करने को कहा जाना चाहिए। हमें पूरे दिन रुक कर कई अन्य काम करने के लिए मजबूर किया जाता है, जिनमें सफाई, खेल के मैदानों में घास काटना और यहां तक ​​कि छतों की सफाई भी शामिल है। फिलहाल, मध्याह्न भोजन बनाने वाले रसोइयों को केवल 10 महीने का मानदेय मिलता है। हम मांग कर रहे हैं कि शिक्षा विभाग के अन्य कर्मचारियों की तरह हमें भी 12 महीने का मानदेय दिया जाए।” 7000 मिल रहा मानदेय मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन के महासचिव जय भगवान ने बताया विभाग ने कुछ दिशा निर्देश जारी किए हैं, लेकिन इनसे श्रमिकों को कोई मदद नहीं मिलने वाली है। हम अपनी जायज मांगों को पूरा करवाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मिड-डे मील कर्मचारियों को प्रति माह 7 हजार रुपए मिलते हैं, जो समय पर नहीं दिए जाते हैं। भगवान ने कहा, बच्चों की संख्या में कमी या किसी स्कूल के बंद होने या विलय होने के कारण कर्मचारियों को नौकरी से नहीं निकाला जाना चाहिए। सख्ती से आदेशों का पालन होगा मिड डे मील वर्करों ने बताया कि सेवानिवृत्ति लाभ भी दिए जाने चाहिए और उनकी चिकित्सा जांच जिला मुख्यालयों के बजाय बाल चिकित्सा केंद्र/प्राइवेट हेल्थ सेंटर में की जानी चाहिए। एक अधिकारी ने बताया, हमें मध्याह्न भोजन सेवा कर्मियों से शिकायतें मिली हैं कि शिक्षक उनसे ऐसे कई काम करवाते हैं जो उनके कर्तव्य का हिस्सा नहीं हैं। शिक्षा विभाग ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। मानदेय में देरी एक अलग मुद्दा है।