प्रदेश के डीजीपी राजीव कृष्ण ने सड़क हादसों को रोकने में नाकाम पांच अलग अलग जिलों में तैनात इंस्पेक्टर को लाइन हाजिर कर दिया और दो सीओ के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। डीजीपी ने ये कार्रवाई बुधवार को सभी जोनल अपर पुलिस महानिदेशक, पुलिस आयुक्त, क्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस उप महानिरीक्षक और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों के वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्मय से हो रही अपराध की समीक्षा बैठक के दौरान की। इन थाना प्रभारियों को किया लाइन हाजिर बैठक में जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना की भी समीक्षा की गई। 1 जनवरी 2026 से शुरू इस अभियान के तहत 487 दुर्घटना प्रभावित थानों में सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं, लेकिन 46 थानों में दुर्घटनाएं बढ़ीं और 5 थानों में तो अत्यधिक वृद्धि दर्ज की गई। डीजीपी ने इन पांच लापरवाह थाना प्रभारियों को तुरंत लाइन हाजिर करने के निर्देश दिए। इसमें वाराणसी में चोलापुर के थाना प्रभारी दीपक कुमार, गोरखपुर के कैम्पियरगंज थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह, कन्नौज के छिबरामऊ थाना प्रभारी विष्णुकांत तिवारी, बाराबंकी रामसनेही घाट थाना प्रभारी जगदीश प्रसाद शुक्ला और जौनपुर जिले के सिकरारा थाना प्रभारी उदय प्रताप सिंह शामिल हैं। दो सीओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश इसके अलावा बाराबंकी के क्षेत्राधिकारी यातायात आलोक कुमार पाठक और जौनपुर के क्षेत्राधिकारी यातायात गिरेंद्र कुमार सिंह के खिलाफ प्रारंभिक जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए। डीजीपी ने साफ कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में अपेक्षित सुधार न करने वालों पर कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। जनशिकायतों और IGRS की भी समीक्षा डीजीपी राजीव कृष्ण ने IGRS और जनशिकायत निस्तारण प्रणाली में गुणवत्ता व पारदर्शिता बनाए रखने पर विशेष बल दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खुद जनसुनवाई करें और शिकायतों का त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करें। कुछ जनपदों में सुधार की जरूरत बताते हुए उन्होंने कहा कि थाना-चौकी स्तर पर शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण प्राथमिकता रहे। मीडिया से बेहतर समन्वय की हिदायत मीडिया प्रबंधन पर डीजीपी ने कहा कि किसी भी घटना की तथ्यात्मक, अद्यतन और प्रमाणिक जानकारी प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के माध्यम से समय पर उपलब्ध कराई जाए। अधिकृत अधिकारी समयबद्ध बाइट दें, ताकि पुलिस की कार्यवाही सही ढंग से सामने आए। सोशल मीडिया पर सही तथ्यों को अपडेट कर हर महत्वपूर्ण पोस्ट पर रिप्लाई किया जाए। ट्रैफिक सुधार के लिए सीआरटीसी स्कीम लागू बैठक में C-RTC (City-Reducing Traffic Congestion) योजना के पायलट प्रोजेक्ट पर विस्तार से चर्चा हुई। 20 जनपदों में चल रही इस योजना से पीक आवर्स में ट्रैवल टाइम कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए गए। ई-साक्ष्य के प्रभावी उपयोग के लिए सभी विवेचकों को प्रशिक्षण देने और ‘यक्ष’ ऐप के माध्यम से बीट सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। बीट पुलिसकर्मी नियमित रूप से ऐप पर सूचनाएं फीड करें और अधिकारी उनकी सतत निगरानी कर संभावित अपराधों की रोकथाम करें। ये भी दिए निर्देश विवेचनाओं का समयबद्ध निस्तारण: सामान्य मामलों में 60 दिन और गंभीर अपराधों में 90 दिन के अंदर आरोप पत्र दाखिल करें। न्यायालय परिसरों की सुरक्षा: चेकिंग, सीसीटीवी और आपातकालीन तंत्र को मजबूत रखें। व्यापार मंडलों से नियमित संवाद: बाजार सुरक्षा और साइबर ठगी पर चर्चा करें। NDPS के तहत जब्त माल का पारदर्शी विनिष्टीकरण समय पर सुनिश्चित करें। बैठक के अंत में डीजीपी राजीव कृष्ण ने सभी अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि वे अपने जनपदों में बेहतर कानून-व्यवस्था बनाए रखें, जनशिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करें और रिएक्टिव पुलिसिंग की जगह प्रोएक्टिव पुलिसिंग को बढ़ावा दें। आधुनिक तकनीकी संसाधनों का बेहतर उपयोग कर अपराधों की रोकथाम पर फोकस किया जाए। डीजीपी ने सख्त लहजे में अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि आगामी त्योहारों और विभिन्न आयोजनों को देखते हुए पहले से ही पूरी तैयारी कर ली जाए। आयोजकों से समन्वय स्थापित कर सभी जरूरी पुलिस व्यवस्थाएं समय पर सुनिश्चित की जाएं, ताकि कोई भी अप्रिय घटना न हो।
सड़क हादसे काबू करने में नाकाम 5 इंस्पेक्टर लाइन हाजिर:डीजीपी ने की कार्रवाई, दो सीओ के खिलाफ भी जांच के आदेश
