हरियाणा के पूर्व MLA सहीराम धारणिया को मिलेगा “बिश्नोई रत्न”:भजनलाल-कुलदीप के बाद चौथे व्यक्ति, राजकीय सम्मान न मिलने से परिवार नाराज

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हरियाणा के सबसे बुजुर्ग पूर्व MLA एवं हिंदी आंदोलन के सत्याग्रही सहीराम धारणिया (आयु 104 वर्ष) को “बिश्नोई रत्न” मिलेगा। यह सम्मान पाने वाले सहीराम धारणिया पूरे देश में बिश्नोई समाज में चौथे व्यक्ति होंगे। इससे पहले ये सम्मान हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल और पूर्व सांसद एवं बीजेपी नेता कुलदीप बिश्नोई और राजस्थान के भागीरथ बिश्नोई को मिला हुआ है। अब उनकी शोक सभा के दिन 29 मई शुक्रवार को महासभा उनको “बिश्नोई रत्न” देकर सम्मानित करेगी। परिवार बोला, उनको जीवित रहते न बिश्नोई रत्न मिला तो न ही मरणोपरांत राजकीय सम्मान मिला। उनका बिश्नोई रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार में प्रशासन से तहसीलदार सुनील कुमार पहुंचे थे और उन्होंने विधानसभा स्पीकर के नाते आने का कारण बताया था। सरकार या प्रशासन ने कोई व्यवस्था नहीं की। उनके परिवार व समाज में नाराजगी का माहौल है। इन दिनों समाज के लोगों में सहीराम धारणिया को बिश्नोई रत्न की जोरों से मांग उठी और महासभा को ये फैसला लेना पड़ा। मरणोपरांत दिया जा रहा सम्मान इसे लेकर सोशल मीडिया और समाज में काफी चर्चा है कि उनको मरणोपरांत अचानक ये सम्मान दिया जा रहा है। इससे पहले महासभा की कार्यकारिणी ने उनके जीवित रहते ये फैसला क्यों नहीं लिया। हालांकि, सहीराम बिश्नोई अपने बिश्नोई समाज से पहले विधायक बनने वाले व्यक्ति थे और इन्होंने समाज हित में अनके कार्य किए। करीब 40 वर्षों तक बिश्नोई महासभा में महासचिव एवं अध्यक्ष पद पर काम किया। महासभा ने मंत्री, विधायक व नेताओं को भेजा निमंत्रण इसे लेकर अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा (रजि.) मुक्तिधाम मुकाम से पत्र जारी हुआ है, जिसमें लिखा है कि महासभा की कार्यकारिणी ने पूर्व मीटिंग में संयुक्त पंजाब के अबोहर से पूर्व विधायक रहे सहीराम बिश्नोई को मरणोपरांत बिश्नोई रत्न से उनके पैतृक गांव डबवाली के सकताखेड़ा में सम्मानित किया जाएगा। महासभा ने देशभर की बिश्नोई महासभा के सदस्यों एवं समाज से जुड़े अन्य सामाजिक संगठन नेताओं और विभिन्न राज्यों में मंत्री, विधायक व पूर्व विधायक को निमंत्रण भेजा गया है और सहीराम धारणिया के परिवार की ओर से भी समाज व अन्य लोगों को निमंत्रण दिया गया है। सभी से 29 मई को शोक सभा में पहुंचने का अनुरोध किया है। अजय चौटाला बोले, सहीराम सेंचुरी पूरी कर चुके जजपा सुप्रीमो अजय चौटाला उनके निवासस्थान पर शोक व्यक्त करने पहुंचे। अजय चौटाला बोले, पूर्व विधायक सहीराम धारणिया की कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकता, परंतु वे सेंचुरी पूरी कर चुके थे। हम दोनों परिवार के व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों रूप से परिवारिक रिश्ते थे। उनकी पांचवीं पीढ़ी है और हमारी चौथी पीढ़ी है। वे महान व्यक्तित्व के धनी थे। सादा जीवन जीते और आरएसएस से जुड़े थे परिवार के अनुसार, सहीराम बिश्नोई ने संयुक्त पंजाब-हरियाणा में वर्ष 1957 में जनसंघ के चुनाव चिन्ह “दीपक” से विजयी हुए थे और समाज के पहले विधायक थे। इस चुनाव के बाद आगे चुनाव नहीं लड़ा और राजनीति रास नहीं आया। वे आरएसएस से पुराने जुड़े हुए थे और बीजेपी से पहले जनसंघ पार्टी होती थी। बाकी बिश्नोई समाज के लगभग नेता कांग्रेस पार्टी में थे। ऐसे में पार्टी बाजी हुई। आखिर में वे सामाजिक कार्यों में चले गए। वे सादा जीवन जीते थे और सादा खाना व पहनना पसंद करते थे। स्वयं अपनी खेती संभालते थे। यहीं उनके सेहतमंद होने का राज है। बीजेपी सरकार व आरएसएस की ओर से उनकी अंतिम यात्रा के दिन भी खास नहीं किया गया। इससे परिवार व समाज में रोष है। इस बीच वे राजनीति का भी शिकार हुए। वरना उनको पहले ही बिश्नोई रत्न सम्मान मिल जाता, परंतु महासभा की ओर से कोई प्रस्ताव ही नहीं रखा गया। अब मौजूदा समय में पूर्व सांसद कुलदीप बिश्नोई व राजस्थान के भागीरथ बिश्नोई के पास बिश्नोई रत्न है। पूर्व सीएम भजनलाल इस दुनिया में नहीं रहे, जिनको सबसे पहले ये सम्मान मिला था। परिवार की मांग है कि उनको राजकीय सम्मान मिलना चाहिए था। देश बंटवारे के बाद डबवाली में आकर बसे थे परिजनों के अनुसार, उनका जन्म 12 जनवरी 1922 को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बहावलपुर रियासत के प्रसिद्ध गांव तालिया (कुम्भाणा) में जमीदार चौधरी रामलाल धारणिया के घर हुआ था। देश बंटवारे के बाद भारत आ गए। उनकी हवेली की निशानियां अभी भी मौजूद है। उन्हें और उनके परिवार को सिरसा जिले के सकताखेड़ा में जमीन अलॉट हुई, तब से गांव में उनका घर है और वे यहीं रहते थे। उनके दो बेटे हैं और तीन पोते हैं, उन्हें अखबार पढ़ने का बहुत शौक था। उन्होंने लंबे समय तक वकालत भी की और लाहौर पंजाब यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री की थी। सहीराम धारणिया वर्ष 1957 में अबोहर विधानसभा से जनसंघ से विधायक बने थे। हरियाणा व देशभर से अनेक नेता, विधायक व मंत्री शोक जताने पहुंच रहे हैं। वे पूर्व सीएम चौ. भजनलाल के करीबी थे और पंचकूला विधायक चंद्रमोहन बिश्नोई के नाना ससुर थे।