यूपी भाजपा की टीम बनने में 6 महीने क्यों लगे:2 वजह सामने आईं; महामंत्री से हटे 2 चेहरों को केंद्र में मिल सकता है मौका

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भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी की नई टीम 6 महीने लेट घोषित हुई। लंबे समय से जमे चेहरों को किनारे करते हुए 50% से ज्यादा नए चेहरों को जिम्मेदारी दी गई है। अब बड़े चेहरों को प्रमोट करने की तैयारी चल रही है। भाजपा गठबंधन सहयोगियों की ‘दबाव की राजनीति’ को कम करना चाहती है। यही वजह है कि पश्चिम में रालोद से गठबंधन के बावजूद गुर्जर और जाट नेताओं को तरजीह दी गई। ऐसा ही पूर्वांचल में राजभर और मौर्य चेहरों के साथ किया गया। 25 पदाधिकारी सिर्फ ओबीसी कैटेगरी के हैं। लिस्ट घोषित होने के साथ सियासी गलियारों में चर्चा यह भी है कि सीएम योगी ने खास हस्तक्षेप नहीं किया। पहले जानते हैं कि यह लिस्ट 6 महीने लेट कैसे हो गई… पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सूची को फाइनल करने में केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व के बीच लंबी खींचतान चली। इसकी 2 वजह सामने आईं- युवा मोर्चा पर रार – युवा मोर्चा के क्षेत्रीय अध्यक्ष पद के लिए निखिल मणि तिवारी, हर्षवर्धन सिंह और रोहित मिश्रा के बीच कड़ी टक्कर थी। तीनों की पार्टी के ही अलग-अलग ताकतवर नेता पैरवी कर रहे थे। उनके बीच बराबर विरोध भी बना हुआ था। यही वजह है कि एक नाम पर सहमति बनने में वक्त लगा। आखिरकार रोहित मिश्रा के नाम पर मुहर लगी। रोहित अभी तक युवा मोर्चा में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। काशी क्षेत्र का पेंच – काशी के क्षेत्रीय अध्यक्ष का नाम सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सहमति से तय होता है। यही वजह है कि यह पद फाइनल होने में काफी वक्त लगा। योगी ने बनाई दूरी, हावी रही धर्मपाल-पंकज चौधरी की पसंद सबसे बड़ा सियासी संकेत यह मिला कि सीएम योगी ने संगठन के कामकाज और नियुक्तियों में बिल्कुल दखल नहीं दिया। पूरी सूची में ज्यादातर नाम महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की पसंद के शामिल किए गए हैं। उनके और धर्मपाल सिंह के समन्वय को ‘दिल्ली-लखनऊ ट्यूनिंग’ के तौर पर देखा जा सकता है। इस टीम में मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले एकमात्र नेता कामेश्वर सिंह हैं, जिन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। हालांकि, जानकार कहते हैं कि कामेश्वर किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। यही वजह है कि उनका चुनाव सही माना जा रहा है। दिग्गजों को हटाया, कुछ प्रमोट होंगे इस फेरबदल में कई बड़े विकेट भी गिरे हैं। प्रदेश टीम से उपाध्यक्ष त्रयंबक त्रिपाठी, संतोष सिंह और विजय बहादुर पाठक जैसे दिग्गज नेताओं को हटा दिया गया है। यह राज्य की राजनीति में कई बड़े संकेत दे रहा है। चर्चा है कि प्रदेश महामंत्री के पद से हटाए गए अमरपाल मौर्य और गोविंद शुक्ला को भले ही यूपी टीम में जगह न मिली हो। लेकिन, उन्हें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की केंद्रीय टीम में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसीलिए यूपी के इन कद्दावर महामंत्रियों को केंद्र में ले जाना दिखाता है कि उन्हें ‘नाराज’ करने की जगह ‘प्रमोट’ किया जा रहा है। यह सवर्ण और मौर्य (ओबीसी) समीकरण को राष्ट्रीय स्तर पर साधे रखने की कवायद है। ‘परफॉर्म या बाहर जाओ’ का मैसेज लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद संगठन पर जो सुस्ती के आरोप लगे थे, यह बदलाव उसकी बड़ी सर्जरी की तरह है। लंबे समय से जमे नेताओं को हटाकर 50% से ज्यादा नए चेहरे लाना यह साबित करता है कि पार्टी ने ‘परफॉर्म या बाहर जाओ’ का संदेश दिया है। जिससे साल-2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में नया जोश भरा जा सके। PDA के मुकाबले BJP का ‘ओबीसी कार्ड’ पार्टी ने इस बार सोशल इंजीनियरिंग का खास ध्यान रखा है। 54 सदस्यों वाली इस टीम में 27 पदाधिकारी ओबीसी वर्ग से बनाए गए हैं। इसमें भी किसी एक जाति को नहीं, बल्कि ओबीसी के अंदर आने वाली सभी प्रमुख जातियों को प्रतिनिधित्व देकर संतुलन साधा गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि योगी मंत्रिमंडल के विस्तार के वक्त भी ऐसा ही दिखा था। अब संगठन में भी पिछड़ों को तवज्जो दी गई है। ये मैसेज 2027 के चुनाव में भाजपा के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। 2027 के लिए साधे गए राजनीतिक समीकरण सपा के ‘PDA’ नैरेटिव की काट – भाजपा ने 21 सवर्ण, 25 ओबीसी, 7 दलित और 1 ST शामिल किए हैं। पूरी तरह से जातिवादी नैरेटिव को तोड़ने का प्रयास किया गया है। साथ ही सवर्णों की नाराजगी को खत्म करने की भी कोशिश हुई है। सहयोगी पार्टियों पर निर्भरता कम की – पश्चिम में रालोद, पूर्वांचल में सुभासपा और अपना दल के साथ भाजपा का गठबंधन है। इसके बावजूद संगठन में गुर्जर, राजभर, मौर्य और चौहान नेताओं को बड़ी जगह दी है। यह दिखाता है कि भाजपा अपने स्वतंत्र वोटबैंक को कमजोर नहीं होने देना चाहती। पूर्वांचल से 15 चेहरों को शामिल किया पंकज चौधरी की टीम में 15 पदाधिकारी पूर्वांचल (गोरखपुर और काशी क्षेत्र) से हैं। गोरखपुर से प्रदेश उपाध्यक्ष धर्मेंद्र राय, प्रदेश उपाध्यक्ष कामेश्वर सिंह और रमेश सिंह हैं। वहीं, पश्चिम से 9 पदाधिकारी हैं। अवध क्षेत्र से 10, ब्रज से 8 और कानपुर क्षेत्र से 3 पदाधिकारी हैं। 6 अग्रिम मोर्चों के प्रदेश अध्यक्ष में से 4 मोर्चों के प्रदेश अध्यक्ष पूर्वांचल से हैं। युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रोहित मिश्रा भी पूर्वांचल के प्रतापगढ़ से हैं। महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष सरोज कुशवाह गाजीपुर और एसटी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष विद्याभूषण गोंड भी वाराणसी से हैं। पूरी लिस्ट देखिए- ————————– यह खबर भी पढ़ें – यूपी भाजपा की नई टीम में पूजा पाल उपाध्यक्ष बनीं, राजनाथ के छोटे बेटे की एंट्री, OBC की संख्या 16 से बढ़कर 25, ठाकुर-ब्राह्मण कम हुए विधानसभा चुनाव से पहले यूपी में गुरुवार को भाजपा की नई टीम का ऐलान कर दिया गया। 64 पदाधिकारियों की इस लिस्ट में 52 लोगों को प्रदेश कार्यकारिणी यानी प्रदेश टीम में जगह मिली है। इनमें 19 उपाध्यक्ष, 19 मंत्री, 8 महामंत्री और 6 मोर्चा अध्यक्ष हैं। इसके अलावा, 6 क्षेत्रीय अध्यक्ष, 3 कार्यालय मंत्री और 3 अन्य पदाधिकारी भी बनाए गए हैं। पढ़िए पूरी खबर…