“ज्योति ने न सिर्फ मुझे परेशान किया है, बल्कि क्रूर तरीके से मेरे परिवार को तोड़ने की कोशिश भी की है। शादी के बाद से ही मुझे लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। अब हम दोनों के एक साथ रहने का कोई चांस नहीं है।” पावर स्टार पवन सिंह की ये बातें उन्हें ज्योति सिंह से तलाक दिला सकती हैं। संविधान का आर्टिकल 142 तलाक के मामले में क्या कहता है। पवन सिंह ने बुधवार को फैमिली कोर्ट में सुनवाई के दौरान जो कहा, उसे लेकर दोनों पक्ष के वकीलों का क्या कहना है। जानेंगे, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। सवाल-1ः भोजपुरी स्टार पवन सिंह और ज्योति सिंह के तलाक का पूरा मामला क्या है? जवाबः ज्योति, पवन सिंह की दूसरी पत्नी हैं। अप्रैल 2022 में ज्योति सिंह ने तलाक के लिए अर्जी दाखिल की। पवन सिंह ने भी आरा फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी लगाई। 25 मार्च को सुलह की कोशिश के लिए कोर्ट में दोनों को हाजिर होना था। पवन सिंह आए लेकिन ज्योति नहीं आई। पवन सिंह बुधवार को आरा फैमिली कोर्ट पहुंचे थे, उन्होंने कोर्ट में जज से कहा, “न्यायालय जो भी फैसला देगा, मुझे मंजूर होगा।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे वन-टाइम सेटलमेंट के लिए तैयार हैं, ताकि यह मामला जल्द से जल्द समाप्त हो सके। उन्होंने कहा कि ज्योति सिंह की वजह से मेरा करियर भी प्रभावित हो रहा है, मैं अपना काम भी नहीं कर पा रहा हूं। इसी वजह से मैं अब इस रिश्ते से बाहर निकलकर नई जिंदगी शुरू करना चाहता हूं। मैं ज्योति सिंह से तलाक चाहता हूं। सवाल-2ः पवन सिंह पत्नी को नहीं रखना चाहते। क्या कोर्ट साथ रहने का आदेश दे सकता है? जवाबः नहीं। इसको जानने के लिए 3 साल पहले तलाक को लेकर सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन जस्टिस संजय किशन कौल, संजीव खन्ना, ए.एस ओका, विक्रम नाथ और जे. के महेश्वरी की संवैधानिक बेंच का एक फैसला पढ़िए… सवाल-3ः पवन सिंह के तलाक केस में संविधान के आर्टिकल 142 का रोल हो सकता है? जवाबः बिल्कुल। 2023 में शिल्पा शैलेश बनाम वरुण श्रीनिवासन केस में संवैधानिक बेंच तलाक के मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि अब सुलह की कोई गुंजाइश नहीं बची है, तो कोर्ट तलाक मंजूर कर सकता है। पवन सिंह ने बुधवार को आरा फैमिली कोर्ट में लगभग यही बातें कही। उन्होंने कहा कि अब ज्योति सिंह के साथ आगे रिश्ता रखने का कोई मतलब नहीं है। मैं तलाक चाहता हूं और वन टाइम सेटलमेंट के लिए भी तैयार हूं। पवन-ज्योति और शिल्पा शैलेश-वरुण श्रीनिवासन केस में समानता है… संविधान का आर्टिकल 142 क्या है सवाल-4ः पवन सिंह-ज्योति सिंह के तलाक केस में क्या कोर्ट सुलह करा सकता है? जवाबः नीचे लगी क्रिएटिव में इस सवाल का जवाब पढ़ें… पवन सिंह-ज्योति का मामला दूसरे नंबर की सिचुएशन पर फीट बैठ रहा है। इसका मतलब कि कोर्ट दोनों के बीच सुलह नहीं नहीं करा सकती। सवाल-5ः अगर दोनों का तलाक होता है तो ज्योति को कितनी एलिमनी मिल सकती है? जवाबः पवन सिंह और ज्योति सिंह की शादी को 8 साल हो चुके हैं। ज्योति, पवन सिंह की दूसरी पत्नी हैं। दरअसल, पवन सिंह की पहली शादी 2014 में नीलम सिंह से हुई थी। शादी के एक साल बाद ही नीलम ने सुसाइड कर लिया था। इसके 3 साल बाद 6 मार्च 2018 को पवन सिंह ने ज्योति से यूपी के बलिया में शादी की। शादी के कुछ महीने बाद ही दोनों के रिश्तों में खटपट शुरू हो गई। अप्रैल 2022 में ज्योति सिंह ने तलाक के लिए अर्जी दाखिल की। पवन सिंह ने भी आरा फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी लगाई। फिलहाल, मामले में अगली सुनवाई 5 मई को होगी। पिछली तारीख पर ज्योति के वकील विष्णुधर पांडेय ने बताया था, ‘ज्योति सिंह ने जज से इंसाफ मांगा है। उन्होंने कहा है कि अगर पवन सिंह नहीं रखना चाहते तो मुझे 10 करोड़ रुपए और एक मकान एलिमनी (गुजारा भत्ता) के तौर पर दें।’ एलिमनी होती क्या है… जब एक व्यक्ति दूसरे को खाना, कपड़ा, घर, एजुकेशन और मेडिकल जैसी बेसिक जरूरत की चीजों के लिए फाइनेंशियल सपोर्ट करता है तो उसे मेंटेनेंस (एलिमनी) यानी गुजारा भत्ता कहते हैं। हिंदू मैरेज एक्ट 1955 के तहत 2 तरह की एलिमनी (गुजारा भत्ता) होती है। अंतरिम गुजारा भत्ता: जब तक कोर्ट की कार्यवाही चल रही होती है और शुरुआत में खर्चा करने के लिए पैसा नहीं है। तब सेक्शन 24 के तहत कोर्ट का फैसला आने तक शिकायतकर्ता को गुजारा भत्ता मिलता रहता है। परमानेंट गुजारा भत्ता: सेक्शन 25 के तहत तलाक के बाद मिलने वाली एलिमनी परमानेंट भत्ता कहलाती है। इस मेंटेनेंस में स्त्रीधन शामिल नहीं होता, उस पर सिर्फ पत्नी का अधिकार होता है। भत्ता कितना होगा यह पति की आय, संपत्ति, जिम्मेदारियां आदि को देखते हुए कोर्ट तय करता है। ज्योति को क्या 10 करोड़ रुपए और घर एलिमनी के तौर पर मिल सकती है? इसकी संभावना बेहद कम है। क्योंकि 2024 लोकसभा चुनाव के हलफनामे के मुताबिक, भोजपुरी स्टार पवन सिंह का नेटवर्थ ही कुल 16 करोड़ 75 लाख रुपए है। 1 करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज है। एलिमनी तय करने का कोई सटीक फॉर्मूला नहीं है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कुछ बेंचमार्क तय किए हैं। जैसे… मंथली/पीरियोडिक पेमेंट: 2017 के कल्याण डे चौधरी और रीता डे चौधरी केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पति की नेट मंथली सैलरी का 25% देना ठीक हो सकता है। जैसे- अगर पति की सैलरी 1 लाख रुपए महीने है, तो 25,000 रुपए मंथली एलिमनी दी जा सकती है। एकमुश्त: पति की टोटल नेट वर्थ का 1/5 से 1/3 मतलब 20 से 33% तक एलिमनी दी जा सकती है। जैसे- अगर पति की वर्थ 50 लाख रुपए है तो पत्नी को 10 से 16.5 लाख रुपए तक एकमुश्त मिल सकती है। सुप्रीम कोर्ट के इस आधार को हूबहू पवन सिंह और ज्योति पर लागू किया जाए तो…
अब एक नहीं होंगे पवन सिंह और ज्योति!:तलाक पर कोर्ट का क्या हो सकता है फैसला, ज्योति की 10 करोड़ की मांग, जानिए कितना मिलेगा
