उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जयपुर के ट्रायल कोर्ट में लंबित क्लोजर रिपोर्ट और विरोध अर्जियों के निपटारे से पहले धारीवाल के खिलाफ कोई निरोधात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। दरअसल, राजस्थान उच्च न्यायालय पहले ही आदेश दे चुका था कि क्लोजर रिपोर्ट और विरोध अर्जियों का निपटारा ट्रायल कोर्ट करेगी। ट्रायल कोर्ट पुरानी और नई दोनों क्लोजर रिपोर्ट पर विचार कर सकता है। राज्य सरकार इस मामले में अतिरिक्त जांच रिपोर्ट भी पेश कर सकती है। ट्रायल कोर्ट क्लोजर रिपोर्ट वापस लेने की अर्जी पर भी सुनवाई करेगी।
2011 में जयपुर विकास प्राधिकरण ने दस बीघे का एकल पट्टा जारी किया था। शिकायतकर्ता रामशरण सिंह ने एंटी करप्शन ब्यूरो से इसकी शिकायत की थी। विवाद बढ़ने के बाद 2013 में एकल पट्टा रद्द कर दिया गया था। इस मामले की जांच के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो ने तत्कालीन एसीएस जी एस संधू, डिप्टी सचिव निष्काम दिवाकर, जोन आयुक्त ओंकार मल सैनी और कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक शैलेंद्र गर्ग को गिरफ्तार किया गया था। एंटी करप्शन ब्यूरो ने शांति धारीवाल से भी पूछताछ की थी।
