सोनीपत जिले के गांव असावरपुर में जमीन अधिग्रहण और बुलडोजर कार्रवाई को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बड़ा रूप ले चुका है। पिछले करीब 65 घंटे से किसान सुनील मोबाइल टावर पर चढ़कर विरोध कर रहा है। वीरवार को अधिकारियों और किसान प्रतिनिधियों के बीच बैठक के बाद मुख्यमंत्री से मुलाकात का समय तय हुआ, जिसके लिए आज प्रतिनिधिमंडल चंडीगढ़ रवाना हो गया है। इस मुलाकात से पूरे मामले के समाधान की उम्मीद जताई जा रही है, जबकि गांव में तनाव और आक्रोश का माहौल बना हुआ है। टावर पर डटे किसान की जिद किसान सुनील पिछले चार दिनों से करीब 250 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर बैठा है और नीचे उतरने से साफ इनकार कर चुका है। उसका कहना है कि जब तक प्रशासन लिखित में बुलडोजर कार्रवाई रोकने या वैकल्पिक जमीन देने का आश्वासन नहीं देता, वह नीचे नहीं आएगा। सीएम से मिलने पहुंचा प्रतिनिधिमंडल वीरवार को एसडीएम और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में किसानों और परिजनों के साथ बैठक हुई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री से मिलने का समय तय किया गया। आज किसान प्रतिनिधिमंडल चंडीगढ़ पहुंचकर अधिग्रहित जमीन को रिलीज कराने और जमीन के बदले जमीन देने की मांग रखेगा। बुलडोजर कार्रवाई से भड़का विवाद मंगलवार को एचएसवीपी की टीम गांव में करीब 150 अवैध मकानों को हटाने के लिए पहुंची थी। कार्रवाई के दौरान सबसे पहले सुनील के मकान और उसकी भाभी के स्कूल को निशाना बनाया गया। स्कूल का एक कमरा तोड़े जाने के बाद ग्रामीणों में भारी रोष फैल गया और इसी के विरोध में किसान टावर पर चढ़ गया। पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला मिलने पहुंचे वीरवार को पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे और सरकार पर अन्याय के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह मामला दो दशक पुराना है और भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में जमीन अधिग्रहण के कारण हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता किसान सुनील लंबे समय से टावर पर बैठा हुआ है और बताया जा रहा है कि उसने बहुत कम पानी पिया है। लगातार भूखे-प्यासे रहने से उसकी तबीयत बिगड़ने लगी है और उसे चक्कर आने की शिकायत है, जिससे परिवार और ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन का दावा- पहुंचाया जा रहा जरूरी सामान एसडीएम सुभाष चंद्र ने बताया कि मौके पर एंबुलेंस तैनात है और आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी की गई है। उन्होंने कहा कि सुनील अपने साथ खाने-पीने का सामान लेकर गया है और समय-समय पर उसे आवश्यक वस्तुएं भी पहुंचाई जा रही हैं। पत्नी ने लगाए प्रशासन पर लापरवाही के आरोप किसान की पत्नी पूनम ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अब तक किसी अधिकारी या नेता ने उनकी सुध नहीं ली। उनका कहना है कि पुलिस टावर के नीचे तैनात है, लेकिन उनके पति तक पर्याप्त मदद नहीं पहुंचाई जा रही। सड़कों पर महिलाएं, गांव में बढ़ा आक्रोश प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में गांव की महिलाएं भी सड़कों पर उतर आई हैं और प्रदर्शन कर रही हैं। ग्रामीणों ने पंचायत बुलाकर आगे की रणनीति पर चर्चा शुरू कर दी है। किसान परिवार और ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि अधिग्रहित जमीन को या तो वापस किया जाए या फिर उसके बदले जमीन दी जाए। साथ ही मकान बनाने के लिए उचित मुआवजा देने की भी मांग की जा रही है। अब सभी की नजरें मुख्यमंत्री के साथ होने वाली बैठक पर टिकी हुई हैं। सिलसिलेवार जानिए पूरा मामला… अवैध कब्जा हटाने पहुंची थी HSVP टीम: नेशनल हाईवे-44 से सटे गांव असवारपुर में एचएसवीपी की टीम मंगलवार को अवैध कब्जा हटाने पहुंची थी। वहां के रहने वाले सुनील (48) ने जैसे ही टीम को बुलडोजर के साथ मौके पर पहुंचते देखा, वह सीधे मोबाइल टावर पर चढ़ गया। उसकी इस हरकत से मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। टावर से कूदने की धमकी दी: ग्रामीण सुनील लगभग 250 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़ गया बैठ गया। प्रशासनिक कार्रवाई से आक्रोशित सुनील ने टावर से कूदकर जान देने की धमकी दी, जिसके चलते मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासन को तुरंत कार्रवाई रोकनी पड़ी। घर के नीचे चल रहा था स्कूल: जिला एचएसवीपी (HSVP) प्रशासन उसके घर और उसके ऊपर के फ्लोर पर बने स्कूल के कमरों को गिराने पहुंची थी। कार्रवाई के दौरान उसकी भाभी और स्कूल संचालक सोमिल प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठ गई। बताया गया कि बीआर जेड स्कूल में 8वीं कक्षा के 150 बच्चे पढ़ते हैं। प्रशासन ने स्कूल के एक कमरे को गिरा दिया। इसके बाद गांव में हंगामा तेज हो गया। महिला की आत्मदाह की धमकी: सोमिल ने अपने परिवार के साथ आत्मदाह करने की धमकी दी। उन्होंने कहा कि अगर उनके मकान और स्कूल को पूरी तरह तोड़ा गया तो वे बड़ा कदम उठाने को मजबूर होंगी। उधर, पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी काफी देर तक सुनील को नीचे उतरने की बात समझाने के बाद वहां से चले गए। महिला बोली-1962 से रह रहे: सोमिल का कहना है कि जिस जमीन पर वह रह रहे हैं। वह उनकी पुश्तैनी जमीन है और उस पर 1962 से मालिकाना हक है। जबकि सोनीपत से प्रशासन इसे सरकारी जमीन बता रहा है। यहां जानिए कार्रवाई और विरोध क्यों… 2006 से चला आ रहा है जमीन विवाद: एचएसएसवीपी (HSVP) के अधिकारी सिद्धार्थ ने बताया कि संबंधित जमीन का अधिग्रहण 2 मार्च 2006 को किया गया था। इसके बाद से ही इस जमीन को लेकर लगातार कोर्ट में विवाद चलता रहा। जमीन मालिक कई बार अलग-अलग कोर्ट पहुंचे, लेकिन वो हर बार हारे। हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक केस खारिज: सुनील ने मामले को लेकर पहले हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां से भी याचिका खारिज कर दी गई। इतना ही नहीं, एचएसएसवीपी (HSVP) में भी अपील की गई, लेकिन वहां से भी केस रिजेक्ट हो चुका है। 60 मीटर रोड प्रोजेक्ट में आ रही है जमीन: यह जमीन 60 मीटर चौड़ी सड़क के एलाइनमेंट में आती है, जिसके चलते इसे खाली कराना जरूरी है। प्रशासन का कहना है कि संबंधित व्यक्ति और अन्य लोग इस जमीन पर अवैध कब्जा कर रखे हैं। कई बार नोटिस देने और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही यह कार्रवाई की जा रही थी। अभी भी ले सकते मुआवजा: एचएसएसवीपी (HSVP) के अधिकारी सिद्धार्थ ने बताया कि यदि जमीन मालिक अभी भी मुआवजा लेना चाहते हैं, तो वे आवेदन कर सकते हैं। लेकिन, उन्हें वर्ष 2006 के निर्धारित रेट के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा, जो करीब 12.50 लाख रुपए प्रति एकड़ तय किया गया था।
सोनीपत में 65 घंटे से मोबाइल टावर पर चढ़ा किसान:सीएम सैनी से प्रतिनिधिमंडल मिलेगा आज; बुलडोजर कार्रवाई का विरोध
