SGPGI में डायबिटीज पीड़ित बच्चों का बढ़ाया गया हौसला:30 साल से बीमारी से लड़ रहीं श्वेता बनीं मिसाल, डॉक्टरों ने दिया आत्मविश्वास का मंत्र

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लखनऊ के SGPGI में रविवार को टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों के लिए एक विशेष ‘सपोर्ट ग्रुप कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया। संस्थान के एंडोक्रिनोलॉजी और पीडियाट्रिक एंडोक्रिनोलॉजी विभागों के इस कार्यक्रम में डॉक्टरों ने बीमार किशोर और उनके माता-पिता को संबल दिया। डॉक्टरों ने बताया कि देश में करीब 10 लाख लोग टाइप-1 डायबिटीज के साथ जी रहे हैं। इनमें से करीब तीन लाख रोगी 20 वर्ष से कम उम्र के हैं। हर साल इस बीमारी की चपेट में 35 हजार नए बच्चे और किशोर आ रहे हैं। SGPGI के मनोरोग विभाग के डॉ. रोमिल सैनी ने बताया कि बच्चा टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित होने पर माता-पिता की चिंताएं कई गुना बढ़ जाती हैं। लगातार इंसुलिन, खान-पान की पाबंदी और समाज के नजरिए के कारण कई बार पूरा परिवार मानसिक रूप कमजोर हो जाता है। डॉ. सैनी ने परिवारों को मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने और तनाव मुक्त रहने के व्यावहारिक तरीके सिखाए। श्वेता और एमी बनीं रोल मॉडल 30 वर्ष से टाइप-1 डायबिटीज पीड़ित सॉफ्टवेयर इंजीनियर श्वेता और SGPGI बीएससी नर्सिंग की छात्रा एमी ने संघर्ष की कहानी साझा की। इन दोनों को बीमारी के बावजूद करियर में सफलता हासिल करते देख कार्यक्रम में बच्चे व किशोर और माता-पिता का हौसला बढ़ गया। दोनों ने बच्चों को अपनी बीमारी के बावजूद लक्ष्यों को पाने के लिए प्रेरित किया। बच्चों ने नृत्य और गायन जैसी गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अभिभावकों के लिए कई खेलों का आयोजन किया गया। आपसी मेलजोल ने परिवारों को यह अहसास कराया कि वे इस लड़ाई में अकेले नहीं हैं। कार्यक्रम में करीब 50 परिवारों के 200 से अधिक लोग शामिल हुए।