उरांव ने शनिवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि देर आई, दुरुस्त आई। अगर कोई मंत्री, अधिकारी पदाधिकारी सरकारी कर्मी बनकर आमजनता को लूटेगा, तो वह उसके खिलाफ खड़े रहेंगे।
उन्होंने दावा किया कि अब तक वह 53 पीआईएल दायर कर चुके है, जिनके ट्रायल चल रहे हैं। जल्द ही कई बड़े नामचीन चेहरे बेनकाब होंगे और जेल की सलाखों के पीछे जाएंगे।
वर्तमान में लातेहार कोल फील्ड में फर्जी नौकरी घोटाले पर दाखिल उनकी पीआईएल पर सीआईडी जांच जारी है।
दुर्गा उरांव ने बताया कि यह मामला वर्ष 2008 का है, जब ओरमांझी क्षेत्र में एनोस एक्का की ओर से 17–18 एकड़ आदिवासी जमीन की खरीद सामने आई थी। उसी समय उन्होंने अदालत में पीआईएल दायर की, जिसका नतीजा आज सामने आया है।
उन्होंने कहा कि झारखंड के गठन (2000) के बाद मधु कोड़ा सरकार में भ्रष्टाचार ने चरम पकड़ा। पूरा मंत्रिमंडल घोटालों में लिप्त था। उसी दौर से उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ पीआईएल को हथियार बनाया। उन्होंने कहा कि पूजा सिंघल और विनय कुमार चौबे जैसे अफसरों का जेल जाना झारखंड की विडंबना है।
