सामूहिक इस्तीफे के बाद जदयू जिलाध्यक्ष रहे पूर्व विधायक अशोक कुमार सिंह ने रविवार को पत्रकारों संबोधित करते हुए कहा कि रफीगंज विधानसभा सीट से जेडीयू ने वैसे व्यक्ति को प्रत्याशी बनाया है, जो जदयू के प्राथमिक सदस्य भी नहीं हैं। यदि पार्टी जदयू के किसी नेता को टिकट देती या राजग के किसी दूसरे घटक दल के नेता को टिकट दे दिया जाता, तो उनके कार्यकर्ता आहत नहीं होते, लेकिन इस तरह की विकट स्थिति उत्पन्न हो जाने से कार्यकर्ताओं की भावना आहत हुई। कार्यकर्ताओं की भावना का सम्मान करते उनके साथ जदयू की पूरी जिला कमिटी के सभी पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया है।
अशोक कुमार सिंह ने कहा कि उनके समेत सभी कार्यकर्ता जदयू में बने रहेंगे और रफीगंज विधानसभा क्षेत्र को छोड़कर औरंगाबाद जिले के शेष सभी पांच विधानसभा क्षेत्रों में राजग के प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के लिए काम करेंगे।
उन्होंने कहा, “2009 में जब मैंने अपने पिता पूर्व विधायक रामाधार सिंह की मौजूदगी में जदयू में शामिल हुआ था, तब मेरे पिता ने नीतीश कुमार को आश्वस्त किया था कि मेरा बेटा आजीवन उनके साथ रहेगा। मैं उनके वचन पर आज भी कायम हूं और शमशान घाट तक नीतीश कुमार के साथ रहूंगा।”
उन्होने स्पष्ट किया, ” मैंने पद से इस्तीफा दिया है, पार्टी से नहीं। आज भी पार्टी का मैं समर्पित सिपाही हूं और कल भी रहूंगा। पार्टी ने मुझे बहुत कुछ दिया। 2010 और 2015 में टिकट देकर विधायक बनाया। 2020 में भी पार्टी ने मुझे टिकट दिया, लेकिन उसी उम्मीदवार के कारण मुझे हारना पड़ा, जिसे पार्टी ने आज टिकट दे दिया है।
