बरेली में डेढ़ साल के बच्चे को बेचे जाने से पुलिस ने बचा लिया। दो किडनैपर्स को पुलिस ने एनकाउंटर में गिरफ्तार कर लिया। बच्चे को बरामद करना बहुत बड़ी चुनौती थी। जैसे ही पुलिस को सूचना मिली कि अपहरण हो गया है, तुरंत पुलिस की 5 टीमें लग गईं। दिन-रात मेहनत करती रहीं। 48 घंटे तक एसपी साउथ अंशिका वर्मा, सीओ आंवला नितिन कुमार, एसओजी, सर्विलाश टीम, थाना आंवला की पुलिस सोई नहीं। जब बच्चा बरामद हो गया, तब जाकर राहत की सांस ली। SSP अनुराग आर्य भी लगातार मॉनिटरिंग करते रहे। पुलिस जैसे ही बच्चे को लेकर परिवार के पास पहुंची, मां ने दौड़कर उसे गले लगा लिया। फूट-फूटकर रोने लगी। हाथ जोड़कर पुलिसवालों को धन्यवाद देती रही। अब सिलसिलेवार जानिए पुलिस ने बच्चे को कैसे बरामद किया- घर के बाहर से 2 लोग बच्चे को किडनैप कर ले गए मूलरूप से बदायूं के रहने वाले रमन, मनौना धाम में कर्मचारी हैं। पत्नी और 3 बच्चों के साथ धाम के पास ही किराए पर रहते हैं। 24 मई को बच्चा अपने घर के बाहर से लापता हो गया था। काफी देर तक नहीं लौटा, तो घरवाले पुलिस के पास पहुंचे। CCTV चेक किए गए, तो 2 लोग बच्चे को किडनैप कर ले जाते दिखे। बरेली एसपी (साउथ) अंशिका वर्मा ने टीम बनाकर सर्च ऑपरेशन शुरू कराया। इस बीच, मंगलवार सूचना मिली कि किडनैपर बच्चे को बेचने जा रहे हैं। पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर दी। 26/27 मई की रात करीब 2 बजे 2 संदिग्ध बाइक से आते दिखे। रुकने का इशारा करने पर यू-टर्न लेकर भागने लगे। उनके साथ बच्चा भी था। पुलिस ने पीछा किया, तो बदमाशों की बाइक फिसल गई। बच्चा बदमाशों से छिटककर सड़क किनारे झाड़ियों में गिर गया। इसी बीच खुद को घिरता देख किडनैपर्स ने फायरिंग कर दी। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की। फायरिंग के बीच ही दरोगा सोमपाल जान पर खेलकर बच्चे के पास पहुंचे। उसे गोद में उठाकर एनकाउंटर स्पॉट से दूर ले गए। किडनैपर्स की फायरिंग में एक हेड कॉन्स्टेबल कौमिश कुमार भी घायल हुए हैं। किडनैपर्स की पहचान शाहजहांपुर के योगेश कन्नौजिया (28) और बदायूं के पवन सिंह (25) के रूप में हुई है। 500 CCTV, 20 हजार मोबाइल नंबर जांच के बाद बदमाशों तक पहुंची पुलिस सीओ आंवला नितिन कुमार ने बताया कि पुलिस ने 500 से अधिक CCTV कैमरे चेक किए। एक-एक फुटेज को चेक किया गया। बरेली से आने-जाने वाले सभी रास्तों की लगातार निगरानी की गई। इस पूरे ऑपरेशन की आंखोंदेखी किसी फिल्मी कहानी जैसी है। जहां पुलिस ने बदमाशों की घेराबंदी की है। एसपी साउथ अंशिका वर्मा, सीओ आंवला नितिन कुमार, दरोगा सोमपाल, एसओजी, आंवला थाने की पुलिस, सर्विलांस सेल समेत 5 टीमों ने बच्चे को सकुशल बरामद करने के लिए दिन-रात एक कर दिया। इसके अलावा करीब 20 हजार मोबाइल नंबर सर्विलांस टीम ने चेक किए, तब जाकर पुलिस की टीमें बदमाशों तक पहुंची। फिर 48 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया गया। बच्चे को बेचे जाने से पहले पुलिस ने पकड़ लिया 48 घंटे बच्चे को लेकर घूमते रहे बदमाश अंशिका वर्मा ने बताया- लखीमपुर खीरी निवासी एक तीसरे व्यक्ति का भी इस गिरोह से लिंक सामने आया है। उसकी गहनता से जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस तरह की चाइल्ड ट्रैफिकिंग में कौन मुख्य सूत्रधार है। किडनैपर योगेश और पवन पुलिस से बचने के लिए बच्चे को लेकर 48 घंटे घूमते रहे। वो बच्चे को लेकर शाहजहांपुर पहुंचे। वहां से योगेश ने लखीमपुर के सरगना को वीडियो कॉल कर बच्चे को दिखाया। जैसे ही सरगना ने बच्चे को देखा तो उसे तत्काल रिजेक्ट कर दिया। उसने कहा ये बच्चा हमारे किसी काम का नहीं है। हमारे पास जो निसंतान दंपती हैं, उसे नवजात बच्चा जिसकी उम्र अधिकतम 6 महीने हो, वो चाहिए। योगेश और पवन को लगा कि उनकी सारी मेहनत पर पानी फिर गया। इसके बाद वो दोनों बच्चे को लेकर दिल्ली जा रहे थे, ताकि वहां पर बच्चे को बेच दें। लेकिन, उससे पहले ही पुलिस ने दोनों को दबोच लिया। M.Sc नर्सिंग का छात्र निकला बच्चा चोर, 60 हजार में डील अंशिका वर्मा ने जिस बदमाश योगेश कन्नौजिया का एनकाउंटर किया, वह शाहजहांपुर के मेडिकल कॉलेज से M.Sc नर्सिंग कर रहा था। उसके साथ पकड़ा गया दूसरा आरोपी पवन सिंह बदायूं के ककराला कस्बे का रहने वाला है। पवन शादीशुदा है। उसने पश्चिम बंगाल की एक महिला से शादी की है। वो तेलांगना में भी रहा है और वहां उसने जॉब की है। पवन बेल्डिंग का काम करता है। योगेश की मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई के दौरान लखीमपुर के एक मरीज से मुलाकात हुई थी, जो वहां पथरी का ऑपरेशन करवाने आया था। उस मरीज ने योगेश को मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई का फायदा उठाने का लालच दिया। उसने कहा कि तुम मुझे 6 महीने तक के बच्चे चुराकर दिया करो, मैं उन्हें निसंतान दंपती को बेचकर तुम्हें 60 हजार रुपए दूंगा। इसके बाद योगेश और पवन ने मिलकर यह काम शुरू कर दिया। वे कई महीनों से मेलों और बाजारों में नवजात शिशुओं की तलाश में थे, लेकिन कामयाब नहीं हो पाए। इसके बाद वे मनौना धाम में करीब एक महीने से रेकी कर रहे थे। पीड़ित परिवार के 3 बच्चे हैं- 2 बेटियां और 1 बेटा
पीड़ित रमन पाल ने बताया- हमारे 3 बच्चे हैं, जिसमें दो बेटियां और एक बेटा है। बड़ी बेटी 5 साल, छोटी बेटी 3 साल की है। सबसे छोटा बेटा डेढ़ साल का ऋषभ है। बच्चे को जब पुलिस ने बरामद करके परिजनों को सौंपा तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। मां पिता बार-बार अपने बच्चे को पुचकारते उसे सीने से लगाते और हाथ जोड़कर पुलिस को शुक्रिया अदा करते रहे। बच्चे के पिता रमन पाल का कहना है कि हम लोग काफी गरीब हैं। लेकिन, पुलिस ने हमारे बच्चे को बचाने के लिए रात-दिन मेहनत की और मेरे बेटे को सकुशल बरामद कर लिया। ————————— ये खबर भी पढ़िए- मुझे लेकर जाओ, वरना पापा मुझे मार देंगे: मेरठ में पिता और सौतेली मां ने बेटी की हत्या की, कहा- मोबाइल पर लड़कों से बात करती थी मेरठ में पिता ने दूसरी पत्नी के साथ मिलकर अपनी 17 साल बेटी को मार डाला। फिर गुपचुप तरीके से शव का अंतिम संस्कार कर दिया। लड़की के मामा को इसका पता चला तो वह गांव पहुंच गए और विरोध कर दिया। मामा की शिकायत के बाद पुलिस हरकत में आई। मंगलवार देर रात हत्या का मुकदमा दर्ज करते हुए पिता को गिरफ्तार कर लिया गया है। पढ़ें पूरी खबर…
बच्चे को बचाने के लिए 48 घंटे नहीं सोई पुलिस:बरेली में 500 CCTV चेक किए, 20 हजार नंबर खंगाले; किडनैपर्स को गोली मारकर छुड़ाया
