अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला अभी चर्चा में है। इसी बीच सरयू नदी में चलने के लिए कोच्चि से लाई गई वाटर मेट्रो भी सवालों के घेरे में है। करीब 12 करोड़ रुपए की लागत वाली यह वाटर मेट्रो पिछले 3 महीने से एक ही जगह पर खड़ी है। इसे राम घाट से गुप्तार घाट तक 14 किलोमीटर रूट पर चलाया जाना था। लेकिन, कभी कम पानी तो कभी ज्यादा पानी का हवाला देकर तुलसी घाट (नया घाट) के पास 2 किलोमीटर के दायरे में चलाया जाता रहा। अब इसका संचालन पूरी तरह बंद कर दिया गया है। वाटर मेट्रो दोबारा कब चलेगी? चलेगी भी या नहीं? इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने दैनिक भास्कर की टीम अयोध्या पहुंची। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… प्राइवेट कंपनी को टेंडर मिला, किराया दोगुना हुआ हमारी टीम ने वाटर मेट्रो के कर्मचारी सुधाकर से बात की। उन्होंने बताया- वाटर मेट्रो का रूट पहले से तय था। लेकिन, ऊंचाई ज्यादा होने की वजह से ये अयोध्या और गोंडा को जोड़ने वाले पुल के नीचे से निकल नहीं पाती। इसी वजह से गुप्तार घाट तक तय रूट के बजाय तुलसी घाट (नया घाट) के आसपास ही घूमती रहती है। हमने पूछा, क्या वाटर मेट्रो कभी गुप्तार घाट तक पहुंच पाएगी? इस पर सुधाकर ने बताया- सरयू में गाद (सिल्ट) बहुत ज्यादा है। सफाई करने के कुछ दिनों बाद ही गाद जमा हो जाती है। बरसात में वाटर लेवल बढ़ने से ऊंचाई और बढ़ जाती है। ऐसे में गुप्तार घाट तक रेगुलर संचालन फिलहाल मुश्किल लगता है। कम यात्रियों के सवाल पर वह कहते हैं- 2025 तक पर्यटन विभाग इसका संचालन करता था। तब किराया 150 रुपए प्रति यात्री था। यात्री भी आते थे। फिर इसका संचालन जेएस क्लीनटेक प्राइवेट लिमिटेड को सौंप दिया गया। उसने 300 रुपए किराया कर दिया गया, जिससे यात्री कम हो गए। नाविक बोले- ₹21-22 लाख बिजली बिल बकाया हमने यहां के लोकल नाविकों से भी बात की। उनके मुताबिक, अयोध्या आने वाले 90% श्रद्धालु राम मंदिर में दर्शन करने के बाद लौट जाते हैं। जो सरयू तट पर आते भी हैं, वो सस्ता ऑप्शन चुनते हैं। वाटर मेट्रो 300 रुपए लेती है, छोटी नाव वाले 50 और 100 रुपए में ही घुमा देते हैं। कुछ नाविकों ने दावा किया कि वाटर मेट्रो पर 21-22 लाख रुपए का बिल बकाया है। बोट कंपनी बिल जमा नहीं कर पाई, इसलिए ऐसे ही खड़ी है। नाविक जीतेंद्र मांझी बताते हैं- राम मंदिर बनने के बाद मैं मुंबई छोड़कर अयोध्या आ गया। शुरुआत में काम अच्छा चला, लेकिन अब घाट पर नावों की संख्या काफी बढ़ गई है। कमाई पहले जैसी नहीं रही। कई बार दिनभर में सिर्फ 400-500 रुपए ही बच पाते हैं। कमाई इतनी कम कि खर्च निकालना मुश्किल वाटर मेट्रो के मैनेजर विवेक राय बताते हैं- जब इसका संचालन यूपी टूरिज्म के पास था, तब 150 रुपए में करीब 25 मिनट की सैर कराई जाती थी। अब 300 रुपए में 40 से 45 मिनट तक घुमाया जाता है। वाटर मेट्रो दोबारा कब शुरू होगी, इस पर विवेक कहते हैं- इसका फैसला हमारे लेवल पर नहीं होता। हम सिर्फ इसकी देख-रेख और संचालन से जुड़ा काम देखते हैं। आगे क्या होगा, इसका फैसला तो ऊपर बैठे लोग ही करेंगे। वाटर मेट्रो से जुड़े एक अन्य व्यक्ति के मुताबिक, इसमें भले ही 50 लोग बैठ सकते हैं। लेकिन, जब ये चल रहा था तो 10 से 15 लोग मुश्किल से मिलते थे। वाटर मेट्रो के 10 कर्मचारियों की सैलरी भी नहीं निकल पाती थी। यह बात सच है कि बिजली का बिल बकाया है, लेकिन यह कितना है, हम इसके बारे में नहीं बता सकते। बिना किसी प्लानिंग के इसे यहां लाया गया जमीनी हकीकत देखें तो वाटर मेट्रो जिस उद्देश्य से शुरू की गई थी, वह अब तक पूरी तरह सफल होती नहीं दिखी। सबसे बड़ा सवाल शुरुआती सर्वे और रूट सेलेक्शन को लेकर उठ रहा है। सरयू नदी का वाटरलेवल मौसम के अनुसार तेजी से बदलता है। कभी बहुत घट जाता है तो बरसात में एकदम से उफान पर रहता है। कई जगह गाद जमा होने की समस्या भी रहती है। नदी में खुदाई कर चैनल बनाने के बाद भी कुछ समय में फिर से गाद भर जाती है। यह सब कुछ जानने के बाद भी जेटी, चार्जिंग स्टेशन और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया। अब इसे बनाने को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं, अयोध्या में वाटर मेट्रो चलाने लिए अब सरयू नदी पर बैराज बनाने की चर्चा हो रही है। ————————– यह खबर भी पढ़ें… राम मंदिर ट्रस्ट में होगा बड़ा फेरबदल, जिम्मेदारियां लिखित में तय होंगी; चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव की बदलेगी भूमिका अयोध्या राम मंदिर के मैनेजमेंट में बड़ा बदलाव हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, चढ़ावा गिनने, मंदिर संपत्तियों के रख-रखाव और दर्शन व्यवस्था को नए सिरे से तैयार किया जाएगा। ट्रस्ट और मंदिर के संचालन के लिए अनुभवी अफसरों और संघ से जुड़े लोगों को तैनात किया जा सकता है। पूरी खबर पढ़िए…
अयोध्या में 12 करोड़ का क्रूज 3 महीने से खड़ा:किराया दोगुना होने से नहीं मिलते टूरिस्ट; नाविक 50 रुपए में घुमा देते हैं
