परिवार के साथ वृंदावन पहुंचे नवजोत सिंह सिद्धू:कात्यायनी मंदिर में कर रहे आराधना, मीडिया से बनाई दूरी

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पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू आज अपने परिवार के साथ वृंदावन पहुंचे हैं। पत्नी, बेटी और बेटे के साथ वे सिद्धपीठ कात्यायनी देवी मंदिर में पहुंचे। यहां उन्होंने सपरिवार विशेष पूजा आराधना की। इस दौरान उन्होंने वहां यज्ञ भी किया। मंदिर के पुजारी ने सिद्धू की कलाई में रक्षासूत्र बांधा। फिर मां के प्रसादी सिंदूर से तिलक किया। इसके बाद सिद्धू परिवार संग वहीं बैठ गए और ध्यान लगाकर मां की आराधना की। सिद्धू ने करीब आधे घंटे तक परिवार संग मां की आराधना की। इस दौरान नवजोत सिंह सिद्धू मीडिया कैमरों और सवालों से बचते नजर आए। उन्होंने ऑफ रिकॉर्ड बताया कि यह दौरा उनका निजी और आध्यात्मिक है। इसका किसी भी राजनीतिक घटनाक्रम से कोई लेना-देना नहीं है। वह यहां केवल मन की शांति और आध्यात्मिक सुकून के लिए आए हैं। फिलहाल अभी 2 से 3 दिन वो परिवार संग यहां रुक सकते हैं। तीन तस्वीरें देखिए…

आध्यात्मिक यात्रा पर पहुंचे वृंदावन नवजोत सिंह सिद्धू बुधवार को श्री धाम वृंदावन आए हुए हैं। नवजोत सिंह सिद्धू ने पत्नी डॉ. नवजोत कौर, बेटी राबिया और बेटे करण के साथ कात्यायनी देवी मंदिर में पहुंच कर मां कात्यायनी देवी के दर्शन किए। उन्होंने परिवार के साथ विधि-विधान से वैदिक मंत्रोचारण के साथ पूजा अर्चना की। इस दौरान नवजोत सिंह सिद्धू भक्ति भाव में डूबे नजर आए। पुजारी ने बांधा कलावा कात्यायनी देवी मंदिर के पुजारी कमल ने नवजोत सिंह सिद्धू की कलाई में रक्षासूत्र बांधा। माता भगवती के प्रसादी सिंदूर से तिलक किया। इसके बाद सिद्धू वहीं बैठ गए और ध्यान लगाकर मां की आराधना करने लगे। नवजोत सिंह सिद्धू ने परिवार संग करीब आधे घंटे तक मां की आराधना की। सिद्धू ने सवालों से बनाई दूरी नवजोत सिंह सिद्धू के कात्यायनी मंदिर पहुंचने की जानकारी मिलते ही मीडिया भी वहां पहुंच गई। मीडिया के पहुंचते ही नवजोत सिंह सिद्धू कैमरों और सवालों से दूरी रखने की कोशिश करते नजर आए। उन्होंने ऑफ रिकॉर्ड बताया कि यह दौरा उनका निजी और आध्यात्मिक है। इसका किसी भी राजनीतिक घटनाक्रम से कोई लेना-देना नहीं है। वह यहां केवल मन की शांति और आध्यात्मिक सुकून के लिए आए हैं। वृंदावन में कुछ दिन रह सकते हैं नवजोत सिंह सिद्धू ने कात्यायनी देवी मंदिर में हवन भी किया। उन्होंने वृंदावन की पावन भूमि पर कुछ दिन एकांत में बिताने की इच्छा भी जताई। जिसके बाद माना जा रहा है कि वह अगले कुछ दिन वृंदावन में प्रवास कर सकते हैं। इस दौरान वह वृंदावन के अन्य प्राचीन मंदिरों के भी दर्शन कर सकते हैं। अब जानते हैं नवजोत सिंह सिद्धू के बारे में… बचपन से क्रिकेट के प्रति जुनून 20 अक्टूबर 1963 को पटियाला, पंजाब में जन्मे नवजोत सिंह सिद्धू का बचपन क्रिकेट के जुनून में बीता। उनके पिता भगवंत सिंह खुद एक मशहूर क्रिकेटर थे, जिनसे सिद्धू ने क्रिकेट का पहला पाठ सीखा। सिद्धू ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पटियाला के यदविंद्र पब्लिक स्कूल से की। पढ़ाई के साथ-साथ उनका मन हमेशा क्रिकेट के मैदान में रमता रहा। कॉलेज पहुंचने तक सिद्धू की पहचान एक होनहार बल्लेबाज के रूप में हो चुकी थी। आगे चलकर उन्होंने भारतीय टीम में जगह बनाकर देश का नाम रोशन किया। कॉलेज की मोहब्बत- नवजोत कौर सिद्धू की लव स्टोरी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं। कॉलेज के दिनों में वह नवजोत कौर से पहली नजर में ही प्यार करने लगे थे। वे घंटों कॉलेज के बाहर धूप में सिर्फ उन्हें देखने खड़े रहते थे। नवजोत कौर उस समय एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही थीं। दोनों के बीच धीरे-धीरे दोस्ती हुई और वक्त के साथ रिश्ता गहराता चला गया। लंबे इंतजार और समर्पण के बाद सिद्धू ने उन्हें प्रपोज किया। शादी से पहले सिद्धू ने नवजोत कौर की जन्मपत्री मिलवाई और जब 36 में से पूरे 36 गुण मिले तो दोनों ने शादी कर ली। कैंसर के खिलाफ जंग में साथ शादी के बाद सिद्धू और नवजोत कौर दो बच्चों, बेटे करण और बेटी राबिया के माता-पिता बने। नवजोत कौर राजनीति और समाजसेवा में भी सक्रिय रहीं, अमृतसर से विधायक बनकर उन्होंने जनता की सेवा की, लेकिन जीवन में एक वक्त ऐसा आया जब नवजोत को कैंसर ने घेर लिया। उस कठिन समय में सिद्धू ने हर पल उनका साथ निभाया। साल 2023-24 में नवजोत कौर ने कैंसर को मात दी। इस दौरान सिद्धू ने सोशल मीडिया पर अपनी पत्नी के लिए भावुक संदेश लिखे- “तुम्हारे बिना जीना नहीं आता नोनी।” यह संदेश उनके अटूट प्रेम और साथ निभाने के वादे की मिसाल बन गया। क्रिकेट में संघर्ष और सक्सेस राजनीति में एंट्री टीवी की दुनिया में पहचान ……………….