उन्होंने कहा कि लाखों वर्ष पूर्व के इन औजारों में हमारे पूर्वजों के संघर्ष और उत्कर्ष की गाथाएं लिखी हैं। वे किसने उद्यमी थे, उन्होंने किस तरह अनुसन्धान किये, किस तरह के औजारों को बनाया, ये सब हमारे लिये महत्त्वपूर्ण, रोचक एवं शोध का विषय है। इन्हीं औजारों से उन्होंने अपना भविष्य गढ़ लिया। हमलोग आज जिस व्यवस्थित जीवन को जीते हैं, उसमें इन प्रस्तर औजारों का आधारभूत महत्त्व है।
धातुयुग तो बहुत बाद में आया। इन ढेले-पत्थरों से आरम्भ होकर ही हमारी सभ्यता और विकास की यात्रा वर्तमान तक पहुंची है। इन्हीं औजारों से पाषाण-युगीन मानवों ने अपनी विजय गाथा लिखी, इसलिये विजयादशमी के पुनित अवसर पर ये हमारे लिये विशेषरूप से वन्दनीय हैं।
