दरअसल, शरजील इमाम ने बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए 15 अक्टूबर से 29 अक्टूबर के बीच अंतरिम जमानत की मांग की थी। शरजील इमाम ने याचिका दायर कर कहा था कि वो एक राजनीतिक कैदी और छात्र कार्यकर्ता है। वो बिहार के बहादुरगंज से चुनाव लड़ना चाहता है। दो सितंबर को दिल्ली उच्च न्यायालय ने शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज की थी। उच्च न्यायालय से जमानत याचिका खारिज होने के बाद शरजील इमाम ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
शरजील इमाम को 25 अगस्त, 2020 को बिहार से गिरफ्तार किया गया था। दिल्ली पुलिस ने शरजील इमाम के खिलाफ यूएपीए के तहत दाखिल चार्जशीट में कहा है कि शरजील इमाम ने केंद्र सरकार के खिलाफ घृणा फैलाने और हिंसा भड़काने के लिए भाषण दिया, जिसकी वजह से दिसंबर 2019 में हिंसा हुई। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि नागरिकता संशोधन कानून के विरोध की आड़ में गहरी साजिश रची गई थी। इस कानून के खिलाफ मुस्लिम बहुल इलाकों में प्रचार किया गया। यह प्रचार किया गया कि मुस्लिमों की नागरिकता चली जाएगी और उन्हें डिटेंशन कैंप में रखा जाएगा।
