लखनऊ के गोमतीनगर स्थित निजी अस्पताल, आईपीएस हॉस्पिटल में इलाज के दौरान महिला की मौत मामले में आठ महीने के बाद पुलिस ने अस्पताल के तीन डॉक्टर समेत स्टाफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की कमेटी ने अस्पताल को दोषी ठहराते हुए बीते माह संचालन पर रोक लगाई थी। आरोप है अस्पताल के जरिये कमेटी को इलाज से जुड़े दस्तावेज मुहैया नहीं कराया था। जानकारी के मुताबिक, बाराबंकी सतरिख भटौली गांव के रहने वाले संजय यादव की पत्नी रोशनी 24 को बीते साल 27 सितंबर को बुखार व सिर दर्द की शिकायत होने पर परिजनों ने गोमतीनगर खरगापुर स्थित आईपीएस हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। डॉ. यूसूफ खांन ने सामान्य बीमारी बताकर भर्ती किया था। डॉक्टर ने बीमारी के आधार पर सीटी स्कैन समेत खून से जुड़ी जांच कराई। पति संजय का आरोप है जांच रिपोर्ट सामान्य आई थी। जबरन नाक में नली डाली बावजूद इसके अस्पताल के डॉ.भूपेंद्र ने 29 की रात जबरन नाक में नली डाल दिया था। इससे मरीज को सांस लेने में तकलीफ होने लगी। परिजनों ने विरोध जताया तो नली को निकाल दिया गया। हालत नाजुक होता देख स्टाफ वहां से भाग गए। पति संजय ने डॉ. युसूफ को कई दफा फोन किया मगर उनके जरिये फोन नहीं उठाया गया था। देर रात इलाज के दौरान मरीज की मौत हो गई थी। पति ने मुकदमा दर्ज करने के लिए थाने में तहरीर दिया था। पुलिस ने सीएमओ ऑफिस से जांच रिपोर्ट आने के बाद मुकदमा दर्ज करने की बात कही थी। कार्रवाई न होने पर आयोग ने किया तलब
कई माह बीतने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच तक नहीं कराई। पति ने उप्र मानव अधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया था। मानव अधिकार आयोग ने डीएम-सीएमओ को पत्र भेजकर रिपोर्ट तलब किया था। पूरे मामले की जांच रिपोर्ट 12 जनवरी 2026 संग आयोग में तलब किया था। कमेटी ने अस्पताल से इलाज से जुड़े दस्तावेज मांगने संग डॉक्टर को बयान दर्ज करने के लिए तलब किया था। आरोप है अस्पताल ने कोई भी साक्ष्य मुहैया नहीं कराया था। ऐसे में कमेटी ने अस्पताल को दोषी ठहराते हुए मानवाधिकार आयोग रिपोर्ट भेज दिया था। पति संजय यादव ने अस्पताल के डॉ. यूसुफ खांन उफ यू खान, डॉ. भूपेंद्र, डॉ. अभिषेक समेत अन्य स्टाफ के खिलाफ गोमतीनगर विस्तार थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
लखनऊ में डॉक्टरों समेत स्टॉफ के खिलाफ FIR:8 महीने बाद पीड़ित की सुनवाई, इलाज के दौरान महिला की मौत का मामला
