धार भोजशाला मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। गुरुवार को मुस्लिम पक्ष ने विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल कर दी है। हाईकोर्ट ने करीब 6 दिन पहले अपने आदेश में धार स्थित भोजशाला परिसर को वाग्देवी (सरस्वती) मंदिर से जुड़ा प्राचीन धार्मिक स्थल माना था। मुस्लिम समाज के सदर अब्दुल समद ने बताया कि फैसले से समुदाय में निराशा है और इसे एकतरफा बताते हुए चुनौती दी गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद इस मामले में जल्द सुनवाई और हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग करेंगे। कोर्ट के समक्ष कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किए गए। हाईकोर्ट का फैसला क्या था मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि भोजशाला परिसर ऐतिहासिक रूप से देवी सरस्वती से जुड़ा मंदिर है। अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट, ऐतिहासिक साक्ष्य और अयोध्या मामले के कानूनी सिद्धांतों को आधार माना। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि केंद्र सरकार और ASI को इस स्थल के प्रबंधन और संरक्षण पर निर्णय लेना चाहिए। साथ ही ASI का 2003 का वह आदेश रद्द कर दिया गया था, जिसमें पूजा और नमाज को लेकर पूर्व व्यवस्था तय की गई थी। 700 साल पुरानी परंपरा का हवाला अब्दुल समद ने कहा कि कमाल मौला मस्जिद में लगभग 700 वर्षों से जुमे की नमाज अदा होती रही है। उन्होंने कहा कि इस परंपरा को प्रभावित किए जाने से समाज में दुख है, लेकिन लड़ाई पूरी तरह संवैधानिक और कानूनी दायरे में ही लड़ी जाएगी। फैसले के बाद जिले में पुलिस बल अलर्ट पर है और भोजशाला परिसर के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। प्रशासन ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है। शहर काजी बोले– सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद शहर काजी वकार सादिक ने कहा कि मुस्लिम समाज न्यायपालिका का सम्मान करता है और अब सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद है। उन्होंने प्रशासन से शांति बनाए रखने की अपील की। इस मामले से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें…. MP हाईकोर्ट ने धार भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार की भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना है। शुक्रवार को दिए फैसले में हाईकोर्ट ने कहा- हमने पुरातात्विक और ऐतिहासिक तथ्यों, एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर विचार किया है। ASI एक्ट के प्रावधानों के साथ-साथ अयोध्या मामले को भी आधार माना। पूरी खबर पढ़ें…
धार भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मुस्लिम पक्ष:MP हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती; कहा- तथ्य सही तरीके से पेश नहीं किए
