याचिका में अधिवक्ता रामप्रताप सैनी ने कि याचिकाकर्ता के पास सक्षम अधिकारी की ओर से जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र और यूनिक आईडी कार्ड भी है। दिव्यांगता प्रमाण पत्र में उसे पचास फीसदी स्थाई दिव्यांग घोषित किया गया है। इसके बावजूद भी आरपीएससी ने उसे यह कहते हुए साक्षात्कार में शामिल नहीं कर रही कि उसकी दिव्यांगता अस्थाई है। आयोग के मेडिकल बोर्ड ने उसे 52 फीसदी दिव्यांग बताते हुए दिव्यांगता की प्रकृति अस्थाई बताई है। याचिका में कहा गया कि उसके दिव्यांगता प्रमाण पत्र और आयोग के मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में विरोधाभास है। ऐसे में उसकी जांच एम्स, जोधपुर के विशेषज्ञों से कराई जाए और उसे आरएएस के साक्षात्कार में शामिल होने दिए जाए। इस पर आरपीएससी के वकील एमएफ बेग ने कहा कि आयोग में आरएएस भर्ती के साक्षात्कार 24 अक्टूबर तक होना प्रस्तावित है। यदि मेडिकल रिपोर्ट याचिकाकर्ता के पक्ष में आती है तो उसे साक्षात्कार में शामिल किया जा सकता है। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने याचिकाकर्ता का एम्स, जोधपुर से दिव्यांगता जांच कराने के आदेश देते हुए उसकी रिपोर्ट अदालत में पेश करने को कहा है।
आरएएस अभ्यर्थी की दिव्यांगता एम्स में जांचने के आदेश
