मिडिल ईस्ट युद्ध से शेयर बाजार में घाटा:पानीपत के ब्रोकर ने छोड़ा घर, पिता ने 4 करोड़ की देनदारी को नकारा

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान युद्ध की वजह से शेयर बाजार में आई अस्थिरता ने पानीपत के एक परिवार में संकट खड़ा कर दिया है। शहर के सेक्टर 11 के एक 46 वर्षीय शेयर मार्केट ब्रोकर, गगन आहुजा, बाजार में हुए भारी नुकसान और मानसिक तनाव के चलते संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए हैं। परिजनों ने उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज कराई है। पानीपत पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर गगन की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस मोबाइल लोकेशन और आसपास के सीसीटीवी फुटेज के जरिए उनका पता लगाने का प्रयास कर रही है। नाइट सूट में पार्क गए थे, मोबाइल-कैश साथ ले गए लापता ब्रोकर के पिता केएल आहुजा ने जानकारी देते हुए बताया कि 30 अप्रैल की सुबह करीब 7:00 बजे गगन घर से नाइट सूट पहनकर पास के पार्क में मॉर्निंग वॉक के लिए निकले थे। वह अपने साथ मोबाइल फोन और करीब 1500 रुपए नकद भी ले गए थे। जब वह सुबह 10 बजे तक वापस नहीं लौटे और उनका कोई सुराग नहीं मिला, तो परिजनों ने पुलिस को शिकायत दी, जिसके आधार पर गुमशुदगी का मामला दर्ज किया गया है। युद्ध के चलते क्लाइंट्स को हुआ नुकसान परिजनों के अनुसार, गगन लंबे समय से शेयर मार्केट ब्रोकर का काम कर रहे थे। पिछले कुछ समय से मध्य पूर्व में जारी वैश्विक संघर्ष और युद्ध की वजह से बाजार में बड़ी गिरावट आई, जिससे गगन के कई क्लाइंट्स को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इस बात को लेकर वह अत्यधिक मानसिक तनाव और परेशानी में थे। पिता का मानना है कि संभवतः इसी दबाव के चलते उन्होंने घर छोड़ने का कदम उठाया है। 10वीं में होना है बेटे का दाखिला गगन के अचानक लापता होने से घर में कोहराम मचा हुआ है। उनकी मां और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार की चिंता इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि गगन के बेटे का इसी महीने 10वीं कक्षा में एडमिशन होना है। पूरा परिवार उनकी सुरक्षित वापसी की आस लगाए बैठा है। 4 करोड़ की देनदारी के आरोप निराधार- पिता ब्रोकर के गायब होने के बाद सोशल मीडिया और शहर में ऐसी चर्चाएं फैल रही हैं कि उन पर 4 करोड़ रुपए की देनदारी है, जिसके कारण वह लापता हुए हैं। हालांकि, पिता ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि उनके बेटे पर लेन-देन के जो आरोप लगाए जा रहे हैं, उनमें कोई सच्चाई नहीं है।