हरियाणवी म्यूजिक इंडस्ट्री के चर्चित गायक मासूम शर्मा हाल ही में संत अनिरुद्धाचार्य महाराज के दरबार में पहुंचे, जहां आस्था, संस्कृति और जीवन मूल्यों पर एक दिलचस्प संवाद देखने को मिला। बातचीत की शुरुआत सहज अभिवादन से हुई, लेकिन जल्द ही यह चर्चा पाप-पुण्य, खानपान और भारतीय बनाम पश्चिमी संस्कारों जैसे गंभीर विषयों तक पहुंच गई। मासूम शर्मा ने अपने बेटे को दी गई सीख के संदर्भ में मांसाहार को लेकर सवाल उठाया, जिसका संत अनिरुद्धाचार्य ने अपने खास अंदाज में विस्तार से जवाब दिया। यह संवाद केवल दो व्यक्तियों के बीच बातचीत नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आधुनिक जीवनशैली के बीच टकराव की एक झलक बनकर सामने आया। इस दौरान अनिरुद्धाचार्य के आश्रम में रह रही अलग-अलग माताओं से भी मासूम शर्मा ने मिलकर आशीर्वाद लिया। जहां वीडियो में खुद अनिरुद्धाचार्य बुजुर्ग महिलाओं को बता रहे हैं कि यह मासूम शर्मा सिंगर है। दरबार में पहुंचते ही संवाद की शुरुआत मासूम शर्मा ने दरबार में पहुंचकर संत अनिरुद्ध आचार्य जी महाराज को प्रणाम करते हुए कहा, “गुरुजी राधे-राधे।” इस पर महाराज ने मुस्कुराते हुए पूछा, “कैसे हैं?”
मासूम शर्मा ने जवाब दिया, “अच्छे हैं, और आपके दर्शन करके और बढ़िया हो गए हैं।” इसके बाद उन्होंने अपनी जिज्ञासा रखते हुए कहा कि गुरुजी उनका एक सवाल है, जो पाप-पुण्य और मांसाहार से जुड़ा हुआ है। बच्चों को मिलने वाले संस्कार पर सवाल मासूम शर्मा ने कहा कि उन्होंने अपने बेटे को सिखाया है कि मांस खाना गलत है। लेकिन जब वह यूरोप के कई देशों में घूमकर आए, तो वहां उन्होंने देखा कि माता-पिता अपने बच्चों को मांस खाने से नहीं रोकते। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर वहां के बच्चे मांस खाते हैं, तो क्या उन्हें पाप लगेगा? क्या इसमें उनकी कोई गलती है? क्योंकि उन्हें बचपन से यही सिखाया गया है।
अनिरुद्ध आचार्य बोले- संस्कार केवल भारत में हैं महाराज अनिरुद्ध आचार्य ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा कि विदेशों में भारतीय संस्कृति और संस्कार नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि संस्कार केवल भारत में ही हैं और मांसाहार की तुलना दुनिया से नहीं करनी चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि शेर मांस खाता है और कुत्ता भी मांस खाता है। और फिर मासूम शर्मा से पूछा कि ऐसा क्यों होता है। इस पर मासूम शर्मा ने जवाब दिया कि यह उनकी प्रवृत्ति है। विदेशों में खाने के विकल्प कम अनिरुद्ध आचार्य महाराज ने कहा कि अमेरिका, लंदन जैसे देशों में पहले खाने के विकल्प नहीं थे। उन्होंने कहा कि 100 साल पुराना इतिहास उठाकर देखिए, वहां शाकाहारी विकल्प बहुत सीमित थे। इस पर मासूम शर्मा ने कहा कि पहले नहीं थे, लेकिन अब तो हैं। महाराज ने जवाब देते हुए कहा कि जब पहले से ही वहां मांस खाने की परंपरा बन गई, तो वही आगे चलती रही। अगर किसी को धीरे-धीरे सात्विक भोजन दिया जाए, तो वह उसे अपनाने लगता है।
भारत के पास ‘छप्पन भोग’ का विकल्प महाराज ने कहा कि भारत के पास खाने के असंख्य विकल्प हैं, जिसे “छप्पन भोग” कहा जाता है, जबकि दुनिया के कई हिस्सों में विकल्प सीमित रहे हैं। उन्होंने कहा, “जिसके पास विकल्प नहीं है, वह मांस खाता है, लेकिन हमारे पास इतने विकल्प हैं, तो हम मांस क्यों खाएं?” महापुरुषों के रास्ते पर चलने की सीख अनिरुद्ध आचार्य महाराज ने कहा कि हमें दूसरों की नकल नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण तथा अन्य महापुरुषों ने मांसाहार नहीं किया, इसलिए हमें भी उसी मार्ग पर चलना चाहिए। उन्होंने कहा, “हम यह क्यों सोचें कि दूसरे क्या करते हैं, बल्कि यह देखें कि हमारे महापुरुषों ने क्या किया।” पश्चिमी जीवनशैली पर भी उठाए सवाल महाराज ने पश्चिमी देशों की जीवनशैली का जिक्र करते हुए कहा कि वहां विवाह जैसी परंपराएं भी अलग हैं। उन्होंने कहा कि कई देशों में लोग शादी किए बिना साथ रहते हैं, लेकिन भारत में यह संस्कृति स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “अमेरिका का रंग हमारे देश में नहीं आ सकता, क्योंकि भारत की अपनी परंपराएं और संस्कार हैं।” इस पूरे संवाद में एक ओर जहां मासूम शर्मा ने आधुनिक दुनिया और अपने अनुभवों के आधार पर सवाल उठाए, वहीं, अनिरुद्ध आचार्य महाराज ने भारतीय संस्कृति, परंपरा और संस्कारों को प्राथमिकता देने की बात कही।
अनिरुद्धाचार्य महाराज के दरबार में पहुंचे मासूम शर्मा:सिंगर बोले-मांस खाने पर पाप लगेगा या नहीं; कथावाचक बोले-वो बिना शादी के साथ भी रहते हैं
