असम और पश्चिम बंगाल में भाजपा को प्रचंड जीत ने यूपी की सियासत में हलचल तेज कर दी है। भाजपा का जहां मनोबल ऊंचा हुआ है, वहीं सपा-कांग्रेस गठबंधन के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। चुनाव नतीजों ने साफ संकेत दिया है कि 2027 के यूपी चुनाव में मजबूत नेतृत्व और स्पष्ट रणनीति ही जीत दिलाएगी। बंगाल की जीत यूपी के लिए क्या संकेत दे रही है? क्या सपा अब भी मुख्य मुकाबले में बराबर की टक्कर देगी या भाजपा तीसरी बार बड़ी जीत दर्ज करेगी? बंगाल-असम का कौन सा फॉर्मूला यूपी में भी काम करेगा? पढ़िए ये रिपोर्ट… बंगाल चुनाव नतीजों ने दिए 5 मैसेज 1. भाजपा हिंदुत्व को और मुखर करेगी: भाजपा यूपी में और आक्रामक रणनीति अपनाएगी। हिंदुत्व के साथ हाईवे, एयरपोर्ट, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर जैसे विकास के मुद्दे अहम होंगे। 2. सपा के सामने दोहरी चुनौती: अखिलेश यादव को अब न सिर्फ भाजपा, बल्कि INDI गठबंधन की अंदरूनी कलह से भी जूझना होगा। कांग्रेस 100 से कम सीटों पर मानने को तैयार नहीं है। सपा 50 से ज्यादा देना नहीं चाहती। 3. खास वोट बैंक के सहारे जीतना मुश्किल: यूपी में यादव- मुस्लिम वोट बैंक सपा के साथ है। भाजपा नॉन-यादव OBC को साधने में जुटी है। ऐसे में दोनों पार्टियों को हर वर्ग का वोट चाहिए होगा। 4. महिला आरक्षण मुद्दे को भुना रही भाजपा : बंगाल चुनाव में महिलाओं ने सुरक्षा और विकास को प्राथमिकता दी। महिला बिल का विरोध करके सपा पहले ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) वाली गलती कर चुकी है। भाजपा इसे मुद्दा भी बना रही है। 5. अल्पसंख्यकों के लिए ममता की राह पर अखिलेश: बंगाल में TMC ने अल्पसंख्यक वोट के लिए तुष्टीकरण की राह चुनी, जो उस पर भारी पड़ा। सपा भी महिला बिल के दौरान मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की मांग उठा चुकी है। यूपी में हैट्रिक लगाने के लिए जोर लगाएगी भाजपा 2027 में भाजपा तीसरी बार यूपी में सत्ता हासिल करने के लिए जोर लगाएगी, तो सपा-कांग्रेस गठबंधन 2024 लोकसभा की तरह भाजपा को हराने की कोशिश करेगा। अब सवाल है कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन और असम में लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने वाली भाजपा को यूपी में हराना क्या इतना आसान होगा? यूपी में सपा मुख्य विपक्षी दल है। अखिलेश यादव लगातार PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की बात कर रहे हैं, लेकिन बंगाल की हार से सपा पर दबाव बढ़ गया है। अगर बंगाल में TMC जैसी मजबूत पार्टी हार सकती है, तो यूपी में सपा कितनी देर टिक पाएगी? बंगाल में भाजपा ने जिस तरह राम मंदिर, CAA और आर्थिक सुधारों को मुद्दा बनाया, उसी तरह यूपी में राम पथ, एक्सप्रेस-वे, निवेश और यूपी के विकास को आगे बढ़ाया जाएगा। सीनियर जर्नलिस्ट सुरेश बहादुर सिंह कहते हैं कि पांच में से दो राज्यों में तीसरी बार सरकार बनाकर और TMC से बंगाल छीनकर भाजपा का हौसला बुलंद है। कार्यकर्ता जोश में हैं। निश्चित रूप से इसका फायदा भाजपा को अगले साल होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव में मिलेगा। बंगाल चुनाव के नतीजे सपा के लिए सबक तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल में किसी बड़े दल के साथ चुनावी समझौता नहीं किया था। कांग्रेस वहां अकेले ही लड़ी और सिर्फ 2 सीटें जीत पाई। असम, तमिलनाडु में भी उसने कोई खास प्रदर्शन नहीं किया। इससे पहले बिहार चुनाव में भी कांग्रेस कोई कमाल नहीं कर पाई थी। हालांकि, यूपी में सपा–कांग्रेस गठबंधन ने 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा को कड़ी टक्कर दी थी। विधानसभा चुनाव में भाजपा को सपा–कांग्रेस गठबंधन की काट ढूंढनी होगी। सीनियर जर्नलिस्ट राजेंद्र कुमार कहते हैं- बंगाल चुनाव के नतीजे सपा के लिए सबक हैं। जनता के मुद्दों के साथ उसे सड़क पर उतरना होगा। सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस से काम नहीं चलेगा। अगर जनता की तकलीफों के आधार पर चुनाव में उतरोगे तो तमिलनाडु की तरह पहली बार में ही जनता ताज पहना देगी, नहीं तो असम की तरह तीसरी बार भी सत्ता में वापसी नहीं होगी। सत्ता विरोधी लहर को थामना होगा राजेंद्र कुमार के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में 15 साल सत्ता में रही TMC के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर थी। लोग उसके कुशासन से परेशान थे। फिलहाल यूपी में सत्ता विरोधी लहर दिख तो नहीं रही है, लेकिन दो घटनाएं सरकार को अलर्ट देती हैं। पहली- नोएडा के मजदूर आंदोलन ने सरकार की पोल खोल दी। हरियाणा जैसे राज्यों की सरकार ने समय रहते उसका हल खोज लिया, लेकिन यूपी सरकार आंदोलन के बाद ही जागी। दूसरा मामला स्मार्ट मीटर के खिलाफ आक्रोश का है। महिलाएं जगह–जगह स्मार्ट मीटर उखाड़कर प्रदर्शन कर रही हैं। ये हर परिवार का दर्द है। स्मार्ट मीटर और बिजली का मुद्दा वोटर्स को प्रभावित करता है। ऊर्जा मंत्री ने डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि अब सभी स्मार्ट मीटर पोस्टपेड मीटर की तरह काम करेंगे। यानी प्रीपेड सिस्टम (पहले रिचार्ज) की व्यवस्था खत्म की जा रही है। मुस्लिम तुष्टीकरण यूपी में भी बनेगा बड़ा हथियार सीनियर जर्नलिस्ट सुरेश बहादुर सिंह कहते हैं कि भाजपा ने बंगाल-असम में कांग्रेस और TMC पर मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप लगाया था। इसकी वजह से वो हिंदुओं को एकजुट करने में सफल रही। यूपी में भी सपा पर मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप लगते रहे हैं। लोकसभा के विशेष सत्र के दौरान भी सपा ने महिला आरक्षण संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान मुस्लिम महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग उठाई थी। ऐसे में यूपी चुनाव के दौरान मुस्लिम तुष्टीकरण विपक्ष के खिलाफ भाजपा का अहम मुद्दा होगा। असम, तमिलनाडु और बंगाल के चुनाव ने साफ कर दिया है कि अब एक वर्ग विशेष के तुष्टीकरण और सनातन के विरोध की राजनीति नहीं चलने वाली है। सपा को इसके बारे में एक बार फिर से सोचना होगा। महिला स्कीम भाजपा के लिए बन सकती हैं गेमचेंजर भाजपा की रिपीट होने वाली सरकारों के पक्ष में महिला फैक्टर काम करता है। महिलाएं भाजपा के पक्ष में बड़ी संख्या में वोट कर रही हैं। महिला सुरक्षा और विकास के बलबूते भाजपा आधी आबादी की पहली पसंद बन चुकी है। बिहार की तरह असम में भी भाजपा ने ‘अरुनोदोई स्कीम’ में शामिल 37 लाख महिलाओं को बिहू उपहार के तौर पर 8–8 हजार रुपए दिए थे। बंगाल में भाजपा ने महिलाओं को हर महीने तीन हजार रुपए नकद देने का वादा किया है। अब उसकी जीत के पीछे महिला वोटरों का लामबंद होकर वोट देना भी एक बड़ा कारण बताया जा रहा है। कुछ इसी तरह की स्कीम यूपी सरकार को भी लानी होगी। सीएम योगी को हिमंता से बड़ी लकीर खींचनी होगी सीनियर जर्नलिस्ट राजेंद्र कुमार के मुताबिक असम में सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने अकेले दम पर भाजपा को तीसरी बार सत्ता दिलाई। वे कांग्रेस से भाजपा में आए हैं। असम में पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने एक–एक रैली ही की। सीएम योगी ने भी एक ही दिन में दो विधानसभा सीटों पर प्रचार किया। वहां हिमंता ने अकेले ही मोर्चा संभाला रखा था। अब कुछ इसी तरह की चुनौती यूपी में सीएम योगी आदित्यनाथ के सामने होगी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन एक इंटरव्यू में योगी आदित्यनाथ के फेस पर चुनाव लड़ने की बात कह चुके हैं। ऐसे में अब सीएम योगी को अकेले दम पर भाजपा को तीसरी बार प्रचंड जीत दिलाकर यूपी में असम से बड़ी लकीर खींचनी होगी। ————————————————— ये खबर भी पढ़ें… योगी बंगाल में 35 जगह गए, 31 पर BJP आगे:CM का स्ट्राइक रेट 89%; राजनाथ का 83, केशव का 78% पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में यूपी के नेताओं में सीएम योगी ने सबसे ज्यादा 35 विधानसभा सीटों पर प्रचार किया था। चुनाव आयोग के रात 8 बजे तक के रिजल्ट और ट्रेंड्स के आंकड़ों के मुताबिक इनमें से 89% यानी 31 सीटों पर भाजपा प्रत्याशी जीत चुके हैं या आगे हैं। पूरी खबर पढ़ें…
बंगाल-असम नतीजों से UP के लिए 5 बड़े मैसेज:ममता वाली गलती अखिलेश कर रहे; योगी को हिमंता से बड़ी लकीर खींचनी होगी
