नारनौल रोडवेज डिपो में यूनियन और महाप्रबंधक आमने-सामने:कर्मचारियों के उत्पीड़न, जातिवाद और निजी वाहनों को बढ़ावा देने के आरोप

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हरियाणा के नारनौल रोडवेज डिपो में कर्मचारी यूनियन और महाप्रबंधक के बीच विवाद गहरा गया है। रोडवेज कर्मचारी यूनियन 1004 के पदाधिकारियों ने डिपो महाप्रबंधक देवदत्त पर कर्मचारियों को शारीरिक व मानसिक रूप से परेशान करने सहित कई गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं महाप्रबंधक ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। यूनियन के राज्य सचिव जितेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि महाप्रबंधक का रवैया कर्मचारियों के प्रति बेहद खराब है। उन्होंने कहा कि डिपो में जातिवाद, भाई-भतीजावाद और गुटबाजी को बढ़ावा दिया जा रहा है। जो कर्मचारी प्रबंधन के खिलाफ आवाज उठाते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। बीमार कर्मचारियों को भी करते परेशान यूनियन का आरोप है कि बीमार कर्मचारियों को भी परेशान किया जा रहा है और उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता। कर्मचारियों द्वारा कई बार ज्ञापन देने और जिला प्रशासन को अवगत कराने के बावजूद समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। प्राइवेट वाहनों को तरजीह कृष्ण यादव ने यह भी आरोप लगाया कि महाप्रबंधक सरकारी वाहनों की बजाय निजी वाहनों को बढ़ावा दे रहे हैं और ड्यूटी सेक्शन में पक्षपातपूर्ण तरीके से नियुक्तियां की जा रही हैं। जिसके कारण राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है। सभी आरोप बेबुनियाद: जीएम वहीं महाप्रबंधक देवदत्त ने यूनियन के सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कर्मचारियों की मांगों पर समय रहते कार्रवाई की गई थी। उन्होंने बताया कि यूनियन द्वारा दिए गए ज्ञापन में 24 अप्रैल तक मांगें पूरी करने की समयसीमा दी गई थी, जिसे पूरा कर दिया गया। महाप्रबंधक ने कहा कि उन पर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं।