करनाल शहर में ठगी का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक व्यक्ति खुद को हरियाणा के लीगल मैट्रोलॉजी (मापतोल विभाग) का अधिकारी बताकर फैक्ट्रियों में रेड डाल रहा था। आरोपी न केवल फर्जी चालान काट रहा था, बल्कि दुकानदारों से हजारों रुपए भी वसूल चुका था। जब उसका पाला एक फैक्ट्री संचालक से पड़ा, तो ‘नकली साहब’ की सारी हेकड़ी धरी की धरी रह गई। फर्जी इंस्पेक्टर का खुलासा होने पर अन्य पीड़ितों को बुलाकर पैसे वापस कराए गए। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी। कांटे चेकिंग के नाम पर बनाया दबाव सुप्रीम कूलर फैक्ट्री के संचालक के अनुसार, एक व्यक्ति फैक्ट्री में पहुंचा और खुद को मापतोल विभाग का अधिकारी बताते हुए कांटों की चेकिंग की मांग करने लगा। संचालक ने बताया कि फैक्ट्री में केवल कूलर बनाने का काम होता है, तौल का कोई कार्य नहीं होता। इसके बावजूद आरोपी ने बहस शुरू कर दी और कार्रवाई की धमकी देने लगा। फर्जी चालान बुक और पहले से लगी स्टैंप संचालक ने बताया कि आरोपी ने फर्जी चालान बुक निकाली और चालान काट दिया। उस बुक पर पहले से ही लीगल मैट्रोलॉजी इंस्पेक्टर की साइन और स्टैंप लगी हुई थी। जब उससे अधिकारिता पूछी गई तो उसने फोन में एक लाइसेंस की फोटो दिखाकर खुद को अधिकृत बताया। कांटे रिपेयर करने का लाइसेंस मिला जांच में सामने आया कि आरोपी के पास केवल कांटे रिपेयर करने का लाइसेंस है, जो लीगल मैट्रोलॉजी विभाग द्वारा जारी किया जाता है। इस लाइसेंस के आधार पर किसी फैक्ट्री में निरीक्षण या चालान काटने का अधिकार नहीं होता। इसके बावजूद आरोपी खुद को सरकारी इंस्पेक्टर बताकर कार्रवाई करता रहा। दुकानदार से वसूले 5400 रुपए, मौके पर लौटाए फैक्ट्री संचालक ने बताया कि आरोपी ने एक अन्य दुकानदार से भी 5400 रुपए वसूले थे। जब उस दुकानदार को बुलाया गया तो आरोपी से मौके पर ही पैसे वापस करवाए गए। आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने रकम ली थी और उसे लौटा दिया। फर्जी मोहर और पैड से कर रहा था कार्रवाई आरोपी की चालान बुक की जांच में पता चला कि वह 2025 से इस तरह के फर्जी चालान काट रहा है। उसने “हरियाणा लीगल मैट्रोलॉजी इंफोर्समेंट” के नाम से खुद की पैड और मोहर बनवा रखी थी। सवाल यह भी उठ रहा है कि नोटिस बुक पर पहले से इंस्पेक्टर की साइन और स्टैंप कैसे लगी हुई थी और विभाग को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली। आरोपी ने माना- चालान काटने की अथॉरिटी नहीं करनाल निवासी पवन कुमार ने स्वीकार किया कि उसके पास कांटे रिपेयर करने का लाइसेंस है, लेकिन चालान काटने की अथॉरिटी नहीं है। उसने कहा कि उसने केवल नोटिस दिया था और फैक्ट्री संचालक के दबाव में पैसे लौटाए। पवन ने बताया कि उसकी फर्म “शिवा” नाम से चलती है और वह कांटों की पासिंग के पैसे लेता है। पुलिस ने हिरासत में लिया, सीआईए-3 करेगी पूछताछ मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। पुलिस के अनुसार, आरोपी धर्मकांटों की चेकिंग और बिल काटने का काम कर रहा था। अब उसके पास मौजूद सभी दस्तावेजों की जांच की जाएगी। आरोपी को सीआईए-3 करनाल को सौंपा गया है, जहां उससे गहन पूछताछ कर पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।
करनाल में ‘फर्जी इंस्पेक्टर’ का भंडाफोड़:मापतोल अधिकारी बनकर काट रहा था चालान; कूलर फैक्टरी में वसूली को पहुंचा
