डूसू पदाधिकारियों ने पत्रकार वार्ता में बताया कि अभाविप के नेतृत्व वाले छात्रसंघ ने अपने कार्यकाल के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन को कई बड़े फैसले लेने पर बाध्य किया। इनमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) का पूर्ण कार्यान्वयन, चौथे वर्ष में प्रवेश की व्यवस्था, दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्वी एवं पश्चिमी कैंपस की आधारशिला रखवाना, केंद्रीकृत हॉस्टल आवंटन प्रणाली लागू कराना, आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) को प्रभावी बनवाना, “एक कोर्स-एक शुल्क” की नीति पर दबाव बनाना तथा फीस वृद्धि का विरोध कर छात्रों को राहत दिलाना जैसी प्रमुख उपलब्धियां शामिल हैं।
पदाधिकारियों ने बताया कि डूसू ने पिछले एक वर्ष में छात्रों के हित में कई निर्णायक कदम उठाए। साथ ही “डूसू इन कैंपस” अभियान के जरिए हजारों छात्रों तक पहुंचा गया। पीजी एवं किराए के मकानों में रहने वाले छात्रों की समस्याओं को उठाते हुए रेंट कंट्रोल अधिनियम की मांग, डीयू विद्यार्थियों हेतु यू बस सेवा प्रारंभ करवाना तथा डॉ. भीमराव अंबेडकर लॉ इंटर्नशिप का आयोजन जिसमें 250 से अधिक विद्यार्थियों ने सहभागिता की। उन्होंने बताया कि अभाविप नीत डूसू ने अपने कार्यकाल में महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
डूसू सचिव मित्रविंदा कर्णवाल ने कहा कि आज डूसू के कार्यकाल की औपचारिक समाप्ति हो रही है और अभाविप के पदाधिकारियों को यह संतोष है कि अधिकांश वादो को पूरा किया है। उन्होंने कहा कि ‘शक्ति वंदन’ कार्यक्रम के माध्यम से 9 चयनित छात्राओं को 11,000 रुपये की सम्मान राशि प्रदान कर छात्राओं के आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को प्रोत्साहित किया।
डूसू उपाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने कहा कि यह कार्यकाल इस बात का प्रमाण है कि छात्रसंघ केवल कागजी उपलब्धियों तक सीमित नहीं है बल्कि धरातल पर छात्रों की वास्तविक आवाज बन सकता है। चाहे बॉन्ड की नीति का विरोध हो, अप्रत्यक्ष चुनावों के प्रयास को विफल करना हो या फिर छात्रों की रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान सभी जगह में डूसू ने निर्णायक भूमिका निभाई है। डॉ. अंबेडकर लॉ इंटर्नशिप जैसे अकादमिक अवसर छात्रों को उनके करियर में नई दिशा देने वाले रहे। उन्होंने कहा कि हमें गर्व है कि अभाविप ने छात्रों की आकांक्षाओं को आवाज दी और प्रशासन को जनहितकारी निर्णय लेने पर विवश किया।
