यूपी के पुलिस विभाग में बड़ी जिम्मेदारियां कुछ अफसरों तक सीमित हैं। सीनियर होने के बाद भी कई अधिकारियों को काम नहीं दिया गया है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण 1990 बैच की IPS रेणुका मिश्रा हैं, जो पिछले 2 साल से बिना किसी जिम्मेदारी के हैं। 7 साल से सस्पेंड चल रहे जसवीर सिंह भी इसी लिस्ट में शामिल हैं। इसके उलट कार्यवाहक DGP राजीव कृष्ण, DG आलोक सिंह और गैंगस्टर एक्शन का चेहरा रहे ADG अमिताभ यश जैसे अफसर एक साथ कई यूनिट का अतिरिक्त चार्ज संभाल रहे हैं। पढ़िए यह रिपोर्ट… पहले साइडलाइन अधिकारियों के बारे में जानिए यूपी पुलिस की सबसे सीनियर अफसर के पास काम नहीं रेणुका मिश्रा यूपी पुलिस की सबसे सीनियर IPS अफसर हैं। 1990 बैच की ऑफिसर को फरवरी, 2024 में सिपाही भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड से हटा दिया गया था। 3 महीने वेटिंग पर रखने के बाद उन्हें DGP ऑफिस में अटैच कर दिया गया। जबकि, रेणुका मिश्रा मौजूदा कार्यवाहक DGP राजीव कृष्ण (1991 बैच) से सीनियर हैं। 2 साल से ज्यादा वक्त बीतने के बाद भी उनके पास कोई काम नहीं है। एंटनी देव कुमार शंटिंग पोस्ट पर इसी तरह ADG रूल्स एंड मैन्युअल की पोस्ट को भी शंटिंग पोस्ट माना जाता है। इस पोस्ट पर एंटनी देव कुमार तैनात हैं। इनके पास भी काम ना के बराबर होता है। हालांकि, उनका रिटायरमेंट भी करीब है। एंटनी देव कुमार का करियर सिर्फ देश तक ही सीमित नहीं रहा। उन्होंने वैश्विक स्तर पर भी अपनी सेवाएं दी हैं। उन्हें 2004-05 में यूनाइटेड नेशंस अंतरिम एडमिनिस्ट्रेशन मिशन इन कोसोवो (UNMIK) मेडल से सम्मानित किया जा चुका है। 7 साल से सस्पेंड हैं जसवीर सिंह 1992 बैच के IPS और ADG रैंक के अफसर जसवीर सिंह 7 साल से सस्पेंड हैं। उन्हें 14 फरवरी, 2019 को सेवा नियमावली उल्लंघन के आरोप में सस्पेंड किया गया था। इसके बाद जांच भी हुई, लेकिन किसी नतीजे तक नहीं पहुंची। नवनीत सिकेरा पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में तैनात इसके अलावा उन्नाव में पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में ADG नवनीत सिकेरा मार्च, 2022 से तैनात हैं। जबकि, जालौन पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में उनसे दो रैंक नीचे यानी DIG रैंक के अफसर की तैनाती है। वहीं, सुल्तानपुर और मुरादाबाद पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में नवनीत सिकेरा से तीन रैंक नीचे के अफसर (SP रैंक) की तैनाती है। अब वे अफसर, जिनके पास एक्सट्रा चार्ज कौन हैं सीएम के 3 सबसे भरोसेमंद अफसर मुख्यमंत्री के भरोसेमंद पुलिस अफसरों में पहला नाम DGP राजीव कृष्ण का नाम आता है। यूपी में जब भाजपा की सरकार बनी, तब वे ADG रैंक के अफसर थे और केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर थे। लौटने पर उन्हें बीआर अंबेडकर पुलिस अकादमी, मुरादाबाद में पोस्टिंग दी। दरअसल, राजीव खुद वहां पोस्टिंग चाहते थे, क्योंकि तब तक उनकी फैमिली दिल्ली में ही थी। कुछ ही दिन बाद मुख्यमंत्री ने उन्हें पहले लखनऊ और फिर आगरा जोन के ADG की जिम्मेदारी दी। साल- 2024 में DG रैंक पर प्रमोशन के बाद उन्हें विजिलेंस विभाग में पोस्टिंग दी गई, जिसका चार्ज अभी भी उनके पास है। पिछले साल प्रशांत कुमार के रिटायर होने के बाद उन्हें कार्यवाहक DGP बनाया गया। PAC की जिम्मेदारी संभाल रहे DG आलोक सिंह की गिनती भी मुख्यमंत्री के खास अफसरों में होती है। योगी आदित्यनाथ जब मुख्यमंत्री बने, तब आलोक सिंह IG रैंक के अफसर थे और केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटे ही थे। शुरुआत में उन्हें PAC के ईस्ट जोन का IG बनाया गया। फिर एक ही महीने बाद ही उन्हें कानपुर रेंज का IG बना दिया गया। करीब सवा दो साल बाद उन्हें जुलाई, 2019 में मेरठ रेंज का IG बनाया गया। यहीं से इनका प्रमोशन ADG रैंक पर हुआ। इसी दौरान यूपी में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू हुआ। आलोक सिंह को गौतमबुद्धनगर का पहला पुलिस कमिश्नर बनाया गया। करीब 3 साल वहां रहने के बाद उन्हें कानपुर जोन की जिम्मेदारी दी गई। इसके करीब सवा तीन साल के बाद DG रैंक पर प्रमोशन के बाद PAC की जिम्मेदारी सौंपी गई। ADG अमिताभ यश भी मुख्यमंत्री के भरोसेमंद अफसरों में गिने जाते हैं। 2017 में अमिताभ IG रेलवे के पद पर तैनात थे। भाजपा सरकार आते ही मई, 2017 में उन्हें स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का जिम्मा दिया गया। 1 जनवरी, 2020 को ADG रैंक पर प्रमोशन के बाद भी मुख्यमंत्री ने उन्हें STF में ही रखा। यही वजह है कि वे सबसे लंबे समय तक STF चीफ रहने का रिकॉर्ड बना चुके हैं। 2024 में प्रशांत कुमार को स्पेशल DG लॉ एंड ऑर्डर से DGP बनाए जाने के बाद अमिताभ को प्रदेश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई। एक्सपर्ट व्यू जिम्मेदारी उस अधिकारी को ज्यादा, जो पसंद का हो सीनियर जर्नलिस्ट राजेंद्र कुमार कहते हैं- यूपी में साइबर क्राइम बड़ी समस्या है। ऐसे में जो अधिकारी उस यूनिट को देख रहा होगा, वो दूसरी यूनिट को समय नहीं दे पाएगा। ऐसा सभी के साथ होता है। साथ ही अलग-अलग यूनिट के अलग-अलग जगहों पर ऑफिस हैं। एक ही दिन में अधिकारी को दो जगहों पर बैठना होगा, तो वहां आने-जाने में भी समय खर्च होता है। जब एक अधिकारी एक यूनिट में पूरा समय नहीं देता, तो वहां काम पर असर पड़ना स्वाभाविक है। वहीं, इसका दूसरा पहलू यह भी है कि अगर सरकार को लगता है कि एक अधिकारी दो-तीन यूनिट संभाल सकता है, तो अधिकारियों की संख्या कम कर लेनी चाहिए। इससे सरकारी खर्च भी बचेंगे। ————————- ये खबर भी पढ़ें… यूपी को 15 दिन में मिलेगा स्थायी DGP, राजीव कृष्ण 3 सीनियरों को पछाड़कर सबसे आगे, रेणुका के नाम पर भी चर्चा यूपी में स्थायी DGP की नियुक्ति को लेकर हलचल तेज हो गई है। सीनियर अधिकारियों के मुताबिक, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) 15 दिनों में टॉप-3 IPS अफसरों की लिस्ट यूपी सरकार को भेजेगा। उनमें राजीव कृष्ण का नाम भी शामिल होगा। पूरी खबर पढ़ें…
सबसे सीनियर IPS के पास 2 साल से काम नहीं:DGP समेत कई के पास एक्स्ट्रा चार्ज; यूपी पुलिस में अफसरों की कमी या भरोसे की?
