हाईकोर्ट में UP सरकार बोली- चाइनीज मांझे पर कानून लाएंगे:पीड़ितों को मुआवजा मिलेगा; योगी ने कहा था- हत्या का मुकदमा चलेगा

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यूपी में चाइनीज मांझे को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान यूपी सरकार ने कोर्ट को बताया कि इस संबंध में हम नया कानून ला रहे हैं। इसका नाम उत्तर प्रदेश घातक मांझा (निर्माण, बिक्री और उपयोग निषेध) अधिनियम रखा जा सकता है। मांझे से प्रभावित लोगों को मुआवजा भी दिया जाएगा। अभी नए कानून का प्रस्ताव ड्राफ्टिंग और विचार-विमर्श के चरण में है। इस कानून के जरिए चाइनीज मांझा और कांच लगे धागों पर सख्त रोक लगाने की योजना है। जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यह मामला सीधे जीवन के अधिकार से जुड़ा है, इसलिए केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि जमीनी असर जरूरी है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को होगी। चाइनीज मांझे से मौतों पर 5 फरवरी को सीएम योगी ने कहा था कि अब मौतों पर हत्या का मुकदमा दर्ज होगा। यूपी में चाइनीज मांझे की बिक्री पर रोक
यूपी में चाइनीज मांझे की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध है। इसके बाद भी इसकी बिक्री हो रही है। भारत में सामान्य धागे से पतंग की डोर तैयार होती है, लेकिन चीन में नायलॉन के साथ मेटलिक पाउडर का उपयोग होता है। इसमें कांच और लोहे के चूरे को भी मिलाया जाता है ताकि धार और तेज हो। नायलॉन के धागे के कारण पेच लड़ने पर खिंचाव बढ़ता है और चाइनीज मांझा कटता नहीं है। कांच और लोहे का चूर्ण मिला यह मांझा गला रेतने के लिए पर्याप्त होता है। गृह विभाग सक्रिय, डीजीपी ने जारी किया सर्कुलर
सरकार ने कोर्ट को बताया कि 9 फरवरी, 2026 को गृह विभाग ने इस संबंध में नया शासनादेश जारी किया। इसके बाद 10 फरवरी को डीजीपी उत्तर प्रदेश ने सर्कुलर जारी कर कार्रवाई के निर्देश दिए। 17 अप्रैल को एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन भी किया गया है, जो इस पूरे मुद्दे की निगरानी कर रही है। इस समस्या से निपटने के लिए एक से अधिक विभागों की भूमिका अहम है। इसमें स्टेट टैक्स, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट, गृह और पर्यावरण विभाग शामिल हैं। अदालत को यह भी बताया गया कि पुलिस अधिनियम में आवश्यक संशोधन पर भी विचार हो रहा है और हाल ही में इस संबंध में विशेष अभियान भी चलाया गया। 2018 में दाखिल की गई थी याचिका
चाइनीज मांझे की बिक्री पर रोक लगाने के लिए 2018 में मोतीलाल यादव और रज्जन खान ने जनहित याचिका दाखिल की थी। राज्य सरकार की दलीलों पर गौर करते हुए हाईकोर्ट ने कहा, प्रस्तावित कानून पर विचार प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और अगली सुनवाई से पहले कोई ठोस कदम सामने आना चाहिए। अदालत ने कहा, इस अवैध और खतरनाक गतिविधि को रोकने के लिए निरंतर और नियमित प्रयास आवश्यक हैं। मांझे के दुष्प्रभावों को लेकर जागरूकता फैलाना भी जरूरी है। कार्रवाई के नाम पर हो रहा उत्पीड़न
सुनवाई के दौरान एडवोकेट सैयद मोहम्मद हैदर रिजवी ने पतंग और पारंपरिक मांझा बेचने वाले व्यापारियों की ओर से पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि चाइनीज मांझे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की आड़ में पारंपरिक और सुरक्षित पतंग सामग्री भी जब्त की जा रही है। व्यापारियों को परेशान किया जा रहा है। इस पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि केवल अवैध और खतरनाक मांझे पर ही कार्रवाई हो, जबकि वैध व्यापार करने वालों को परेशान न किया जाए। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मांगा जवाब
कोर्ट ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी इस मामले में उसकी भूमिका स्पष्ट करने को कहा है। बोर्ड को शपथपत्र दाखिल कर बताना होगा कि वह इस समस्या के समाधान में क्या कदम उठा रहा है? ‘हॉटस्पॉट एरिया’ चिन्हित करने का सुझाव
कोर्ट ने कहा कि हर शहर में कुछ ऐसे इलाके होते हैं जहां पतंगबाजी ज्यादा होती है। इन क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां विशेष निगरानी रखी जाए, ताकि अवैध मांझे की बिक्री और उपयोग पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। अगली सुनवाई 13 जुलाई, बड़े अधिकारियों को पेश होने का आदेश
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 तय की है। इस दौरान कई वरिष्ठ अधिकारियों जैसे गृह विभाग, स्टेट टैक्स, पर्यावरण विभाग और डीजीपी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट के सामने उपस्थित होकर उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी। —————– यह खबर भी पढ़िए… दूसरे युवक के साथ घूमने पर बॉयफ्रेंड ने मार डाला:युवती की लखनऊ में 4 दिन पहले हुई थी सगाई, रबर की पाइप से गला घोंटकर सिर कूचा लखनऊ में सगाई के चार दिन बाद हुई शिवानी सिंह (22) की हत्या का खुलासा हो गया है। बॉयफ्रेंड ने रबर की पाइप से गला घोंटकर उसकी हत्या की थी। सीमेंट की ईंट से सिर कूचकर शव को झाड़ियों में फेंक दिया। पूरी खबर पढ़ें