आजम खान का केस लड़ने वाले सरकारी वकील को हटाया:6 साल से पैरवी कर रहे थे; रामपुर में 5 और वकीलों की सेवा खत्म

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यूपी सरकार ने रामपुर के 6 सरकारी वकीलों की सेवा समाप्त कर दी। इनमें से वह वकील भी शामिल हैं, जो सपा नेता आजम खान के खिलाफ चल रहे मुकदमों में सरकार की ओर से पैरवी कर रहे थे। रामपुर DM अजय कुमार द्विवेदी ने इन वकीलों को कार्यमुक्त करने का आदेश भी जारी कर दिया। इनमें अधिवक्ता अमित कुमार सक्सेना, संदीप सक्सेना, प्रमोद सागर, ओमप्रकाश लोधी, प्रताप सिंह मौर्य और अमित कुमार शामिल हैं। इनमें वकील संदीप सक्सेना भाजपा विधायक आकाश सक्सेना के बेहद करीबी माने जाते हैं। राज्य सरकार के विशेष सचिव ने जारी किया पत्र बताया जा रहा है, वकीलों को पद-मुक्त करने के लिए राज्य सरकार के विशेष सचिव की ओर से पत्र जारी किए गए थे। इसके बाद डीएम ने आदेश जारी कर दिया। अचानक हुई कार्रवाई से रामपुर कचहरी से लेकर लखनऊ तक चर्चा शुरू हो गई है। शासन की कार्रवाई के बाद आजम खान की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। संदीप सक्सेना ने कई चर्चित मामलों में की थी पैरवी वकील संदीप सक्सेना ने अपने कार्यकाल के दौरान आजम के खिलाफ कई चर्चित मामलों में सरकार की ओर से पैरवी की। इनमें 2 जन्म प्रमाण पत्र प्रकरण, पासपोर्ट मामला, शत्रु संपत्ति से जुड़े मुकदमे और सेना के जवानों पर विवादित बयान से जुड़े मामले शामिल थे। 2 जन्म प्रमाण पत्र मामले में हुई थी सजा वकील संदीप सक्सेना ने बताया कि 2 जन्म प्रमाण पत्र मामलों में आजम खान को सजा हुई थी। पासपोर्ट मामले में निचली अदालत से सजा के बाद सेशन कोर्ट से अब्दुल्ला आजम बरी हो गए थे। सेना के जवानों पर विवादित टिप्पणी वाले मामले में भी आरोपी बरी हुए थे। शत्रु संपत्ति से जुड़े 3 मुकदमे अभी न्यायालय में विचाराधीन हैं। उन्होंने बताया कि वह करीब 6 सालों से इस पद पर कार्यरत थे। उन्हें हटाए जाने का कारण पता नहीं है। वकील बोले- यह राजकाज का हिस्सा करीब 7 सालों तक सरकारी वकील रहे प्रमोद सागर ने इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। वहीं, ओमप्रकाश लोधी ने इसे राजकाज का हिस्सा बताया। कहा कि ऐसे निर्णय होते रहते हैं। प्रताप सिंह मौर्य ने भी हटाए जाने का कारण नहीं जानने की बात कही। वहीं, वकील अमित कुमार ने बताया कि उन्हें इस पद पर केवल ढाई साल ही हुए थे, जबकि कई वकील 20-20 सालों तक इस जिम्मेदारी पर बने रहे हैं। पिछले साल 55 दिन के लिए जेल से बाहर आए थे आजम 2022 में भड़काऊ भाषण (हेट स्पीच) के मामले में आजम को 3 साल की सजा सुनाई गई थी, लेकिन 2023 में इसी मामले में बरी हो गए थे। इसके बाद 2023 में बेटे अब्दुल्ला आजम के फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट मामले में आजम खान, उनकी पत्नी तंजीम फातिमा और बेटे को 7-7 साल की सजा हुई। इस सजा के चलते उनकी विधायकी भी चली गई थी। करीब 23 महीने जेल में रहने के बाद 23 सितंबर, 2025 को जमानत पर सीतापुर जेल से बाहर आए थे। हालांकि, 55 दिन बाद ही बेटे अब्दुल्ला के फर्जी पैन कार्ड मामले में उन्हें फिर से 7 साल की सजा हो गई। इसके बाद उन्हें बेटे के साथ दोबारा जेल भेज दिया गया था। ——————– यह खबर भी पढ़ें… ‘फिल्में देखकर लाश जलाई, सोचा था बच जाएंगे’, यूपी में 2 हत्यारों को फांसी की सजा, कोर्ट बोला- जान लेने का हक सिर्फ भगवान को
‘आरोपी हिंसक मानसिकता के हैं, इसलिए हत्या करने के बाद लाश जलाई। जिंदगी भगवान की देन है। इसे खत्म करने का हक भी सिर्फ भगवान को है। अगर कोई इंसान किसी दूसरे की जान छीनता है, तो उसे जिंदा रहने का हक नहीं। ’ यह बात मुजफ्फरनगर में फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज ने कही। उन्होंने चर्चित राजेंद्र सैनी हत्याकांड में 8 साल बाद 2 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। पढ़ें पूरी खबर…