बहादुरगढ़ के फैक्ट्री ब्लास्ट हादसे में मजदूर का शव मिला:मलबे के नीचे से निकाला, बिहार का रहने वाला; बिना लाइसेंस के चल रही थी फैक्ट्री

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झज्जर के बहादुरगढ़ में MIE पार्ट-B स्थित प्लॉट नंबर-2224 में बनी एडहेसिव और कैमिकल फैक्ट्री में हुए बॉयलर ब्लास्ट ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। शुक्रवार को हुए धमाके में दो मंजिला इमारत का लेंटर भरभराकर गिर गया और पूरी फैक्ट्री आग की चपेट में आ गई। कल हुए हादसे के बाद शनिवार को मलबे से एक श्रमिक का शव बरामद हुआ है, जिसकी पहचान बिहार के खगड़िया निवासी करीब 25 वर्षीय शैलेश के रूप में हुई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री बिना किसी वैध लाइसेंस और सरकारी अनुमति के संचालित की जा रही थी। हादसे के बाद से लापता था शैलेश जानकारी के अनुसार, शैलेश बहादुरगढ़ के छोटूराम नगर में रहकर दिहाड़ी मजदूरी करता था। वह पिछले दो दिनों से फैक्ट्री में चिनाई मजदूरी करने आ रहा था। हादसे के समय वह भी फैक्ट्री के अंदर मौजूद था और मलबे में दब गया। शुक्रवार को उसका कोई सुराग नहीं लग पाया था। घर नहीं लौटने पर परिजनों की चिंता बढ़ गई। परिवार के लोग उसे घायलों में तलाशते हुए पीजीआई रोहतक तक पहुंचे। शनिवार को सर्च अभियान के दौरान उसका शव बरामद हुआ। एक बच्चे का पिता था, मजदूरी कर परिवार पालता था बताया जा रहा है कि शैलेश एक बेटे का पिता था और मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करता था। शैलेश का शव देखते ही परिजनों में मातम छा गया। शव को बहादुरगढ़ के नागरिक अस्पताल में रखवाया गया है, जहां रविवार को पोस्टमॉर्टम होगा। हादसे के बाद लगी आग में 5 श्रमिक झुलसे से इस हादसे में पांच अन्य श्रमिक झुलस गए थे, जिनमें चार पीजीआई रोहतक और एक निजी अस्पताल में भर्ती है। हादसे के बाद से शनिवार दोपहर तक मलबा हटाकर लगातार सर्च अभियान चलाया गया। एसीपी बोले- मलबे में शैलेश का शव बरामद हुआ मौके पर एसीपी प्रदीप खत्री, एसएचओ महेंद्र सिंह, चौकी प्रभारी संदीप हुड्डा समेत पुलिस और एफएसएल टीम ने जांच की। एसीपी प्रदीप खत्री ने बताया कि एक व्यक्ति के लापता होने की सूचना मिली थी, जिसके बाद मजदूर बुलाकर मलबा हटवाया गया और इस दौरान शैलेश का शव बरामद हुआ। मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। आज मौके पर पहुंची डीसी हादसे के बाद डीसी झज्जर वर्षा खांगवाल भी मौके पर पहुंचीं और पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। डीसी ने अधिकारियों के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया और पूरे मामले की गहन जांच के निर्देश दिए। डीसी ने कहा कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री में बिना अनुमति के बॉयलर चलाया जा रहा था। मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। SDM की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की डीसी ने बताया कि एसडीएम की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित कर दी गई है, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों को शामिल किया गया है। कमेटी हादसे के कारणों, सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक लापरवाही की जांच कर रिपोर्ट सौंपेगी। उन्होंने कहा कि अब पूरे औद्योगिक क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर फैक्ट्रियों की जांच की जाएगी। जिन इकाइयों में बिना लाइसेंस संचालन, सुरक्षा मानकों की अनदेखी या अन्य खामियां मिलेंगी, उनके खिलाफ तुरंत प्रभाव से सख्त कार्रवाई की जाएगी। फैक्ट्री मालिक का मोबाइल बंद, फरार जांच में यह भी सामने आया है कि फैक्ट्री ने श्रम विभाग से फैक्ट्री एक्ट के तहत जरूरी लाइसेंस नहीं लिया था। वहीं हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी संचालन की अनुमति नहीं ली गई थी। हादसे के बाद फैक्ट्री मालिक का मोबाइल बंद मिला और वह फरार बताया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारी उसकी तलाश में जुटे हैं। पहले भी हुआ था ऐसा हादसा स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्ष 2020 में भी इसी औद्योगिक क्षेत्र में इसी तरह का बड़ा बॉयलर ब्लास्ट हुआ था, जिसमें 11 लोगों की मौत हुई थी। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए। अब छह साल बाद फिर हुए इस हादसे ने प्रशासनिक निगरानी और औद्योगिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।