इंदौर में फिजिकल रिलेशन से नाखुश पत्नी ने मांगा तलाक:800 परिवारों के झगड़े समाज की पंचायत में सुलझे; 60% में ‘सेक्स’ असंतुष्टि बनी वजह

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इंदौर में एक महिला हर हाल में तलाक लेना चाहती थी। शादी के बाद से ही वह पति के साथ संबंध को लेकर संतुष्ट नहीं थी। ऐसे में पत्नी चाहती है कि वह जल्द से जल्द अपने पति को छोड़ दें। पति और उसका परिवार उसे रखना चाहते हैं। घर की चार दीवारों में शुरू हुआ विवाद बाहर आने लगा। कहासुनी बढ़ती जा रही थी। परिवार ने समाज की पंचायत के पास बात पहुंचाई। दोनों पक्षों को सुना गया। पत्नी के आरोपों की डॉक्टरों से जांच कराई गई। आखिरकार, मामला सुलझ गया। अब दोनों साथ में रहते हैं। आज 15 मई को परिवार दिवस है। इस मौके पर दैनिक भास्कर आपको इंदौर की आबादी में बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले सिंधी समाज के प्रयासों की कहानी बता रहा है। समाज के छोटे-छोटे झगड़ों को सुलझाने लिए 17 जुलाई 2023 से हुई पहल ने अब तक 800 से ज्यादा विवादों को सुना है। खास बात यह है कि जब समाज के मामलों को सुना गया तो इनमें ज्यादा पति-पत्नी में फिजिकल रिलेशन में असंतुष्टि के सामने आए। कई परिवार बिखरने की कगार पर थे, लेकिन समाज के पंचों की सूझ-बूझ से मामला न केवल सुलझा बल्कि आज वे परिवार सुखी जीवन जी रहे हैं। हर मामला अलग, उसे अलग तरीके से सुलझाया
केंद्र के संस्थापक सदस्य किशोर कोडवानी ने बताया कि हमारे पास अब तक आए कुल विवादों में 48% दाम्पत्य से जुड़े हैं। 18% पारिवारिक, 17% संपत्ति, 12% आर्थिक और 10% सामाजिक मामलों से संबंधित हैं। एक फीसदी मामले ऐसे भी थे, जो सुनवाई योग्य नहीं थे। ऐसे मामलों को निरस्त कर दिया गया। दाम्पत्य से जुड़े मामलों में 60% केस शारीरिक संबंधों में असंतोष से जुड़े हैं। इनमें मेडिकल, पारिवारिक परिस्थितियां, मेंटल कंडीशन, फिजिकल रिलेशन और लाइफ स्टाइल जैसे कारण शामिल हैं। कुछ विवाद मनोवैज्ञानिक आधार पर भी सामने आए हैं। ऐसे मामलों में हमने मनोवैज्ञानिकों की मदद से काउंसलिंग कराई है। डॉक्टरों से भी कराई जाती है काउंसलिंग मध्यस्ता केंद्र में पहुंचे विवादों में अगर कोई विवाद मेडिकल परिस्थितियों के कारण होता है तो हमारे समाज के डॉक्टरों से संवाद कर उसे सुलझाने की कोशिश की जाती है। हर मामला अलग होता है और उसे अलग तरीके से सुलझाना पड़ता है। कुछ झगड़े परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर भी सामने आए हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि लड़की आर्थिक रूप से सक्षम परिवार से आई है और लड़के का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है, तो दोनों की जीवनशैली और रहन-सहन में अंतर आ जाता है। रीति-रिवाजों में फर्क के कारण भी विवाद पैदा होते हैं। लड़कों की तुलना में लड़कियां ज्यादा अविवाहित सिंधी पंचायत ने समाज के विवाह योग्य युवक-युवतियों का सर्वे भी किया। उनके पास आए बायोडेटा में अलग-अलग ऐज ग्रुप में बड़ा अंतर देखने को मिला। सर्वे में पता चला कि 22 से 29 साल की उम्र के 34% लड़के और 39% लड़कियां अविवाहित हैं। यानी इस आयु वर्ग में लड़कों की तुलना में 5% लड़कियां ज्यादा अविवाहित हैं। वहीं, 30 से 40 साल की उम्र के 60% लड़के और 57% लड़कियां अविवाहित हैं।