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खेड़ा जिले में चितलाव-सरदारपुरा के बीच पुल हुआ धराशायी

दोनों गांवों का संपर्क टूटा, जनहानि टली, ग्रामीणों ने की वैकल्पिक मार्ग की मांग आणंद. खेड़ा जिले कीे ठासरा तहसील में चितलाव-सरदारपुरा गांवों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण पुल रविवार सुबह करीब 10 बजे अचानक धराशायी हो गया। पुल के अचानक टूटकर गिरने से दोनों गांवों का सीधा संपर्क पूरी तरह से टूट गया। हालांकि हादसे के समय पुल पर कोई वाहन या पैदल यात्री मौजूद नहीं था, जिसके चलते जनहानि टल गई। सूत्रों के अनुसार यह पुल माही नहर से अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए बनाई गई नहर पर स्थित था। पिछले कुछ समय से नहर में पानी का लगातार तेज बहाव होने के कारण पुल के नीचे बने पिलरों के आसपास की मिट्टी का बड़े पैमाने पर कटाव हो रहा था। मिट्टी के कटाव के कारण पुल के पिलर कमजोर हो गए थे। बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे घटनास्थल पर प्रारंभिक तौर पर माना जा रहा है कि पिलरों के कमजोर पड़ने के कारण पुल का पूरा ढांचा अचानक धंस गया और देखते ही देखते पुल का बड़ा हिस्सा नहर में जा गिरा। रविवार सुबह अचानक पुल टूटने की जोरदार आवाज सुनाई देने के बाद आसपास के बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंचे। ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर देखा तो पुल का एक बड़ा हिस्सा नहर में गिर चुका था और दोनों गांवों को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग पूरी तरह बंद हो गया था। चितलाव और सरदारपुरा गांव के लोगों के लिए यह पुल आवागमन का महत्वपूर्ण माध्यम था। दोनों गांवों के ग्रामीणों के अलावा किसान तथा स्कूल जाने वाले बच्चे भी रोजाना इसी मार्ग का उपयोग करते थे। पुल टूटने के बाद अब लोगों को दूसरे रास्तों से लंबा चक्कर लगाकर आवागमन करना पड़ेगा। पुल के धराशायी होने के बाद स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी देखने को मिली। ग्रामीणों का कहना है कि पुल के आसपास लंबे समय से हो रहे मिट्टी के कटाव पर यदि प्रशासन और संबंधित विभाग द्वारा समय रहते ध्यान दिया गया होता तो संभवत: यह हादसा टाला जा सकता था। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था करने की मांग की, ताकि दोनों गांवों के बीच आवागमन सुचारु हो सके। साथ ही ग्रामीणों ने आगामी बरसात और भविष्य की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए क्षतिग्रस्त पुल के स्थान पर जल्द से जल्द नए और मजबूत पुल का निर्माण कराने की मांग की है।