तमिलनाडु में नए लोगों को मौका मिला। अगर 2 साल पहले बनी पार्टी सरकार बना सकती है, तो यूपी में आजाद समाज पार्टी ये कारनामा क्यों नहीं कर सकती? बस ताकत लगाने की जरूरत है। यूपी में हमारी सत्ता होगी। – चंद्रशेखर, 6 मई, सहारनपुर यह जोश सिर्फ बयान तक सीमित नहीं है। चंद्रशेखर 2 जून से ‘सत्ता परिवर्तन यात्रा’ शुरू करने वाले हैं। उनके कार्यकर्ता यूपी के सभी 403 विधानसभा में जनता से समर्थन मांगेंगे। फिल्म स्टार थलापति विजय ने अपने जीवन के पहले ही चुनाव में 234 में से 118 सीट जीतकर सबको चौंका दिया। वह अब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री हैं। आजाद समाज पार्टी के एक सीनियर लीडर ने बताया कि इस महीने चंद्रशेखर तमिलनाडु जाएंगे। वहां मुख्यमंत्री विजय के साथ सियासी जीत के फॉर्मूले को समझेंगे। पूरी रिपोर्ट पढ़िए… दोनों नेताओं के बारे में जानिए… विजय साउथ के सुपरस्टार, चंद्रशेखर दलितों के हीरो
विजय साउथ फिल्मों के सुपरस्टार हैं। पॉलिटिक्स में एंट्री के लिए उन्होंने अपनी फिल्मों को बेस बनाया। फिल्मों में जीएसटी, किसानों की खराब हालत और कॉर्पोरेट करप्शन को टारगेट किया। इससे तमिलनाडु की जनता उन्हें ‘थलापति’ (कमांडर) कहने लगी। विजय ने अपने फैन क्लब विजय मक्कल इयक्कम (VMI) के जरिए हर ब्लॉक में लाइब्रेरी, एम्बुलेंस और फूड डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर खुलवाए। इससे जनता का विश्वास बढ़ा। इसके बाद 2 फरवरी, 2024 को अपनी पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) लॉन्च की। इस तरह से वो पॉलिटिक्स में आ गए। चंद्रशेखर ने छात्र राजनीति से पॉलिटिक्स में एंट्री ली। 2015 में लॉ की पढ़ाई के दौरान ‘भीम आर्मी’ नाम का संगठन बनाया। 2017 में सहारनपुर हिंसा में जेल गए। नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) की धाराएं लगीं। जेल से आने के बाद वे छात्र नेता से ‘दलितों के हीरो’ बन गए। क्योंकि, मैसेज गया कि चंद्रशेखर दलितों की बात करते हैं, उनकी आवाज उठाते हैं। 15 मार्च, 2020 को कांशीराम जयंती पर आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) (ASP) लॉन्च की। अब यूपी-तमिलनाडु की पॉलिटिक्स को समझिए… तमिलनाडु में फिल्मी सितारों का अहम रोल, यूपी में जाति-धर्म बड़ा फैक्टर तमिलनाडु का चुनावी नैरेटिव जाति से शुरू होकर राज्य के अधिकारों पर खत्म होता है। यहां फिल्मी सितारे भी अहम रोल निभाते हैं। लोग उन्हें देवता की तरह पूजते हैं। एमजी रामचंद्रन पहले ऐसे सुपरस्टार थे, जो 10 साल तक मुख्यमंत्री रहे। जे. जयललिता भी सिनेमा की बड़ी स्टार थीं। बाद में ‘अम्मा’ के रूप में राजनीति की सबसे ताकतवर महिला बनीं। एम. करुणानिधि स्क्रिप्ट राइटर थे। उनकी फिल्मों के डायलॉग्स ने द्रविड़ राजनीति की नींव रखी। विजय इसी ‘स्टार-टु-लीडर’ वाली विरासत के नए उत्तराधिकारी हैं। सीनियर जर्नलिस्ट रतनमणि लाल कहते हैं- यूपी की राजनीति बिल्कुल अलग है। यहां जाति और धर्म बहुत बड़ा फैक्टर है। चंद्रशेखर के लिए यूपी में सरकार बनाना इतना आसान नहीं है। तमिलनाडु में विजय के फैन क्लब्स ने ब्लॉक स्तर पर उनकी इमेज बनाई। विजय हर जाति-धर्म को साथ लेकर चलने की बात कहते हैं। अब-तक कोई विवादित बयान नहीं दिया। एक सॉफ्ट इमेज फिल्म एक्टर होने से वे जनता के करीब आ गए। तमिलनाडु में सभी वर्गों को कैसे साधा, ये समझेंगे चंद्रशेखर चंद्रशेखर की तैयारियों को समझने के लिए दैनिक भास्कर ने आजाद समाज पार्टी के एक सीनियर लीडर से बात की। वह कहते हैं- यूपी में सभी वर्गों को साधने की चुनौती है। लेकिन, ऐसी ही चुनौती विजय के सामने तमिलनाडु में भी थी। उन्होंने सब वर्गों को साधने के लिए क्या स्ट्रैटजी अपनाई। यही समझने के लिए चंद्रशेखर इसी महीने तमिलनाडु जाएंगे। वह वहां मुख्यमंत्री विजय से मुलाकात करेंगे। उनके तमिलनाडु जीत के उस फॉर्मूले को समझेंगे, जो यूपी में मददगार साबित हो सकता है। जाटव समाज के वोट से मजबूत हुए चंद्रशेखर 2024 लोकसभा चुनाव में बसपा का वोट 2019 के मुकाबले 9.9% गिर गया। 2019 में बसपा को 19.4% वोट मिले थे। वहीं, 2024 में सिर्फ 9.5% वोट मिले। माना गया कि इसका एक हिस्सा चंद्रशेखर की पार्टी की ओर शिफ्ट हो गया। आंकड़ों के मुताबिक, दलित, खासकर जाटव युवाओं ने सपा-बसपा के बजाय चंद्रशेखर की पार्टी को वोट दिया। मुस्लिम वोटबैंक की बात करें तो 2022 तक ये सपा, बसपा और कांग्रेस में बंट जाता था। लेकिन, 2024 चुनाव में 90% से ज्यादा मुस्लिम वोट इंडिया गठबंधन (सपा+कांग्रेस) को मिले। बसपा को सिर्फ 2% मुस्लिम वोट मिला, जो 2014 में 18% हुआ करता था। इसका सीधा फायदा सपा और कांग्रेस को हो रहा है। 2027 से पहले अखिलेश, राहुल से रिश्ते सुधारने होंगे आजाद समाज पार्टी अकेले चुनाव लड़ने की बात करती है। लेकिन, उसका दूर-दूर तक कहीं उसका जनाधार ऐसा नहीं है कि भाजपा को हरा सके। 2027 में भाजपा से टक्कर लेने के लिए चंद्रशेखर को अखिलेश और राहुल दोनों से रिश्ते सुधारने होंगे। क्योंकि, सपा-कांग्रेस के पास OBC और मुस्लिम समाज का अच्छा वोटबैंक है। पोल स्टडी करने वाली संस्था CSDS-लोकनीति के मुताबिक, यूपी में करीब 52% OBC आबादी है। इनमें 9-10% यादव हैं। सपा के पास इस वोटबैंक का सबसे मजबूत हिस्सा है। 2024 चुनाव में यादवों का करीब 80-85% वोट सपा-कांग्रेस गठबंधन को मिला था। कुर्मी, मौर्य, निषाद, पाल करीब 35-40% हैं। 2022 तक इनमें भाजपा की पकड़ मजबूत थी। 2024 में सपा ने इसमें बड़ी सेंध लगाई। सर्वे के अनुसार, सपा को करीब 25-30% गैर-यादव OBC वोट मिला था। ———————– ये खबर भी पढ़ें… मंत्री एके शर्मा से ऊर्जा विभाग छिन सकता है, यूपी में स्मार्ट मीटर के गुस्से का असर मंत्रिमंडल विस्तार में दिखेगा स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर यूपी सरकार ने ऐसे ही यू-टर्न नहीं लिया, बल्कि जनता के गुस्से ने ऐसा करने पर मजबूर कर दिया था। सरकार के खिलाफ माहौल बनने लगा था। संघ और भाजपा नेताओं ने सरकार को फीडबैक दिया कि जल्द ही प्रीपेड मीटर पर फैसला वापस नहीं गया, तो विधानसभा चुनाव में नुकसान हो सकता है। पूरी खबर पढ़ें…
चंद्रशेखर का दावा-विजय की तरह सरकार बनाएंगे:जीत का फॉर्मूला समझने तमिलनाडु जाएंगे; UP में कार्यकर्ता घर-घर समर्थन मांगेंगे
