हरदा के नेहरू मैदान में 21 दिसंबर को हुए करणी सेना के आंदोलन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। करणी सेना ने ये आंदोलन 21 सूत्रीय मांगों को लेकर किया था। इसमें प्रदेश भर से करीब 20 हजार लोग शामिल हुए। करणी सेना ने दावा किया था कि ये मांगें सभी समाज के लोगों की हैं, लेकिन 11 घंटे तक चला ये आंदोलन केवल एक मांग पूरी होने के बाद ही खत्म हो गया। दरअसल, इसी साल जुलाई के महीने में हरदा पुलिस ने आंदोलन कर रहे करणी सेना के पदाधिकारियों के खिलाफ लाठी चार्ज किया था और उनकी गिरफ्तारी की थी। इनमें करणी सेना परिवार संगठन प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर भी शामिल थे। उसी वक्त से करणी सेना दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही थी। प्रशासन ने लाठीचार्ज के दोषी पुलिसकर्मियों को हटाने और मजिस्ट्रियल जांच की घोषणा की, तो आंदोलन खत्म कर दिया गया। भास्कर ने जब पदाधिकारियों से पूछा कि क्या केवल इसी मांग को लेकर इतना बड़ा आयोजन किया गया तो उन्होंने कहा कि और भी मांगे हैं, जल्द ही राज्य सरकार से बातचीत कर वो भी पूरी कराएंगे। आखिर क्या थी करणी सेना की मांग और केवल एक मांग पूरी होने के बाद ही आंदोलन क्यों खत्म हो गया? पढ़िए रिपोर्ट… करणी सेना नेता भाषण में बोले- ये सर्व समाज की मांगें
करणी सेना ने इस आंदोलन के लिए 10 दिन पहले से माहौल बनाना शुरू कर दिया था। पिछले दिनों जब मुख्यमंत्री मोहन यादव इंदौर पहुंचे थे तो करणी सेना के पदाधिकारी उनसे मुलाकात करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। सभी लोग वहीं धरने पर बैठ गए थे। भास्कर से बातचीत में करणी सेना प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर ने कहा था कि 21 दिसंबर को हरदा में आंदोलन किया जाएगा। जिन 21 सूत्रीय मांगों को रखा जाएगा वो सभी वर्ग और समाज की है।आंदोलन के लिए राजस्थान से महिपाल सिंह मकराना और यूपी से सुरजपाल अम्मू समेत कई लोग पहुंचे थे। सुबह सात बजे से करणी सैनिक स्टेडियम में इकट्ठा होने लगे थे। करीब 11 बजे जीवन सिंह शेरपुर और बाकी नेता हरदा पहुंचे और आमरण अनशन शुरू हुआ। जीवन सिंह शेरपुर ने प्रशासन को दोपहर 3 बजे तक की डेडलाइन दी और कहा कि यदि मांगें मानी नहीं गई तो आंदोलन चलता रहेगा। इस दौरान भास्कर से बातचीत में शेरपुर ने सभी 21 सूत्रीय मांगों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को हमारे पास आकर हमारी बातों को समझना चाहिए। यह आंदोलन किसी एक जाति विशेष का आंदोलन नहीं है बल्कि सभी समाज का आंदोलन है। पूर्व संगठन महामंत्री बोले- सरकार ने धोखा दिया
करणी सेना के पूर्व संगठन मंत्री शैलेन्द्र सिंह झाला ने कहा कि दो साल पहले 8 जनवरी 2023 को भोपाल के जंबूरी मैदान में करणी सेवा परिवार ने मिलकर आंदोलन किया था। जीवन सिंह शेरपुर के साथ सात लोग अनशन पर बैठे थे। ये आंदोलन चार दिन तक चला। इसके बाद तत्कालीन सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया अनशन स्थल पर पहुंचे थे उन्होंने हमारी 22 में से 18 मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया था। सरकार ने हमारी 18 सूत्रीय मांगों को पूरा करने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी। इस कमेटी में सामान्य प्रशासन विभाग के तत्कालीन एसीएस को अध्यक्ष बनाया गया। वहीं स्कूल शिक्षा विभाग और सामाजिक न्याय एवं दिव्यांग जन विभाग के तत्कालीन पीएस कमेटी के सदस्य थे। कमेटी को दो महीने में 18 मांगों पर अपनी रिपोर्ट देना थी। कमेटी ने दो बैठकें की उसके बाद सरकार अपनी मांगों से पलट गई। हमारी किसी भी मांग को पूरा नहीं किया। दोपहर 3 बजे तक मांग पूरी नहीं हुई
करणी सेना ने मांगें पूरी करने के लिए प्रशासन को दोपहर तीन बजे तक का अल्टीमेटम दिया था। तब तक सेना के पदाधिकारियों और प्रशासन के बीच एक दौर की बैठक हो चुकी थी। तीन बजे जब मांगें पूरी नहीं हुई तो राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने कहा कि हम आधा घंटे का समय प्रशासन को देते हैं। यदि हमारी मांगों को नहीं सुना गया तो हम स्टेडियम के बाहर आकर सड़क पर प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद भोपाल और दिल्ली कूच करेंगे। उन्होंने कहा- 10 घंटे से हम अनुशासन में रहकर आंदोलन कर रहे हैं। इसे प्रशासन हमारी कमजोरी ना समझे। हम तो लोकतंत्र में सभी का साथ चाहते हैं, लेकिन राजपूत के ऊपर अत्याचार का काम नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि मंच पर सर्व समाज मौजूद है, जो हमें हर तरफ से मदद करने को तैयार है। वहीं करणी सेना प्रमुख जीवनसिंह शेरपुर ने कहा कि हम निर्णय लेने में चूक गए कि आखिर हमें वोट किसको देना है।हमारे साथ विश्वासघात हुआ है। प्रशासन ने होटल में 7 सदस्यों के साथ मीटिंग की
इसके बाद जिला प्रशासन और करणी सेना के पदाधिकारियों के बीच एक होटल में दूसरे दौर की मीटिंग हुई। इस मीटिंग में 21 सूत्रीय मांगों पर चर्चा हुई। इस बीच अनशन पर बैठे जीवन सिंह शेरपुर और बाकी लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। धरना स्थल पर कार्यकर्ताओं ने हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया। करीब 6 बजे जीवन सिंह शेरपुर ने कहा कि आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। यहां से कोई फैसला लेकर ही जाएंगे। इसी बीच ये मांग भी उठी कि करणी सेना को राजनीति में उतरना चाहिए। जीवन सिंह शेरपुर ने कहा कि हमने कार्यकर्ताओं से पूछा कि क्या हम दल बनाए? सभी लोगों ने इसका समर्थन किया। हम दल बनाएंगे भी और इसे चलाएंगे भी। इसके लिए पहले कोर कमेटी से बात करेंगे। प्रशासन ने एक मांग पर सहमति दी
शाम को 7 बजे तक चली मीटिंग में प्रशासन ने 21 में से सबसे पहली यानी हरदा लाठीचार्ज में कार्रवाई की मांग को सहमति दी। धरना स्थल पर मौजूद शेरपुर ने कहा कि हमारा आंदोलन अभी जारी है। हमारी एक मांग मानी गई है। हमने लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों को निलंबित करने की मांग की। इसे पीएचक्यू भोपाल भेजा गया है। हमने न्यायिक जांच की भी मांग रखी है। इसका अभी लेटर नहीं आया है। हमारी एक ही मांग पूरी की है। बाकी 20 मांगें यथावत हैं, इसलिए धरना जारी रहेगा। इसके बाद रात आठ बजे प्रशासन ने मजिस्ट्रियल जांच की मांग को भी मान लिया। राष्ट्रीय करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने कहा कि अभी 5 अफसरों को लाइन हाजिर कर मजिस्ट्रियल जांच बैठाई गई है। दोषी पाए जाने पर नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा। किसी को लगता है कि हम दिल्ली नहीं घेर सकते तो अबकी बार हम आरक्षण की मांग को लेकर दिल्ली घेरेंगे। मंच से किया नई पार्टी बनाने का ऐलान
इस मांग के पूरा होने के बाद नेताओं ने कहा कि हम दल बनाने की तैयारी कर रहे हैं। जल्द इसका रजिस्ट्रेशन कराएंगे, फिर से मप्र में सभा करेंगे। ये लड़ाई अधूरी नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि हमारी मांगों पर कोई बात करने वाला नहीं है। इसलिए राजनीतिक दल बनाना जरूरी है। हमारी बातों को सदन में उठाने वाला कोई नहीं है। जिस प्रकार राष्ट्रीय सेवक स्वयं संघ ने अपनी बुद्धि बल लगाकर भाजपा का निर्माण किया वैसे ही हर एक करणी सैनिक अपना तन मन धन लगाकर इस संगठन को नई दिशा दे। जो भी संगठन का नाम होगा उसका रजिस्ट्रेशन कराएंगे। इसके बाद 11 घंटे तक चला आंदोलन खत्म करने का ऐलान किया। क्या केवल एक मांग के लिए आंदोलन किया?
आंदोलन खत्म होने के बाद भास्कर रिपोर्टर ने ये सवाल पूर्व संगठन मंत्री शैलेंद्र सिंह झाला से किया तो उन्होंने कहा कि हम लगातार हरदा जिला प्रशासन से यह मांग कर रहे थे कि 11-12 जुलाई को जो हम लोगों पर लाठी चार्ज हुआ, उसकी न्यायिक जांच होनी चाहिए और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होना चाहिए। इसके अलावा हमारी प्रदेश और केंद्र सरकार से जुड़ीं 21 मांगें हैं। जो हरदा प्रशासन के हाथ में था उन्होंने उस मांग को पूरा कर दिया है। मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं और दोषी पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया है। जो बाकी मांगें हैं उन्हें राज्य सरकार को भेज दिया है। हरदा एसपी शशांक जैन ने बताया कि करणी सेना का एक बड़ा आंदोलन था। जिसे लेकर प्रशासन की लगातार सेना के पदाधिकारियों से बात हो रही थी। 12- 13 जुलाई की घटना को लेकर उन्हें कुछ इश्यू था, जिसकी वह मजिस्ट्रियल जांच की मांग कर रहे थे। जिन लोगों के खिलाफ जांच चल रही है उन्हें जांच तक के लिए पीएचक्यू में लाइन अटैच किया गया है। ये खबर भी पढ़ें…
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