झज्जर में किसानों पर बयान देकर घिरे OSD:वीरेंद्र बोले- ट्रैक्टर पर ₹10 हजार का साउंड सिस्टम लगवा सकते है; नंबर प्लेट नहीं

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झज्जर में सीएम सैनी के ओएसडी वीरेंद्र बड़खालसा ने किसानों को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने ‘किसान हितैषी’ जैसे शब्दों पर ही सवाल उठाते हुए इसे पक्षपातपूर्ण बताया और कहा कि किसी एक वर्ग के बजाय पूरे राष्ट्र के हित की सोच जरूरी है। ‘राष्ट्र हित पहले, किसान का हित अपने आप होगा वीरेंद्र बड़खालसा ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति या सरकार राष्ट्र के हित में काम करती है, तो किसान का हित अपने आप सुनिश्चित हो जाता है। उन्होंने साफ कहा कि “किसी विशेष वर्ग के हित की बात करना संतुलित सोच नहीं है, हमें किसान हितैषी नही राष्ट्र हितैषी होना चाहिए। मंडी समस्याओं पर किसानों को ही ठहराया जिम्मेदार मंडियों में गेट पास और टोकन को लेकर किसानों की परेशानियों के सवाल पर ओएसडी का जवाब भी चर्चा में है। उन्होंने इन समस्याओं को गंभीर मानने से इनकार करते हुए कहा कि कई बार लोग खुद छोटी-छोटी बातों को बड़ा बना देते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “आज किसान ट्रैक्टर पर 10 हजार रुपए का साउंड सिस्टम लगवा लेते हैं, लेकिन नंबर प्लेट लगवाने की बात आती है, तो रूपए ना होने के बहाने बनाते हैं। एक नंबर प्लेट के लिए मंडियों में झगड़ा करना गलत है।” ‘फोटो खिंचवाओ और फसल बेचो’—सरकार का नया सिस्टम ओएसडी ने दावा किया कि सरकार ने मंडियों में प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए बदलाव किए हैं। अब किसानों को ज्यादा भागदौड़ की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, “अब किसान फोटो खिंचवाकर सीधे अपनी फसल बेच सकते हैं। यह व्यवस्था इसलिए लागू की गई है ताकि किसी भी किसान का हक कोई न मार सके और पारदर्शिता बनी रहे।” ‘बदलाव जरूरी, नहीं तो समाज पिछड़ जाएगा’ वीरेंद्र बडखालसा ने अपने बयान में बदलाव की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जो समाज समय के साथ बदलाव नहीं अपनाता, वह पीछे रह जाता है। उनका कहना था कि हर व्यक्ति को बदलाव के लिए तैयार रहना चाहिए, तभी विकास संभव है। किसान और बाबा साहेब के नाम पर होती है राजनीति ओएसडी ने मौजूदा राजनीति पर भी निशाना साधते हुए कहा कि आज के समय में दो मुद्दों पर सबसे ज्यादा राजनीति होती है—किसान और भीमराव अंबेडकर। उन्होंने कहा, “किसी भी समाज को बांटकर देश को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। सभी वर्गों को साथ लेकर चलना जरूरी है।” ‘सरकार नहीं चाहती कोई दुखी हो’ उन्होंने अंत में कहा कि सरकार की मंशा साफ है और वह नहीं चाहती कि कोई भी व्यक्ति या किसान सरकारी व्यवस्था से परेशान हो। सरकार लगातार ऐसी नीतियां बना रही है जिससे पारदर्शिता बढ़े और किसानों को सुविधा मिले। फिलहाल, ओएसडी का यह बयान किसान संगठनों और विपक्ष के बीच चर्चा और प्रतिक्रिया का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में इस पर सियासत और तेज होने के आसार हैं।