पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट को हरियाणा सरकार ने बताया है कि राज्य में पेड़ों की सुरक्षा के लिए नया कानून बनाया जा रहा है। इसका नाम “हरियाणा वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 2026” होगा। सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी मिलने के बाद इसे अधिसूचित कर दिया जाएगा। यह जानकारी गुरुग्राम के सेक्टर-53 में घने पेड़ों वाले क्षेत्र को बचाने के लिए दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दी गई। इस क्षेत्र में ग्रुप हाउसिंग परियोजना के लिए निर्माण प्रस्तावित था। हाईकोर्ट ने पहले ही रोक दी थी निर्माण गतिविधि हाईकोर्ट ने 18 अक्टूबर 2024 को अंतरिम आदेश देकर इस स्थान पर निर्माण कार्य पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था कि निर्माण से वहां के घने और बड़े पेड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। सुनवाई के दौरान हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के अधिकारियों ने अदालत को बताया कि वे कोर्ट के आदेश का पालन करेंगे और इस पूरे हरे-भरे क्षेत्र को यथावत सुरक्षित रखा जाएगा। इस आश्वासन के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि याचिका की मुख्य मांग पूरी हो गई है और मामले का निपटारा कर दिया। कोर्ट ने गंभीर पर्यावरण खतरे का बताया संकेत हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को अनुमति दी कि वह हरियाणा और पंजाब में हरित क्षेत्र संरक्षण से जुड़ी पहले से लंबित जनहित याचिका में हस्तक्षेप कर सकता है। हाईकोर्ट ने हाल ही में राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि हरियाणा का वन क्षेत्र राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का केवल 3.65 प्रतिशत रह गया है। कोर्ट ने इसे गंभीर पर्यावरणीय खतरे का संकेत बताया। पेड़ों की कटाई पर लगाई गई रोक 1 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि हरियाणा में किसी भी प्रजाति और किसी भी उम्र के पेड़ को काटने से पहले कोर्ट की अनुमति लेनी होगी। इस आदेश के कारण जीरकपुर-पंचकूला बाईपास के लिए प्रस्तावित करीब 5,000 पेड़ों की कटाई भी फिलहाल रुकी हुई है। यदि नया कानून लागू होता है, तो हरियाणा में पेड़ों की कटाई पर और सख्त नियंत्रण होगा। इससे शहरों और गांवों में हरित क्षेत्र बचाने में मदद मिलेगी और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी।
हरियाणा में पेड़ों की सुरक्षा के लिए बनेगा कानून:हाईकोर्ट में सरकार का खुलासा; गुरुग्राम वन क्षेत्र याचिका में हुई सुनवाई, 3.65% वन बचा
