हरियाणा के MBBS एग्जाम घोटाले में स्टूडेंट्स को राहत:हाईकोर्ट ने निष्कासन रद्द किया; यूनिवर्सिटी ने नहीं दिया सुनवाई का अवसर

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हरियाणा के एमबीबीएस एग्जाम घोटाले से जुड़े बहुचर्चित मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक फैसला सुनाते हुए 2 छात्राओं के निष्कासन आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि बिना उचित सुनवाई और दस्तावेज उपलब्ध कराए किसी भी छात्र के खिलाफ कठोर कार्रवाई करना कानूनन टिकाऊ नहीं है। मामला के अनुसार खुशी सहरावत और विधि राणा द्वारा दायर याचिकाओं से जुड़ा है, जिनमें रोहतक स्थित पंडित बीडी शर्मा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज द्वारा 2 फरवरी 2026 को जारी निष्कासन आदेश को चुनौती दी गई थी। विश्वविद्यालय ने परीक्षा में कथित गड़बड़ी के आरोप में छात्राओं को निष्कासित करते हुए उनके संबंधित विषयों के परिणाम भी रद्द कर दिए थे। स्टूडेंट को नहीं मिला सुनवाई का अवसर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस कुलदीप तिवारी की पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि विश्वविद्यालय की अनुशासनात्मक कार्रवाई में गंभीर प्रक्रिया संबंधी खामियां हैं। कोर्ट ने कहा कि कुलपति ने अंतिम आदेश पारित करने से पहले न तो छात्राओं को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया और न ही बोर्ड आफ डिसिप्लिन की सिफारिशें और हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की रिपोर्ट उपलब्ध कराई। यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन है।
विवि ने कहा, बड़े स्तर का घोटाला
मामले में विश्वविद्यालय का पक्ष था कि बड़े स्तर पर परीक्षा घोटाला सामने आया था, जिसमें 30 छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं में गड़बड़ी मिली। जांच में उत्तर पुस्तिकाओं के सीरियल नंबर में अंतर, कॉपियों की अदला-बदली और 46 खाली उत्तर पुस्तिकाओं के दुरुपयोग जैसी गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। हैंडराइटिंग विशेषज्ञ की रिपोर्ट में भी संबंधित छात्रा की लिखावट मेल नहीं खाने की बात कही गई थी। इसके बावजूद कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोप चाहे कितने भी गंभीर क्यों न हों, लेकिन बिना निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाएं कठोर दंड नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि प्राकृतिक न्याय का पालन किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई की अनिवार्य शर्त है। 27 को वीसी के सामने पेश होंगे स्टूडेंट
कोर्ट ने निष्कासन आदेश रद्द करते हुए छात्राओं को 27 मार्च 2026 को कुलपति के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया है। साथ ही विश्वविद्यालय को आदेश दिया गया है कि वह उन्हें सभी संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए और उनके जवाब प्राप्त कर व्यक्तिगत सुनवाई के बाद नया निर्णय ले।