गुजरात के गवर्नर आचार्य देवव्रत ने चलाई साइकिल:ट्रेन में दिल्ली से पहुंचे कुरुक्षेत्र, बोले- बस-रेल से करुंगा यात्रा, काफिले में 3 गाड़ियां

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हरियाणा के कुरुक्षेत्र शहर में आज गुरुवार को अलग ही तस्वीर देखने को मिली। यहां गुजरात के गवर्नर आचार्य देवव्रत ने साइकिल चलाई। वे साइकिल चलाकर गुरुकुल कुरुक्षेत्र के लिए रवाना हुए। उनकी सिक्योरिटी टीम साइकिल पर उनके साथ चल रही थी। वे अपनी पत्नी दर्शना देवी के साथ दिल्ली से ट्रेन में कुरुक्षेत्र पहुंचे थे। यहां रेलवे स्टेशन पर गुरुकुल स्टाफ की ओर से उनका स्वागत किया गया। गवर्नर आचार्य देवव्रत रेलवे स्टेशन से करीब 3 किलोमीटर दूर तक साइकिल चलाकर गुरुकुल कुरुक्षेत्र तक पहुंचे। उनके काफिले के आगे सिर्फ 2 गाड़ियां चल रही थी। ये गाड़ी भी इलेक्ट्रिक (EV गोल्फ कार्ट) थी। काफिले में रहेगी सिर्फ 3 गाड़ी मीडिया से बातचीत में गवर्नर आचार्य देवव्रत ने साफ कहा कि मैंने फैसला लिया है कि जब तक तेल की स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक मैं हवाई जहाज और हेलिकॉप्टर का प्रयोग नहीं करूंगा। मेरी यात्राएं ट्रेन, बस और साइकिल से होगी। मेरे काफिले में 3 से ज्यादा गाड़ियां नहीं रहेगी। ट्रेन, बस और साइकिल से यात्रा गवर्नर ने कहा कि एशिया और दुनिया के कई हिस्सों में लंबे समय से तनाव और युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं। इस संघर्ष का असर तेल आपूर्ति पर पड़ा है। इससे भारत में तेल के आयात पर बुरा प्रभाव पड़ा है। ऐसे समय में हर देशवासी का कर्तव्य बनता है कि वह प्रधानमंत्री के आह्वान को स्वीकार करे और तेल की बचत करे। स्वदेशी अपनाना जरूरी कहा कि विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता कम करनी होगी और स्वदेशी को अपनाना होगा, ताकि देश आर्थिक रूप से और मजबूत बन सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को विकसित भारत की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। पिछले कई वर्षों में हुआ विकास इसका प्रमाण है। ट्रेन से जाएंगे वापस कहा कि वे ट्रेन से कुरुक्षेत्र आए हैं और वापस भी ट्रेन से ही जाएंगे। वे गांवों में रात्रि प्रवास के दौरान सरकारी स्कूलों और अनुसूचित जाति-जनजाति परिवारों में रुकते हैं। वहां जनसभाएं कर लोगों को पशुपालन, गौ आधारित खेती, बच्चों में संस्कार, नशामुक्ति और स्वच्छता के लिए जागरूक कर रहे हैं और ये फोटो खिंचवाने तक सीमित नहीं है। प्राकृतिक खेती की जरूरत उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की। कहा कि देश हर साल यूरिया पर ढाई लाख करोड़ रुपए खर्च करता है। अगर किसान रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती अपनाएं तो धरती, पानी और पर्यावरण को बचाया जा सकता है। साथ ही कैंसर, हार्टअटैक, डायबिटीज और दूसरी गंभीर बीमारियों से भी राहत मिलेगी।