यूपी में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से गर्मी बढ़ गई है। आज सोमवार को 38 जिलों में हीटवेव का अलर्ट है। वहीं, 5 जिलों में बारिश का अलर्ट है। रविवार को ज्यादातर जिलों में तेज धूप रही। गाजियाबाद और बरेली में बादल छाए, जबकि लखनऊ समेत आसपास के इलाकों में तेज गर्म हवा चली। गर्मी के चलते रविवार को प्रयागराज 42.5°C और वाराणसी 42.4°C तापमान के साथ यूपी में सबसे गर्म रहे। बहराइच में 42°C और झांसी में 41.8°C तापमान दर्ज किया गया। मौसम विभाग के मुताबिक, मानसून यूपी-बिहार बॉर्डर पर पहुंचने के बाद आगे नहीं बढ़ पा रहा है। पिछले 9-10 दिनों से यह महराजगंज के पास रुका है। 23 जून से इसके आगे बढ़ने और 25 जून तक यूपी में पहुंचने की संभावना है। तब तक पूर्वी यूपी और बुंदेलखंड में गर्म हवा चल सकती है। लखनऊ के मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया- यूपी में 3-4 दिन भीषण गर्मी चलेगी। पारा लगातार बढ़ता रहेगा। लू की स्थिति और गंभीर होगी। मानसून की रफ्तार अब भी धीमी है। फिलहाल मानसून की एंट्री के हालात नहीं बन पाए हैं। मानसून के लिए अभी कम से कम 5 दिन इंतजार करना पड़ सकता है। यूपी में अगले 4 दिन कैसा रहेगा मौसम? जानिए पिछले 24 घंटे का तापमान जानिए यूपी के 7 जिलों में सामान्य से ज्यादा बरसे बादल जून महीने में यूपी के 75 जिलों में बारिश की स्थिति सामान्य नहीं रही। 34 जिलों में बारिश काफी कम हुई, जबकि 13 जिलों में भी कमी दर्ज की गई। 16 जिलों में सामान्य बारिश हुई। वहीं 4 जिलों में सामान्य से ज्यादा और 7 जिलों में काफी ज्यादा बारिश हुई। कौशांबी में जून में अब तक बारिश नहीं हुई है। जेट स्ट्रीम कमजोर होने पर आगे बढ़ेगा मानसून मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने की वजह भी जान लीजिए यूपी में जून से सितंबर के बीच 8% बारिश कम होगी सीनियर साइंटिस्ट अतुल सिंह बताते हैं- इस साल यूपी समेत पूरे देश में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है। आमतौर पर यूपी में जून से सितंबर के बीच करीब 820 से 840 मिलीमीटर बारिश होती है। लेकिन, इस साल 8% कम यानी लगभग 754 से 773 मिलीमीटर तक ही पानी बरसेगा। यूपी में मानसून में कम बारिश की संभावना की वजह जानिए मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. एम महापात्रा ने बताया कि इस साल प्रशांत महासागर में ला नीना जैसी स्थितियां खत्म होकर अल नीनो की ओर बढ़ने के संकेत हैं। जो कम वर्षा का कारण बनेगी। यानी इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कमजोर रहने के संकेत हैं। साथ ही इस साल जनवरी-मार्च में उत्तरी गोलार्ध में बनी कम बर्फ भी मानसून को प्रभावित कर सकती है। खेती-किसानी पर होगा असर, महंगाई बढ़ेगी यूपी में अल-नीनो की वजह से कम बारिश का सीधा असर राज्य की इकोनॉमी, खेती-किसानी और आम लोगों की जिंदगी पर पड़ेगा। धान जैसी फसलों के उत्पादन में 20% तक की कमी आ सकती है। जून-जुलाई में बारिश न होने से धान की रोपाई में देरी हो सकती है। रकबा भी घट सकता है। सिंचाई के लिए किसानों को ट्यूबवेल पर निर्भर रहना पड़ेगा। बिजली और डीजल का खर्च बढ़ने से खेती की लागत बहुत ज्यादा बढ़ सकती है। उत्पादन घटने से अनाज, दालों और सब्जियों के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं। बुंदेलखंड और दक्षिण-पश्चिमी यूपी के जिलों (जैसे झांसी, महोबा, ललितपुर, मथुरा) में सूखे की आशंका गहरा सकती है। यूपी में पिछले 10 साल में मानसून कब आया, ग्राफिक्स में देखिए पिछले साल 10 से 15% ज्यादा बरसा था मानसून मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 2025 के मानसून सीजन (जून से सितंबर) के दौरान औसतन 870 से 900 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। यह सामान्य मानसूनी औसत से करीब 10 से 15 प्रतिशत अधिक रही।
यूपी के 38 शहरों में हीटवेव की चेतावनी:5 जिलों में आज बारिश का अलर्ट; मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से गर्मी बढ़ी; पारा 42° पार
